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4 साल में 8 उपचुनाव, 6 में कांग्रेेस ने बाजी मारी, भाजपा के पक्ष में सिर्फ 2

भाजपा सरकार के 4 साल के कार्यकाल में राज्य में 8 उपचुनाव हुए, जिसमें 6 में कांग्रेस जीती। इसमें से 4 विधानसभा और 4...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 03:25 AM IST

भाजपा सरकार के 4 साल के कार्यकाल में राज्य में 8 उपचुनाव हुए, जिसमें 6 में कांग्रेस जीती। इसमें से 4 विधानसभा और 4 लोकसभा की सीटें हैं। जबकि भाजपा सिर्फ 2 विधानसभा उपचुनाव जीत पाई। बड़ी बात यह है कि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार होने के बावजूद कांग्रेस उपचुनावों में विजयी रही।

राज्य के 2013 के विधानसभा चुनाव में नसीराबाद से सांवरलाल जाट, सूरजगढ़ से संतोष अहलावत, वैर से बहादुर कोहली और कोटा दक्षिण से ओम बिड़ला चुनाव जीत कर आए थे, लेकिन 5 माह बाद ही इन्हें लोकसभा चुनाव में उतार दिया गया। चारों प्रत्याशी लोकसभा चुनाव जीतकर संसद में पहुंच गए। इसके बाद चारों विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हुए, जिसमें 3 नसीराबाद, सूरजगढ़ और वैर सीट पर कांग्रेस प्रत्याशियों ने कब्जा कर लिया। जबकि केवल एक सीट कोटा दक्षिण भाजपा को मिली। इसके बाद 2017 में धौलपुर में उपचुनाव हुए, जिसमें भाजपा को जीत हासिल हुई। इससे पहले यह सीट बसपा के खाते में थी और बीएल कुशवाह विधायक थे। उन पर सजा तय होने से उनकी विधानसभा सदस्यता चली गई। इसके बाद भाजपा ने उन्हीं की प|ी को पार्टी में शामिल कर चुनाव लड़ाया और वे जीत गईं। इसके बाद अलवर,अजमेर लोकसभा सीट और मांडलगढ़ विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव हुआ, जिसमें दोनों लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने कब्जा किया।

लोकसभा में कांग्रेस का 3 साल नौ महीने बाद खाता खुला, अब प्रदेश से दो सांसद

तीन साल और नौ महीने बाद लोकसभा में राजस्थान से कांग्रेस के 2 सांसदों को प्रतिनिधित्व का मौका मिलेगा। इससे पहले 2014 के आम चुनाव में कांग्रेस राज्य की सभी 25 सीटें हार गई थी। राज्य से कांग्रेस का लोकसभा में प्रतिनिधत्व करने वाला कोई नहीं था। यदि कांग्रेस दोनों ही सीटें हार जाती तो पहली बार ऐसा होता कि अप्रैल के बाद कांग्रेस का राज्यसभा व लोकसभा में कोई सदस्य नहीं रह जाता। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में सभी 25 सीटों पर भाजपा ने कब्जा कर लिया था। इससे पहले राज्य में भाजपा सरकार बन गई थी। प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने से राज्यसभा सीटें भी कांग्रेस के हाथ से निकलती गईं। अब कांग्रेस के खाते में राज्यसभा की केवल 2 सीटें बची हंै। इसमें एक सीट अभिषेक मनु सिंघवी और दूसरी नरेंद्र बुढानिया की है। दोनों ही सांसदों का कार्यकाल 2 माह बाद अप्रैल में खत्म हो जाएगा। ऐसे में संख्या बल के आधार पर राज्यसभा की दोनों सीटों पर भाजपा कब्जा कर लेगी। ऐसे में लोकसभा और राज्यसभा में प्रदेश से कांग्रेस के लिए शून्य की स्थिति हो जाती, लेकिन कांग्रेस ने अलवर और अजमेर की सीट जीतकर इस स्थिति को खत्म कर दिया।

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