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कोरोना पर हावी रहा कोड़ामार होली का उत्साह

एक वर्ष पहले
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काेराेना के खाैफ पर ब्यावर में जीनगर समाज की काेड़ामार हाेली का उत्साह हावी रहा। यह खास होली देखने शहर ही नहीं बल्कि आस-पास से बड़ी संख्या में ग्रामीण भी जमा हुए। पर्यटन विभाग की एडवाइजरी काे देखते हुए प्रशासन ने कोड़ामार होली की अनुमति भी नहीं दी थी। देवर-भाभी ने जिस तरह काेड़ामार होली खेली, शहरवासियों ने भी भरपूर आनंद उठाया।

कोड़ामार होली के आयोजन से पूर्व समाज सदस्यों द्वारा बुधवार दोपहर 2 बजे चांगगेट स्थित चारभुजा नाथ मंदिर से शोभायात्रा निकाली गई। जो चांगगेट, पाली बाजार व मुख्य बाजार से होते हुए मंगल मार्केट के सामने पहुंची। यहां समाज की ओर से पानी से भरे 9 कड़ाव रखवाए गए। जिनमें लाल, पीला, गुलाबी, हरा व अन्य रंग मिलाए गए। शोभायात्रा के पहुंचने पर समाज पदाधिकारियों की ओर से पहले ठाकुरजी को सभी कड़ावों में स्नान कराया गया। इसके बाद शुरू हुई देवर-भाभी की कोड़ामार होली। देवरों द्वारा जैसे ही रंग भरा पानी भाभियों पर डाला जाता है, बदले में भाभियां देवरों पर कोड़े बरसाती हैं। देवरों पर बरसाया जाने वाला कोड़ा भाभियों द्वारा होली के चार दिन पहले लहरिया रंग के सूती कपड़े से तैयार किया जाता है अाैर उसे बट्ट देकर दो दिन तक पानी में भिगोया जाता है

आजादी से पहले चली आ रही है परंपरा

ब्यावर में खेली जाने वाली कोड़ामार होली की परंपरा करीब डेढ़ सौ साल से भी अधिक पुरानी है। समाज की महिलाओं का कहना है कि इस परंपरा का निर्वहन करना उनका कर्तव्य है। समाज के अन्य पुरुष भी इसमें होली में भाग लेते हैं। समापन पुन: शोभायात्रा के साथ भगवान चारभुजा नाथजी को मंदिर तक विदाई दी जाती है। इस अवसर पर विधायक शंकरसिंह रावत, सभापति नरेश कनोजिया, पार्षद भूपेंद्र जीत भोजक, विष्णु शर्मा, तुलसी रंगवाला, महेंद्र सिसोदिया, शंकर यादव सहित अन्य लोग मौजूद थे। अतिथियों का समाज पदाधिकारियों ने माला व साफा पहनाकर स्वागत किया।

ये रहे मौजूद : जीनगर समाज अध्यक्ष गणेश गोपाल सिसोदिया, महामंत्री भगवानदास छपेरा, कोषाध्यक्ष जसवंत सिसोदिया, संरक्षक उदयचंद सिसोदिया, मोतीलाल सांखला, सोहनलाल छपेरा, बाबूलाल सिसोदिया, सूरजमल छपेरा, विष्णु प्रकाश छपेरा, चांदमल गोयल, संपत लाल सांखला, जंवरीलाल सिसोदिया, तिलोकचंद सिसोदिया, रामचंद्र छपेरा सहित समाज के अन्य लोग मौजूद थे। जबकि महिलाओं में भंवरी देवी छपेरा, अल्कादेवी, अंजूदेवी, हंसा छपेरा, रचनादेवी, निर्मला, लीलावती जीनगर, नेहा जीनगर, भाग्यश्री, नीतू जीनगर, मंंजू जीनगर, सुखीदेवी, चंपादेवी, रेखा जीनगर, विमला जीनगर, कविता सिसोदिया, संतोष सिसोदिया आिद शामिल थी। समापन पर महिलाओं को पुरस्कृत किया गया।

ब्यावर. जीनगर समाज की कोड़ामार होली। मुख्य बाजार में आठ कड़ावों में भरा था रंगीन पानी। फोटो | नवीन गर्ग
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