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चुनाव से पहले भाजपा में संगठन और कैबिनेट में चेहरे बदलेंगे

उपचुनाव में हार के बाद बने निराशा के माहौल और एंटीइनकमबेंसी को कम करने के लिए भाजपा सरकार और संगठन में बदलाव की...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 05:20 AM IST
उपचुनाव में हार के बाद बने निराशा के माहौल और एंटीइनकमबेंसी को कम करने के लिए भाजपा सरकार और संगठन में बदलाव की तैयारी है। संभावना है कि यह बदलाव विधानसभा सत्र की समाप्ति और झुंझुनूं में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम के बाद हो सकता है। बदलाव में कई मंत्रियों को हटाकर संगठन में लगाया जाएगा। उनकी जगह नए विधायकों को मिल सकती है। खास तौर से उन मंत्रियों पर गाज गिरना तय है, जो लंबे समय से विवाद में रहे हैं। जिन महकमों में बदलाव हो सकता है, उनमें चिकित्सा, पंचायतीराज, समाज कल्याण, श्रम एवं रोजगार, यूडीएच, उद्योग, पीएचईडी शामिल हैं। बदलाव का मकसद मंत्रियों के पोर्टफोलियो बदलने से लेकर उन्हें चुनावी तैयारियों के लिए संगठन में भेजना है।

भाजपा सरकार ने पिछले कार्यकाल में भी ऐन चुनाव से पहले सरकार और संगठन में बदलाव किए थे, लिहाजा यह बात और पक्की होती है कि चुनाव में जाने से पहले पार्टी पूरी तरह सजग होना चाहती है। जून 2008 में चुनाव से ठीक पहले राज्य मंत्री बाबूलाल वर्मा व वासुदेव देवनानी को स्वतंत्र प्रभार मंत्री बनाया गया था। वहीं संगठन में अरुण चतुर्वेदी को हटाकर वसुंधरा राजे प्रदेशाध्यक्ष बनीं थीं।

बुधवार को दिल्ली में भाजपा पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक के बाद भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह।

राज्यसभा चुनाव और प्रदेशाध्यक्ष बदलाव

अप्रैल में प्रदेश की तीन सीटों पर राज्यसभा चुनाव होने जा रहे हैं। संभावना है कि पार्टी के मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी को सरकार राज्यसभा में भेजेगी। वैसे चुनावी साल में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष बदले जाते रहे हैं। वर्ष 2009 से 2013 तक अरुण चतुर्वेदी प्रदेशाध्यक्ष थे, लेकिन इसके बाद विधानसभा चुनावों के वक्त वसुंधरा राजे ने प्रदेशाध्यक्ष की कमान संभाल ली थी।

अब चर्चा है कि मंत्रिमंडल से किसी अनुभवी व्यक्ति को संगठन की कमान सौंपी जाएगी। हालांकि इस पद के लिए केंद्रीय मंत्रियों के नाम भी काफी चर्चा में हैं। खास तौर पर अनुसूचित जाति के नेता को इस पद पर तरजीह मिल सकती है।

बदलाव की तीन बड़ी वजह




निगम बोर्डों के खाली पद भी भरेंगे

संगठन के कद्दावर लोगों को सरकार में लंबे समय से खाली चल रहे निगम बोर्डों में तैनाती भी दे सकती है। चुनावी साल में पॉलिटिकल नियुक्तियों का चलन भी रहा है। सरकार में करीब आधा दर्जन निगम बोर्ड ऐसे हैं जिनमें नियुक्तियां होनी हैं।