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2 साल में 2.60 करोड़ की लागत से बनना था इंडोर कुश्ती स्टेडियम, 6 साल में 3.17 करोड़ खर्च होने के बावजूद अधूरा

जिले के पहलवानों का इंडोर कुश्ती स्टेडियम में गद्दे पर कुश्ती के गुर सीखने का सपना 7 साल गुजर जाने के बावजूद भी...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:55 AM IST

2 साल में 2.60 करोड़ की लागत से बनना था इंडोर कुश्ती स्टेडियम, 6 साल में 3.17 करोड़ खर्च होने के बावजूद अधूरा
जिले के पहलवानों का इंडोर कुश्ती स्टेडियम में गद्दे पर कुश्ती के गुर सीखने का सपना 7 साल गुजर जाने के बावजूद भी साकार नहीं हो सका है। राजस्थान में पहलवान तैयार करने में नंबर वन जिला होने के चलते राज्य सरकार ने वर्ष 2011 के बजट में लोहागढ़ स्टेडियम भरतपुर में इंडोर कुश्ती स्टेडियम निर्माण की घोषणा की थी।

उसके बाद ही 2.60 करोड़ रुपए की स्वीकृति जारी करने के साथ ही 2 करोड़ रुपए वर्ष 2012 में सरकार ने कार्यकारी एजेंसी पीडब्ल्यूडी को निर्माण के लिए भेज दिए थे। तभी से जिला क्रीड़ा परिषद की देखरेख में यहां इंडोर कुश्ती स्टेडियम निर्माणाधीन है। यह कार्य दो साल की अवधि में वर्ष 2014 में पूरा हो जाना चाहिए था, लेकिन निर्माण कार्य की गति इतनी धीमी है कि कछुआ भी शरमा जाए। पूरे सात साल बीतने को हैं, लेकिन अभी तक निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। सरकार ने घोषणा के बाद भी शेष 60 लाख रुपए नहीं भेजे, जिससे निर्माण अधूरा रह गया। हाल ही में पिछले वर्ष कुश्ती स्टेडियम के अधूरे निर्माण को पूरा करने के लिए 1 करोड़ 17 लाख रुपए का बजट स्वीकृत किया था। इस राशि से इस बार आरएसआरडीसी को स्टेडियम के निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस पैसा से कुश्ती स्टेडियम में प्लास्टर, बिजली फिटिंग, चेंजिंग रूम, सिंथेटिक फर्श, सीढ़ी निर्माण आदि 26 जनवरी तक पूरा होना था, लेकिन यह कार्य भी अभी तक पूरा नहीं हुआ है। अधूरे निर्माण के चलते न केवल कुश्ती एकेडमी में शामिल प्रदेश भर के बाल पहलवान अपितु लोहागढ़ स्टेडियम में रोजाना कुश्ती का अभ्यास करने के लिए आने वाले जिले भर के सैकड़ों पहलवानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिछले लंबे समय से उन्हें इंडोर बैडमिंटन हॉल में मजबूरन कुश्ती का अभ्यास करना पड़ रहा। जहां एक ओर बैडमिंटन खिलाड़ियों धमाचौकड़ी रहती है, वहीं दूसरी ओर हवा बंद इस हॉल में पहलवान कुश्ती के दांवपेंच सीखने को मजबूर हैं। हॉल में गद्दे लगाने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं होने के कारण बड़ी संख्या में पहलवान कुश्ती का अभ्यास भी नहीं कर पा रहे हैं।

लोहागढ़ स्टेडियम में वर्ष 2012 से निर्माणाधीन है इंडोर कुश्ती हॉल;जबकि, प्रदेश में सबसे अधिक पहलवान हमारे यहां से निकलते हैं

वर्षों से पहलवानों का जनक है भरतपुर...अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी फहराया जिले का परचम

पहलवानों में निराशा...किससे कहें दुखड़ा

अभ्यास में परेशानी : तेजेंद्र लाला

जो काम दो साल में पूरा होना था, वह 6 साल में भी अधूरा है, यह पहलवानों के लिए बेहद निराशाजनक है। कुश्ती अभ्यास में परेशानी होती है। निर्माण एजेंसी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए।

प्रतिभाओं के साथ अन्याय: जीतू

करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद भी 6 साल में स्टेडियम कार्य पूरा नहीं हुआ है। यह प्रतिभाओं के साथ अन्याय है। प्रशासन पहलवानों के हित को देखते इसका निर्माण जल्द से जल्द पूरा करवाएं।

निर्माण पूरा हो तो मिले सहूलियत: अशोक

पहलवान अशोक बांसरोली का कहना है स्टेडियम का निर्माण अधूरा होने के चलते परेशानी उठानी पड़ रही है। निर्माण पूरा हो जाए तो पहलवानों को गद्दे पर अभ्यास करने में सहूलियत मिलेगी।

भरतपुर. निर्माणाधीन इंडोर कुश्ती स्टेडियम।

सरकार और प्रशासन गंभीर नहीं : दलवीर

स्टेडियम अखाड़ा ही जिले का ऐसा अखाड़ा है जहां गद्दे पर कुश्ती का अभ्यास कराया जाता है, लेकिन दुखद बात है कि सरकार एवं स्थानीय प्रशासन इसके निर्माण को लेकर गंभीर नहीं है। यह सीधे तौर पर खिलाड़ियों की उपेक्षा है। यही हालात रही तो पारंपरिक विधा लुप्त हो जाएगी।

भरतपुर| जिला प्राचीनकाल से ही नामचीन पहलवानों का जनक रहा है। यहां के पहलवानों ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बार भरतपुर का परचम फहराया है। वहीं राज्य स्तर पर अक्सर भरतपुर के पहलवान ही अपना लोहा मनवाते रहे हैं। जिले के अनेक पहलवान अब तक गोल्ड मैडल, सिल्वर मैडल एवं कांस्य मैडल जीतकर देश के विभिन्न राज्यों में लोहागढ़ का लोहा मनवा चुके हैं। इस सबके बावजूद भी संभाग के लोहागढ़ स्टेडियम में निर्माणाधीन इंडोर कुश्ती स्टेडियम की स्थानीय आलाधिकारियों द्वारा उपेक्षा की जाती रही है। जिले में लोहागढ़ स्टेडियम व महारानी किशोरी व्यायामशाला को छोड़कर भूरी सिंह व्यायाम शाला, हनुमान व्यायामशाला, दूधाधारी व्यायामशाला, काली की बगीची व्यायामशाला, ब्रह्मचारी बगीची व्यायामशाला सहित डीग, बयाना, नगर व जनूथर में मिट्‌टी के अखाड़े संचालित हैं।

लापरवाही... तीन बार टिनशेड उड़ गई, गेट व बिजली फिटिंग खराब

इन 7 सालों के दौरान कुश्ती स्टेडियम की टिन-शैड तीन बार उड़ चुकी है। पीड्ब्ल्यूडी ने इतने हल्के और घटिया स्तर की टिनशेड लगवाई कि जो हवा के थपेड़ों से ही फट गईं। इतना ही नहीं स्टेडियम पर लगाया गया चैनल गेट भी टूट चुका है, वहीं इसी दौरान बिजली फिटिंग पूरी तरह से खराब हो गई, जिसे फिर से करीब सवा लाख रुपए की लागत से सुधारा गया है।

बैडमिंटन हॉल में अभ्यास करना बना मजबूरी

गद्दों पर हो अभ्यास.. तो मिल सकते हैं अंतर्राष्ट्रीय पहलवान

वरिष्ठ कोच सत्यप्रकाश लुहाच ने बताया अब कुश्ती प्रतियोगिताएं गद्दे पर होती हैं। मिट्टी के अखाड़े के बजाय गद्दे पर शुरू से अभ्यास जरूरी है। तब ही जिले के पहलवान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना परचम फहरा सकते हैं।

विशेष... एक साल से प्रदेश की कुश्ती एकेडमी भी है यहीं

पहले नंबर पर पहलवानों का जनक होने के कारण जिले में सरकार ने वर्ष 2017 में कुश्ती एकेडमी भी खोली। प्रदेश के 30 बाल पहलवान एकेडमी में रहकर सरकारी खर्च पर कुश्ती का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। लेकिन इंडोर कुश्ती स्टेडियम का निर्माण नहीं होने से उन्हें अभ्यास करने में परेशानी हो रही है।

इंडोर कुश्ती स्टेडियम कार्य अंतिम चरण में है। अप्रेल के अंत तक निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा। इससे पूर्व पीडब्ल्यूडी ने इसका निर्माण किया था। तब बजट के अभाव में इसका निर्माण पूरा नहीं हो सका था। अनिरुद्ध सिंह, एईएन, आरएसआरडीसी

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