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24 साल की इस लड़की ने रचा कीर्तिमान, ऐसे पूरा किया अपने दादा का सपना

भरतपुर जिले की शहनाज खान कामां पंचायत की पहली एमबीबीएस सरपंच बनी हैं।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 13, 2018, 04:01 PM IST

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    कामां पंचायत की सरपंच शहनाज खान।

    भरतपुर. राजस्थान के भरतपुर जिले में शहनाज खान नाम की एक स्टूडेंट ने नया कीर्तिमान रचा है। शहनाज यहां के कामां पंचायत की पहली एमबीबीएस सरपंच बनी हैं। वो सिर्फ 24 साल की हैं और इसी साल एमबीबीएस के लास्ट ईयर का एग्जाम दिया है। बता दें कि ठेठ मेवात में सुविधाओं और संसाधनों का खासा अभाव है। सरपंच बनते ही शहनाज बोलीं कि उनका बचपन इसी गांव में बीता है। उन्हें मालूम है कि गांव और खासकर मेवात के लिए क्या करना है। इन चीजों पर काम करना शहनाज का मकसद...

    - 'सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के साथ-साथ स्वच्छता, स्वास्थ्य और बालिका शिक्षा मेरा मुख्य ध्येय है।'
    - उन्होंने देश में चल रहे स्वच्छता अभियान की भी तारीफ की।
    - हालांकि, उन्होंने कहा कि इसके इम्प्लीमेंट में कमी है।
    - 'निश्चित रूप से मैं कामयाब रहूंगी। क्योंकि मेरा पास प्लान है और समस्याओं से जूझने की मेरे पास विरासत है।'

    दादा रह चुके हैं सरपंच
    - गौरतलब है कि बीते 55 सालों से लगातार शहनाज के दादा इसी गांव के सरपंच रहे।
    - लेकिन शैक्षणिक दस्तावेज खराब होने के चलते इलेक्शन कमिशन ने बीते साल पद से मुक्त कर दिया।
    - इसी के मद्देनजर शहनाज ने दादा का सपना पूरा करने और समाजसेवा भाव से सरपंच का चुनाव लड़ने का फैसला किया।
    - डॉ. शहनाज खान पूर्व संसदीय सचिव एवं कांग्रेस की नेता जाहिदा खान की बेटी हैं।

    - उन्होंने दैनिक भास्कर से बातचीत में तीन चीजों पर प्रकाश डाला...


    मकसद:लोगों की जिंदगी को आसान बनाना। इसके लिएउनकी आवाज उठाना और समस्याओं को हल करवाना मेरा मकसद है। इसके लिए मैं प्लान बनाकर काम करूंगी। मेरे परिवार इन सबसे लंबा वास्ता रहा है। गांवों के विकास में इनकी मदद लूंगी।

    प्राथमिकता:मैं पेशे से चिकित्सक हूं। इसलिए मैं अच्छे से समझती हूं कि स्वच्छता और स्वास्थ्य का महत्व। मेवात में इसकी काफी कमी है। इसलिए मेरी कोशिश रहेगी कि हर घर में शौचालय हो। स्वास्थ्य के प्रति लोग जागरूक रहे।

    बालिका शिक्षा: मेवात में बालिका शिक्षा बहुत जरूरी है। लड़कियां पढ़ भी रही है। सरकारी नौकरियों में लड़कियां आगे आ रही हैं। पंचायत चुनाव में कई मे व महिलाएं सरपंच बनी हैं। इसलिए इस महिम को आगे बढ़ाया जाएगा।

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