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नहीं टूटी परंपरा... प्रशासन ने स्वीकृति नहीं दी, लेकिन ठाट बाट से निकली बादशाह की सवारी

एक वर्ष पहले
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बादशाह : राेशन सिंहल, वजीर : श्याम सुंदर, बीरबल : विजय दाधीच

यह सुनाया फरमान

{शहर में ट्रेफिक व्यवस्था सुचारू हो।

{ब्यावर को स्मार्ट सिटी मिशन में शामिल किया जाए।

{नगर परिषद खाली भूखंडों सदुपयोग करे।

{सभी विभागों में एकल खिड़की हो।

{ठेला संचालकों और फुटकर व्यापारियों को निश्चित जगह आवंटित की जाए, ताकि मुख्य बाजार में व्यवस्था सुचारू हो।

ब्यावर | काेराेना वायरस के असर काे देखते हुए ब्यावर एसडीएम द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद बुधवार काे ब्यावर में बादशाह की सवारी राजसी ठाट बाट के साथ निकली। यह अायाेजन मुगल बादशाह अकबर द्वारा सेठ टोडरमल को ढाई दिन की बादशाहत देने की याद में परंपरागत तरीके से पिछले 170 वर्षों से मनाया जा रहा है। श्री बादशाह मेला समिति द्वारा सर्व समाज के सहयोग से बादशाह की सवारी निकालने का निर्णय लिया गया। इस बार एक बड़ा फर्क यह रहा कि हर बार बादशाह शहर के विकास को लेकर उपखंड अधिकारी को फरमान सुनाते हैं, इस बार जनप्रतिनिधियों को सुनाया गया। सवारी हवा में गुलाल का गुबार छोड़ने के लिए इस बार मशीन भी लगाई गई। सवारी भैंरूजी के खेजड़े से शुरू हुई। बादशाह और वजीर ने लोगों को पुड़िया में गुलाल बांधकर शुरू किया खर्ची लुटाना। बीरबल बने विजय दाधीच सवारी के आगे नृत्य करते चल रहे थे। पारस्परिक सौहार्द, भाईचारा और कौमी एकता की मिसाल कायम रखते हुए सभी ने एक-दूसरे पर गुलाल लगाकर शुभकामना दी।

चंग की थाप और लोक फागुणी गीत : बादशाह की सवारी में देहात से शिरकत करने वालों की टोली का अपना अलग ही अंदाज रहता है। गांवों की ये टोली चंग की थाप पर देहाती फागुणी गीत गाकर अपनी खुशी का इजहार करती है। इन गीतों में फाल्गुन की मस्ती और सामाजिक एकता के संदेश छाए हुए थे।

इस बार फरमान जनप्रतिनिधियों को सुनाया : इस बार बादशाह ने एसडीएम काे नहीं, बल्कि जन प्रतिनिधियों काे फरमान सुनाया। परंपरा है कि बादशाह एसडीएम काे शहर के डेवलपमेंट से संबंधी फरमान सुनाते हैं। बादशाह सवारी की अनुमति नहीं मिलने के कारणा इस बार यह हक जनप्रतिनिधियों काे मिला। मेला संयोजक भरत कुमार मंगल के मुताबिक परंपरा को जीवित रखने के लिए समाज की ओर से सर्वसम्मति से सवारी निकालने का निर्णय लिया गया। गुलाल युद्ध भी जन प्रतिनिधियों से लायंस गार्डन में हुअा। बादशाह ने विधायक शंकरसिंह रावत, सभापति नरेश कनोजिया, पीसीसी सचिव पारस पंच, भाजपा देहात जिलाध्यक्ष देवीशंकर भूतड़ा और कांग्रेस नेता मनोज चौहान के नाम सुनाया गया। फरमान सुनाने की यह परंपरा ब्यावर के संस्थापक कर्नल एडवर्ड डिक्सन के समय से प्रभावी है।

मशीन से गुलाल का गुबार : मेले में बादशाह की सवारी में गुलाल का गुबार बनाने वाली मशीन भी लगाई गई। मशीन में लगे 10 फीट के पाइप से 20 किलाे गुलाल से गुबार बन रहा था, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। एक हजार किलो गुलाल की व्यवस्था की गई थी।

इन्होंने संभाली व्यवस्था : अग्रवाल समाज अध्यक्ष निर्मल बंसल, रमेश बंसल, श्री बादशाह मेला समिति के सह संयोजक जिनेंद्र सिंहल, राजकुमार गुप्ता, आलोक गुप्ता, और गौरव गर्ग, समाज के श्रवण बंसल, लक्ष्मीनारायण गोयल, आरसी गोयल, अमित बंसल, अंकुर मित्तल, सुनील सिंहल, राजेंद्र मंगल, अशोक गोयल, गोविंद अग्रवाल, अनिल सर्राफ, स्वरूप झंवर, राजेश झंवर, जुगल किशोर राजस्थानी, नीरज राठौड़ और बिट्टू राठौड़ के नेतृत्व में श्रीराम सेना ने व्यवस्था संभाली।
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