70 लाख की बकाया राशि अटकने से निजी अस्पतालों ने भामाशाह कार्डधारियों का उपचार करने से किया इंकार

Beawar News - उपखंड एवं आसपास के हजारों भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभार्थी मरीजों को निजी अस्पतालों में पिछले तीन दिनों...

Dec 04, 2019, 08:20 AM IST
Beawer News - rajasthan news private hospitals refuse to treat bhamashah card holders due to the stuck amount of 70 lakh
उपखंड एवं आसपास के हजारों भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभार्थी मरीजों को निजी अस्पतालों में पिछले तीन दिनों से किसी भी प्रकार की सुविधा नहीं मिल रही है। क्योंकि इंश्योरेंस कंपनी द्वारा करीब एक महीने से प्रदेश भर के निजी अस्पतालों के साथ ही ब्यावर में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत मरीजों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करवा रहे ब्यावर के पांच निजी अस्पतालों ने भी योजना के तहत उपचार करने से इंकार कर दिया। जिस कारण उपखंड और आस पास के क्षेत्रों के हजारों मरीजों को या तो पैसे देकर उपचार करवाना पड़ रहा है या सरकारी अस्पताल में उपचार के लिए परेशान होना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को उठानी पड़ रही है। क्योंकि प्रसव और उससे संबंधित इलाज को बीमा कंपनी ने राजकीय अस्पतालों से अलग कर सिर्फ निजी अस्पतालों में ही प्रसव को भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत रखा गया। ऐसे में निजी अस्पतालों में भी भामाशाह योजना के तहत सभी प्रकार के इलाज करने से इंकार करने के कारण प्रसूताओं को सरकारी अस्पताल में जाना पड़ रहा है। जहां उन्हें योजना के तहत कोई लाभ नहीं मिल रहा है। निजी अस्पतालों में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत मरीजों का निशुल्क इलाज करने से साफ इंकार कर दिया। जिससे कई मरीजों ने जहां अपने ऑपरेशन टाल दिए तो कई मरीजों ने मजबूर होकर पैसे जमा करवा इलाज करवाए। सबसे ज्यादा परेशानी गुर्दे के मरीजों को उठानी पड़ रही है। शहर के एक निजी अस्पताल में योजना के तहत निशुल्क डायलिसिस करवाने वाले मरीजों को पिछले तीन दिनों से शुल्क जमा करवा कर डायलिसिस करवानी पड़ रही है।

अनदेखी की भेंट चढ़ रहे मरीज: मरीजों और उन्हें निशुल्क उपचार करवाने वाले निजी अस्पतालों के सामने यह समस्या इंश्योरेंस कंपनी और प्रदेश सरकार के बीच भुगतान को लेकर विवाद के कारण आ रही है। इश्योरेंस कंपनी द्वारा 5 नवंबर के बाद से निजी अस्पतालों को भुगतान नहीं किया गया। इस कारण निजी अस्पतालों के एक प्रतिनिधि मंडल ने सरकार के प्रतिनिधि से 25 नवंबर को वार्ता कर भुगतान नहीं होने पर 1 दिसंबर से योजना के तहत किसी प्रकार की सुविधा देने में असमर्थता जताई। लेकिन फिर भी भुगतान नहीं होने के कारण निजी अस्पतालों ने 1 दिसंबर से मरीजों से राशि वसूलना शुरू कर दिया।

प्रदेश में एक महीने से 90 करोड़ रुपए बकाया, ब्यावर शहर के 5 निजी अस्पतालों में चल रहा भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत इलाज, डायलिसिस से भी किया इंकार, ऑपरेशन भी टाले, प्रसूताओं को नहीं मिल रहा लाभ, प्रदेश भर में निजी अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित

एक अस्पताल के ही बकाया है 50 लाख

इस संबंध में जानकारी चाहने पर ब्यावर निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों ने बताया कि शहर के पांच निजी अस्पतालों आनंद मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पीटल एंड रिसर्च सेंटर, जय क्लिनिक, रिषि ऑर्थो, जेएमडी और पार्श्वनाथ मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पीटल भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत चयनित है। जानकारी मिली है कि बीमा कंपनी ने प्रदेश भर के निजी अस्पतालों का करीब 90 करोड़ रुपए अटका दिए है। जिनमें से ब्यावर के अस्पतालों का करीब 70 लाख रुपए बकाया है। योजना के तहत टर्सरी पैकेज के लिए चयनित शहर के एक मात्र अस्पताल आनंद मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पीटल एंड रिसर्च सेंटर के ही 50 लाख रुपए के करीब बकाया है। निजी अस्पतालों के प्रतिनिधियों का यह भी आरोप है कि बीमा कंपनी द्वारा ऑनलाइन जो भुगतान दिखाया जाता है वह भी पूरा नहीं मिलता।

5 निजी अस्पतालों में मिल रही हैं भामाशाह सुविधा

उपखंड में राजकीय अमृतकौर अस्पताल के अलावा 5 निजी अस्पतालों में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा याेजना के तहत मरीजों को निशुल्क उपचार मिलता है। इन 5 अस्पताल में प्रतिदिन करीब 100 मरीजों को योजना के तहत भर्ती किया जाता है। इसके साथ ही शहर डायलिसिस की सुविधा भी शहर में राजकीय अस्पताल के अलावा सिर्फ 2 निजी अस्पताल में उपलब्ध है। वहां प्रतिदिन करीब 10 मरीजों की डायलिसिस होती है। लेकिन सभी निजी अस्पतालों द्वारा उपचार की सुविधा नहीं दिए जाने से मरीजों को मजबूरी में भुगतान देकर उपचार करवाना पड़ रहा है।

मेटरनिटी वार्ड पर लगाया दरवाजा

अजमेर के जनाना अस्पताल के बाद जिले में सबसे ज्यादा प्रसव करवाने वाले राजकीय अमृतकौर अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड के मुख्य दरवाजा लगा दिया गया। जिससे अब प्रसूताओं को नवजात बच्चों को ठंड से राहत मिलेगी। भास्कर में खबर प्रकाशित होते ही हरकत में अाए अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत तकनीकी कर्मचारी को बुलवा कर मेटरनिटी वार्ड का मेनगेट लगवा दिया। कड़ाके की ठंड पड़ने के बावजूद मेटरनिटी वार्ड के मुख्य दरवाजा टूटा होने के कारण प्रसूताओं और नवजात बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस परेशानी को लेकर मंगलवार को भास्कर ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। जिसके बाद हरकत में आते हुए अस्पताल प्रबंधन द्वारा मेटरनिटी वार्ड का गेट लगवा दिया गया। अब दरवाजा लगा देने के बाद सर्द हवाओं से भी बचाव हो रहा है। अब प्रसूताओं और परिजनों ने वार्ड में बच्चों और मरीजों के लिए गर्म पानी की व्यवस्था करने के लिए भी मांग उठाई है। कई दिनों से ठंड से परेशान हो रही प्रसूताओं और उनके परिजनों ने बताया कि हालांकि अब उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज मिल गया है लेकिन उन्हें खुशी है कि भास्कर की पहल के बाद वार्ड में दरवाजा लगा दिया गया। जिससे अब आने वाली प्रसूताओं और नवजात बच्चों को राहत मिलेगी।

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