स्टाेर में ही अवधिपार हाे गई दवाएं, महीने भर नहीं ली सुध

Beawar News - प्रदेश के अस्पतालों में कई बार मरीजों को दवाएं नहीं मिलने और मरीजों को बाहर से दवा लाने की शिकायतें आए दिन आती रहती...

Bhaskar News Network

Jun 25, 2019, 07:15 AM IST
Beawer News - rajasthan news medicines administered in the star itself not a month
प्रदेश के अस्पतालों में कई बार मरीजों को दवाएं नहीं मिलने और मरीजों को बाहर से दवा लाने की शिकायतें आए दिन आती रहती हैं। लेकिन ब्यावर के राजकीय अमृतकौर अस्पताल के सेंटर स्टोर में हजारों रुपए के इंजेक्शन स्टाेर मंे ही अवधिपार हाे गए अाैर एक माह से उनका निस्तारण भी नहीं किया गया है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि यह इंजेक्शन अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में काम आते हैं।

अमृतकौर अस्पताल के सेंटर स्टोर में रखे बैच नंबर N-9468 गत माह से अवधि पार हो गए। इस बैच के सेंटर स्टोर में 5 बॉक्स पड़े हैं। अमृतसर के क्वालिटी फार्मास्यूटिकल लिमिटेड द्वारा निर्मित बुपिवाक्वेन इंजेक्शन जून 2017 में निर्माण किए गए। इसकी अवधि मई 2019 में समाप्त हो गई। लेकिन यह वैक्सीन पड़ी पड़ी एक्सपायर हो गई। बताया गया है कि इस वेक्सीन में हाइड्रोक्लोराइड इंजेक्शन आईपी 0.5% है। यह लोकल एनेस्थेटिक है और ऑपरेशन थिएटर में ही काम आता है।

लापरवाही पड़ सकती है भारी : हालांकि अभी तक अवधि पार हो चुके इन इंजेक्शन के ऑपरेशन थिएटर में होने की पुष्टि नहीं हो सकी है। लेकिन ऐसी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। अगर किसी की लापरवाही से यह इंजेक्शन गलती से मरीज या अॉपरेशन थिएटर में पहुंच जाए तो किसी की जान पर बन सकती है।

1 वैक्सीन पांच मरीजों को लगती: गौरतलब है कि ऑपरेशन थिएटर में काम आने वाली यह वैक्सीन लोकल एनेस्टिक है। विशेषज्ञों ने बताया कि जनरल एनेस्टिक मरीज को अस्थाई रूप से बेहोश करने के काम आता है तो वहीं लोकल एनेस्टिक सामान्य ऑपरेशन में काम आते हैं। इससे विशेष रूप से उस हिस्से को कुछ समय के लिए सुन्न कर दिया जाता है जहां का ऑपरेशन किया जाना होता है। विशेषज्ञों के अनुसार एक वैक्सीन से 5 प्रिक(पांच जनों को लगाए जाते है) हैं।

ऐसे होता है निस्तारण : निशुल्क दवा योजना के डीपीसी डॉ. मोहित देवल के अनुसार कोई भी दवा अवधि पार होते ही सबसे पहले उसे अन्य दवाओं से अलग पृथक से सुरक्षित रखा जाता है। जहां वह अन्य दवाओं के साथ मिक्स ना हो सके। दवाओं की कीमत के आधार पर निस्तारण की प्रक्रिया भी अलग अलग होती है। अगर कम कीमत की दवाएं हो तो उसे विभागाध्यक्ष अपने स्तर पर निस्तारित कर सकता है। लेकिन अगर अधिक कीमत वाली दवाएं हो तो उसके लिए कमेटी गठित की जाती है। दवा का निस्तारण किया जाता है। हर वित्तीय वर्ष में एक बार इन दवाओं को बायोमेडिकल वेस्ट के साथ निस्तारित किया जाता है।

ब्यावर. स्टोर में रखे एक्सपायरी इंजेक्शन के बॉक्स।

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