कांग्रेस में मां-बेटी, ससुर-पुत्रवधू और चाचा-भतीजे को टिकट, भाजपा में भी चहेतों को टिकट

Beawar News - निकाय चुनाव में जुटी भाजपा-कांग्रेस ने टिकट बंटवारे में भी अपनी-अपनी रणनीति के टिकटों का बंटवारा हुआ। इनमें...

Nov 08, 2019, 07:17 AM IST
निकाय चुनाव में जुटी भाजपा-कांग्रेस ने टिकट बंटवारे में भी अपनी-अपनी रणनीति के टिकटों का बंटवारा हुआ। इनमें कांग्रेस पदाधिकारियों ने अपनों को तो भाजपा पदाधिकारी अपने चहेतों को टिकट दिलाने में कामयाब रहे। कांग्रेस खेमे की बात करें तो यहां वार्ड नंबर 14 से कमला दगदी को तो वार्ड नंबर 2 से उनकी बेटी रिंकू पालड़िया को, वार्ड नंबर 42 से पूर्व पार्षद राजेश शर्मा तो वार्ड नंबर 15 से उनके भतीजे और वरिष्ठ कांग्रेसी दिनेश शर्मा के पुत्र भुवनेश शर्मा को, वार्ड नंबर 59 से पूर्व पार्षद सुरेंद्र यादव तो वार्ड नंबर 58 से उनकी पुत्रवधू नेहा यादव को टिकट दिया गया। ब्लॉक अध्यक्ष, पीसीसी सचिव, जिला अध्यक्ष, पूर्व गृहराज्यमंत्री, मनोज चौहान, यूथ कांग्रेस के साथ प्रभारी की ओर से टिकट दिलाए जाने की चर्चा है।

भाजपा में भी चहेतों काे टिकट: इसी प्रकार भाजपा खेमे की बात करें तो विधायक शंकरसिंह रावत के खेमे से नरेश कनोजिया, सुनीता भाटी, कमला दगदी, लक्ष्मण पोपावत, मनोज तंवर, वीरेंद्र सिंह, नेहा चांवरिया, सरोज खंडेलवाल, अंगदराम अजमेरा, दुर्गालाल जगवानी, मोहम्मद अफजल, भरत मंगल, सुमन जूनवाल, देवेंद्र सेन, अजय फुलवारी, श्रीलाल नागौरा, जितेंद्र राठौड़, जयसिंह कड़ीवाल, प्रीति शर्मा, प्रेमसिंह कड़ीवाल, रिखबचंद खटोड़, गोपाल सिंह रावत, जसोदा, हेमलता पारलेचा, हंसराज शर्मा, मोती सिंह सांखला, ममता छत्रावत, माया यादव, अविनाश सांखला के नाम शामिल है। पूर्व विधायक देवीशंकर भूतड़ा वेदराज भाटी, रवि चौहान, चेतन गोयर, कैलाश तुनगरिया, विष्णु हेड़ा, श्रीकिशन जांगिड़, रेणु दगदी, संतोष जाग्रत, लोकेश परिहार, प्रीति शर्मा, रेखा कुमावत, विनिता चंडालिया, शिवराज, पिंकी कुमावत, प्रो.बीपी सारस्वत और पवन जैन ने नरेंद्र आंगडिय़ा, संजय नाहर, मनीष भंसाली, साधना बाबेल, मुन्नी देवी गहलोत, हरीश सांखला, नरेंद्र चौहान के साथ प्रभारी की ओर से सरला कंवर राजपुरोहित के नाम की चर्चा है।

निर्दलीय चुनाव लड़े तो कार्यवाही : मेवाड़ा : कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष सोहन मेवाड़ा ने कहा कि चुनाव मैदान में यदि अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरे और यदि शुक्रवार तक नाम वापस नहीं लिया तो उन्हें पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित किया जा सकता है।

ऐनवक्त पर बदले समीकरण पड़े भारी

कांग्रेस पदाधिकारियों ने भले ही चुनाव पहले ही किसको टिकट देना है और किसको नहीं इसके लिए सर्वे कराकर सर्वसम्मति बनाई हो मगर इन पर भारी पड़ी ऐनवक्त पर बदली गई रणनीति। प्रभारी द्वारा अधिकृत पदाधिकारियों द्वारा जब निर्वाचन अधिकारी को पार्टी सिंबल लैटर सौंपने के बाद उपखंड कार्यालय परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान जो सूची दिखाई गई। उसमें ही कांट-छांट हो रखी थी, ऐसा लगा मानो ऐनवक्त पर सूची में से नाम हटाकर उसकी जगह पेन से अन्य प्रत्याशियों के नाम लिखे हो। ऐसी भी चर्चा है कि यह तो पदाधिकारियों द्वारा कांट-छांट वाली सूची मीडिया के सामने जारी कर दी गई नहीं तो यह पता ही नहीं चलता कि सूची ऐनवक्त पर बदली गई। यह भी सवाल उठे कि जब पीसीसी की ओर से सभी की सर्वसम्मति के बाद जो सूची जारी कर दी गई उसमें मंगलवार को अंतिम दिन सिंबल लैटर पेश करने से पहले किसने कांट-छांट की और किसकी सहमति से की। क्योंकि खुद पीसीसी सचिव पारस पंच मानते हैं कि प्रभारी सुरज्ञान सिंह घोसल्या सिंबल लैटर लेकर कहीं चले गए। बाद में वे खुद निर्वाचन अधिकारी के समक्ष पेश न होकर अपने द्वारा अधिकृत अन्य पदाधिकारियों के द्वारा सिंबल लैटर पेश कराए। प्रभारी का सिंबल लैटर जाना और सूची में कांट-छांट दर्शाता है कि ऐनवक्त पर कांग्रेस ने अपनी रणनीति बदलते हुए तय प्रत्याशियों की जगह अन्य को टिकट दिलाए।

X

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना