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85 हजार श्रमिक, घर बनाने को मिलने थे 1.50 लाख, नहीं मिले

जिन श्रमिकों के पास अपनी जमीन है, उन्हें मकान बनाने के लिए सुलभ्य योजना के तहत 1.50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दिए जाने...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:30 AM IST

जिन श्रमिकों के पास अपनी जमीन है, उन्हें मकान बनाने के लिए सुलभ्य योजना के तहत 1.50 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दिए जाने का प्रावधान है। लेकिन, भरतपुर जिले में पिछले ढाई साल के दौरान किसी भी श्रमिक को इसमें एक रुपया तक नहीं मिला है। जबकि श्रम एवं रोजगार विभाग के मुताबिक जिलेभर में 85 हजार से ज्यादा श्रमिक पंजीकृत हैं।

इस योजना को लेकर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि श्रम विभाग बोल रहा है कि इसमें किसी भी श्रमिक ने आर्थिक सहायता के लिए आवेदन ही नहीं किया। जबकि श्रमिक बोल रहे हैं कि उन्हें तो पता ही नहीं है कि सरकार से मकान बनाने के लिए ऐसी कोई सहायता राशि भी मिलती है। अगर, इस योजना का प्रचार-प्रसार ठीक से होता तो यह कैसे संभव है कि पिछले ढाई साल में एक भी श्रमिक मकान की आर्थिक सहायता के लिए आवेदन नहीं करता।

श्रम विभाग के मुताबिक ही राज्य सरकार ने 16 जनवरी, 2016 को सुलभ्य आवास के नाम से यह योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य उन श्रमिकों को स्वयं का मकान उपलब्ध कराना था, जिनके पास जमीन तो है, लेकिन पैसे की तंगी के कारण मकान नहीं बना पा रहे हैं। वैसे भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 तक सबको आवास उपलब्ध कराने का वायदा किया हुआ है।

सरकार का दावा :2022 तक सभी काे देने हैं मकान

किसी ने आवेदन नहीं किया तो कैसे मिलती सहायता : सहारण

सुलभ्य आवास योजना का जिले में पर्याप्त प्रचार-प्रसार किया गया था। यह योजना जिले में जनवरी, 2016 से ही लागू है। श्रमिकों को बताया भी गया कि इसमें मकान बनाने के लिए 1.50 लाख रुपए दिए जाने का प्रावधान है। लेकिन, किसी श्रमिक ने इसके लिए आवेदन ही नहीं किया तो उन्हें सहायता राशि मिलती भी कहां से। यह सही है कि जिले में 85 हजार से ज्यादा श्रमिक पंजीकृत हैं। अब भी यदि कोई आवेदन करेगा तो हम उसकी सभी प्रकार से मदद करने के लिए तैयार है। योजना से संबंधित जानकारी कार्यालय में उपलब्ध है। श्रमिकों को आना तो होगा ही।

-ओ.पी. सहारण, संयुक्त आयुक्त

श्रम विभाग भरतपुर

स्वयं के मालिकाना हक का पट्‌टा होना जरूरी

योजना के मुताबिक निजी भूखंड पर अगर किसी श्रमिक ने मकान बना लिया है तो भी वह बाद में 1.50 लाख रुपए की सरकारी सहायता राशि ले सकता है। बशर्ते उसके पास जमीन के मालिकाना हक का दस्तावेज (पट्टा, रजिस्ट्री आदि 6 माह पुराने) हो। मालिकाना हक पर किसी तरह का विवाद न हो। साथ ही मकान बनाने में जो भी राशि खर्च हुई है, उसकी पुष्टि किसी अधिकारी से कराने के बाद श्रम विभाग संबंधित मजदूर के बैंक खाते में यह राशि ट्रांसफर कर देगा। खास बात यह है कि हाउसिंग बोर्ड अथवा यूआईटी से आवंटित मकान में मरम्मत आदि कराने के लिए भी यह राशि मिल सकती है। लेकिन, इसके लिए आवंटन पत्र पति अथवा प|ी दोनों में से किसी एक के नाम होना चाहिए। वे श्रम विभाग में पंजीकृत भी हों।

चिंता...नहीं है योजना की जानकारी

जाटोली गांव निवासी श्रमिक रामू ने बताया कि उसके पास जमीन उपलब्ध है। उसने इस जमीन पर एक साल पहले ही घर बनाया है। लेकिन, सरकार में आर्थिक सहायता देने की ऐसी कोई योजना भी है। इसकी अगर जानकारी होती तो वह इसका लाभ जरूर लेता। लेकिन, आज तक किसी ने इसके बारे में बताया ही नहीं। इसी तरह कामां निवासी हरी सिंह का कहना है कि अगर, अपना मकान बनाने के लिए सरकार से 1.50 लाख रुपए मिलते हैं तो भला कौन नहीं लेना चाहेगा। उसके पास तो अपनी जमीन भी है। मेहनत मजदूरी करने वालों के लिए यह रकम बहुत बड़ा सहारा बनती।

अफसरों का अब नया बहाना

इसके लिए अफसरों ने अब नया बहाना गढ़ लिया है। उनका कहना है कि इस योजना में श्रमिक के पास अपनी जमीन होने के साथ-साथ मालिकाना हक के प्रमाण के तौर पर पट्टा होना अनिवार्य है। चूंकि जिले में ज्यादातर श्रमिक ग्रामीण पृष्ठभूमि से हैं। इसलिए उनके पास जमीन का पट्टा उपलब्ध नहीं होता। इसका दूसरा कारण यह भी है कि वे अपनी पैतृक जमीन पर संयुक्त परिवार में रह रहे होते हैं।

अब आगे क्या

मजदूर संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि इस योजना के प्रावधानों को सरल बनाया जाना चाहिए। क्योंकि यह सब जानते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले श्रमिक तो क्या सामान्य व्यक्ति के पास भी जमीन अथवा मकान के मालिकाना हक का कोई दस्तावेज नहीं होता। लोग पुश्तैनी जमीन पर ही पीढ़ी दर पीढ़ी रहते आ रहे हैं। ऐसे में मालिकाना हक की पुष्टि संबंधित ग्राम पंचायत अथवा वहां तैनात किसी अधिकारी एवं कर्मचारी से कराई जा सकती है। साथ ही, प्रशासन और श्रम एवं रोजगार विभाग के अधिकारियों की यह जिम्मेदारी हो कि वे कैंप लगाकर इसकी जानकारी दें और मकान की सहायता के लिए आवेदन भरवाएं।

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Web Title: 85 हजार श्रमिक, घर बनाने को मिलने थे 1.50 लाख, नहीं मिले
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