ऑर्थोपेडिक इंप्लांट के लिए आिखर निकाले टेंडर

Beawar News - 306 बेड वाले राजकीय अमृतकौर अस्पताल में आने वाले ऑर्थोपेडिक मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। जल्द ही एकेएच में ऑपरेशन...

Jul 14, 2019, 07:20 AM IST
306 बेड वाले राजकीय अमृतकौर अस्पताल में आने वाले ऑर्थोपेडिक मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। जल्द ही एकेएच में ऑपरेशन करवाने वाले हड्डियों के मरीजों को ना सिर्फ रियायती दरों पर इंप्लांट की सुविधा मिल सकेगी बल्कि भामाशाह कार्ड धारी मरीजों को निशुल्क इंप्लांट मिल सकेंगे। जिससे यहां आने वाले मरीजों को राहत मिलेगी तो वहीं यहां भामाशाह योजना के तहत चयनित मरीजों के ऑपरेशन से एमआरएस को भी फायदा होगा। गौरतलब है कि प्रतिदिन 1 हजार से ज्यादा आउटडोर 306 बेड वाले राजकीय अमृतकौर अस्पताल में औसतन हर माह 30 से अधिक दुर्घटना के मामले भी सामने आते हैं। लेकिन जिन मरीजों के परिजन रॉड और स्क्रू खरीदकर ला देते हैं उनके ऑपरेशन हो जाते हैं, बाकी मरीजों को रैफर का दंश झेलना पड़ता है। पहले ऑर्थोपेडिक सर्जन नहीं होने के कारण इंप्लांट के लिए टेंडर नहीं किए जा सके तो वहीं पिछले करीब एक साल से एकेएच में ऑर्थोपेडिक सर्जन होने के बावजूद टेंडर नहीं होने के कारण एकेएच को एक भी इंप्लांट (प्लेटिंग, नेलिंग (रॉड) व वायरिंग) नहीं मिली। इंप्लांट के लिए टेंडर नहीं होने के कारण दुर्घटना या अन्य कारणों से हड्‌डी के मरीजों को ऑपरेशन के लिए या तो खुद इंप्लांट खरीद कर लाना पड़ रहा है या इंप्लांट नहीं ला पाने की स्थिति में रैफर करना पड़ रहा है। डॉक्टर ऑपरेशन के लिए इंप्लांट (प्लेट, रॉड और वायर) के लिए लिखकर देते हैं लेकिन टेंडर नहीं होने के कारण भामाशाह के मरीजों को भी बाहर से ही इंप्लांट खरीदने पड़ते हैं। इस समस्या को लेकर भास्कर ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी।

तीन फर्माें ने भरा टेंडर...

अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजों की परेशानी को देखते हुए इंप्लांट के लिए टेंडर निकाले। जिसमें तीन फर्माें ने रूचि दिखाते हुए निविदाएं भरी है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा फर्माें से उपलब्ध करवाए जाने वाले उपकरणों की सेंपल मांगे गए हैं। इन सैंपलों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी में ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अरविंद अग्रवाल, सर्जन डॉ. पुखराज चौधरी और डिप्टी कंट्रोलर डॉ. मुकेश कुमार अग्रवाल शामिल है। यह कमेटी फर्माें द्वारा उपलब्ध करवाए जाने वाले उपकरणों की जांच करेगी। सबसे पहले उपकरण की जांच कर यह सुनिश्चित करेगी की उपकरण तय मापदंड के अनुसार है या नहीं। उसके बाद आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

ब्यावर. ऑर्थोपेडिक अॉपरेशन में काम आने वाले इंप्लांट।

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