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महाराष्ट्र में मराठाें को शिक्षा और नौकरी में मिलेगा 16% आरक्षण, दोनों सदनों में बिल पास

3 वर्ष पहले
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महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को आरक्षण देने से संबंधित बहुप्रतीक्षित विधेयक गुरुवार को दोनों सदनों में पास हो गया। राज्य सरकार ने मराठाें को नौकरी और शिक्षा में 16 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव विधानसभा में रखा था, जिसे दोनों सदनों ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया। सरकार अब जल्द ही कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर इसे अमल में लाने का प्रयास करेगी।

महाराष्ट्र विधानसभा में बिल पेश करते हुए सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा, ‘हमने मराठा आरक्षण के लिए प्रक्रिया पूरी कर ली है और हम आज विधेयक लाए हैं।\\\' हालांकि फडणवीस ने धनगर आरक्षण पर रिपोर्ट पूरी न होने की बात कही। कहा, धनगर आरक्षण पर रिपोर्ट पूरी करने के लिए एक उप समिति का गठन किया गया है और जल्द ही एक रिपोर्ट और एटीआर विधानसभा में पेश किया जाएगा।’पहले विधानसभा से विधेयक आम सहमति से पारित होकर विधान परिषद पहुंचा, जहां से इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। सरकार की कोशिश 5 दिसंबर से राज्य में मराठा आरक्षण लागू करने की है। अब अगले पांच दिन में कानूनी औपचारिकता पूरी कर इसे अमल में लाया जा सके।

राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने मराठाें को सामाजिक व आर्थिक रूप से पिछड़ा करार दिया था

महाराष्ट्र में 32.4 फीसदी मराठा आबादी, जिसमें 79 फीसदी खेतिहर

79 फीसदी हैं मराठा खेतिहर
महाराष्ट्र में मराठा समाज कुल आबादी का 32.4% है, जिसमें से 79% खेतिहर हैं। राज्य सरकार ने विधानसभा में कहा कि इससे ओबीसी आरक्षण में किसी तरह की कमी नहीं की जाएगी। वर्तमान में प्रदेश में कुल 52% आरक्षण है।

मामले को कानूनी रूप से मिलेगी चुनौती
पाटिल ने कुछ दिन पहले ही कहा था कि अगर महाराष्ट्र सरकार मराठाें को 15 से 16 फीसदी आरक्षण देती है तो मामले को कानूनी रूप से चुनौती मिलेगी। हालांकि, मराठा नेता रघुनाथ चित्रे पाटिल इसे खारिज करते हैं कि उनकी संख्या सिर्फ 12 फीसदी ही है और दावा करते हैं कि कुनबी के बिना भी मराठाें की गिनती राज्य की जनसंख्या की 16 से 18 फीसदी है।

कुनबी समुदाय पहले से ओबीसी कोटे में शामिल
इस तरह के दावों और विरोधी दावों से मराठाें के लिए आरक्षण अनिश्चित हो गया है। जानकारों की मानें तो, कुनबी को शामिल करते हुए मराठाें को 16 फीसदी आरक्षण देना संभव नहीं है क्योंकि कुनबी पहले से ही ओबीसी कोटे में शामिल हैं और इसलिए वे मराठाें के साथ एसईबीसी वर्ग में शामिल नहीं होना चाहेंगे क्योंकि इसे कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है।

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