टीबी की पहचान के लिए होगा घर-घर सर्वे

Bhaskar News Network

Jun 12, 2019, 08:05 AM IST

Beawar News - देश में टीबी रोग से मरने वालों की संख्या में कमी नहीं आने और चिकित्सा सुविधाओं से महरूम रहने वाले विशेष...

Beawer News - rajasthan news home house surveys for tb identification
देश में टीबी रोग से मरने वालों की संख्या में कमी नहीं आने और चिकित्सा सुविधाओं से महरूम रहने वाले विशेष परिस्थितियों वाले ग्रामीण लोगों की समय पर जांच करवा कर चिकित्सा सुविधा मुहैया के मकसद से केंद्र सरकार के राष्ट्रव्यापी स्पेशल टीबी अभियान के तहत 1 से 17 जुलाई तक एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान चलाया जाएगा।

केंद्र सरकार की योजना के अनुसार प्रदेश के 34 जिलों में एक साथ एक्टिव केस फाइंडिंग अभियान चला कर क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम चलाया जाएगा। दो चरणों में चलने वाले एक अभियान का पहला चरण 1 से 17 जुलाई तक चलेगा जबकि दूसरा चरण नवंबर में चलाया जाएगा।

हालांकि नवंबर की तारीखों का एलान अभी नहीं किया गया है। लेकिन जुलाई से प्रारंभ होने वाले अभियान को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई है।

आश्चर्य की बात है कि 27 लाख 70 हजार से अधिक की आबादी वाले अजमेर जिले में अभी भी करीब 10 प्रतिशत लोग ऐसे है जो चिकित्सा सुविधाओं से महरूम है या तो वो विभिन्न कारणों से अस्पताल जांच के लिए नहीं आ सकते या उन तक चिकित्सा टीम नहीं पहुंच पाती। ऐसे लोगों के लिए ये अभियान महत्वपूर्ण साबित होगा।

हाइरिस्क एरिया पर विशेष नजर: जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश कुमार गुप्ता ने बताया कि अभियान के तहत अजमेर जिले में वृद्धाश्रम, ईटों के भट्‌टे, स्लम एरिया, कच्ची बस्तियां, दूर दराज के ग्रामीण इलाकों में सर्वे करने के लिए विभिन्न टीमों का गठन किया जाएगा। इन टीमों को इस विशेष अभियान एक्टिव केस फाइंडिंग के तहत उस समूह तक पहुंच बनानी है जो सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। उस समूह का निदान कर उसे उपचार केंद्र तक लाया जाना है। जिससे की टीबी के प्रसार की गति पर रोक लगाई जा सके। विभाग के आंकडों के अनुसार पूरे जिले में 10 प्रतिशत आबादी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे मतलब 2 लाख 4 हजार से अधिक लोग ऐसे है। विभाग के अनुसार एक टीम एक दिन में करीब 170 लोगों का सर्वे करेगी।

इन कैटेगरी पर फोकस: अभियान के तहत स्वास्थ्य केंद्र से दूरस्थ, खान मजदूर, पत्थर गिट्टी, क्रेशर मशीन के श्रमिक, उच्च कुपोषित क्षेत्र, कच्चा दूध पीने वाले, अधपका मांस खाने वाले(आदिवासी क्षेत्र), एचआरजी और एचआईवी, धागा/ सिलाई/ कांच उद्योग के कार्मिक, कपास मिल/ जिनिंग फैक्ट्री के श्रमिकों, असंगठित मजदूर, चाय बगानों के श्रमिक, भोपे/ घोडले से इलाज ले रहे मजदूर, पूर्व टीबी रोगी समेत अन्य कैटेगरी तय की गई है।

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