एेड़ा पर राेक लगाने के लिए वन विभाग मुस्तैद
वन विभाग की ओर से होली के अवसर पर वन्य क्षेत्र में ऐड़ा को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। रविवार को वन विभाग ने मसूदा, हरराजपुरा व जवाजा के वन्य क्षेत्रों से गश्त लगाई।
अजमेर डिवीजन की डीएफओ सुदीप कौर के नेतृत्व में वन विभाग के कर्मचारियों ने वन्य क्षेत्रों में गश्त लगाई। रेंज स्तर के अलावा नाका स्तर पर भी छोटी टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें वन्य इलाकों में गश्त कर शिकार करने वालाें के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी जाएगी। सामूहिक शिकार करने वालाें के खिलाफ वन अाैर पुलिस विभाग की तरफ से संयुक्त अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। रविवार को गश्त के दौरान राकेश मालाकार, मुकेश मीणा, राजुराम, भगवान सिंह, नरसी रायका, सुधीर, गौरव, हजारी, भरत सिंह अादि मौजूद रहे।
ब्यावर वन क्षेत्र के निकटवर्ती ग्रामों में होली के अवसर पर सालों से ऐड़ा खेलने की प्रथा चली आ रही है। हाेली के बाद परंपरा अनुसार ग्रामीण क्षेत्राें में ब्यावर, जवाजा, मसूदा, भिनाय,टॉडगढ़,भीम,देवगढ़, ब्यावर में एेड़ा प्रथा के तहत अवैध रूप से वन्य जीवों का शिकार किया जाता है। इसमें खासकर खरगाेश, तीतर, बटेर, माेर अादि जानवरों का शिकार किया जाता है। जबकि अवैध शिकार वन्यजीव सुरक्षा अधिनियम 1972 के तहत दंडनीय अपराध है। वन्यजीव सरंक्षण अधिनियम 1972 के तहत वन्यजीवाें काे नुकसान पहुंचाना, अंडाे काे नष्ट करना अाैर विषैला पदार्थ खिलाकर अाैर पशु का शिकार करना, अंग भंग करना अादि दंडनीय अपराध है। अधिनियम के तहत धारा 51 में दंड का प्रावधान है जाे कि 2 साल से लेकर अधिकतम 7 साल तक की कैद अाैर दाे हजार से 10 हजार रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। एक बार शिकार करने के बाद दाेबारा फिर यही गलती दाेहराने पर कम से कम 3 साल का कारावास अाैर 7 साल की सजा अाैर 25 हजार रुपए का जुर्माने का प्रावधान है।
डीएफओ सुदीप कौर के नेतृत्व में गश्त करते वन विभाग के कर्मचारी।