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गंदे पानी से हो रही सब्जियों की पैदावार, पेस्टीसाइड का भी उपयोग, नहीं लिए सैंपल

शहर के कई इलाकों में गंदे नालों के पानी से सब्जियों की पैदावार हो रही है, जिसमें पेस्टीसाइड भी इस्तेमाल हाे रहा है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:55 AM IST

शहर के कई इलाकों में गंदे नालों के पानी से सब्जियों की पैदावार हो रही है, जिसमें पेस्टीसाइड भी इस्तेमाल हाे रहा है। किंतु खाद्य एवं सुरक्षा विभाग ने अभी तक एक भी सैंपल नहीं लिया है। जबकि जयपुर स्थित फूड लैब में हैवी मैटल और पेस्टीसाइड की जांच की सुविधा उपलब्ध है। सब्जियों के सैंपल लेने के लिए सरकार ने जयपुर में दो साल पहले जन स्वास्थ्य परीक्षण प्रयोगशाला में करीब सात करोड़ की लागत से एक अलग लैब बनाई है। इसमें फल-सब्जियों में हैवी मैटल व पेस्टीसाइड की जांच होगी, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि अभी तक एक भी नमूना जिले से नहीं भेजा गया है। अभियान के दौरान सडे़-गले फलों को फिंकवाने का प्रेस नोट जरूरी विभाग द्वारा जारी किया जाता है।

कई गंभीर रोगों का शिकार हो सकते हैं आप

अगर आपने सावधानी नहीं बरती तो हैवी मैटल और पेस्टीसाइड युक्त सब्जियों और फलों का उपयोग लगातार करने से कई गंभीर बीमारियों के चपेट में आ सकते हैं। आरबीएम के डॉ. सुदीप गुप्ता का कहना है कि पेस्टीसाइड से कैंसर, बांझपन और चर्म रोग तथा हैवी मैटल आर्सेनिक, निकिल, कैडमियम, क्रोमियम, मर्करी, जिंक व मैग्नीशियम के कारण किडनी, लीवर को नुकसान पहुंचाता हैं। इसलिए आपको चाहिए कि सब्जी एवं फल देखकर लें। प्राकृतिक रूप से पके फल व सब्जी लें। ज्यादा चमक वाले फल और सब्जी में कैमिकल होने की संभावना अधिक होती है। इसलिए सावधानी बरतें।

चमक लाने के लिए सस्ते अखाद्य तेल का उपयोग

सब्जियों में चमक लाने के लिए अधिकांश व्यापारियों द्वारा अखाद्य तेल का उपयोग किया जाता है। प्राय: देखा गया है कि किसान और खुदरा विक्रेता सब्जी व फलों में चमक लाने के लिए पानी में तेल की कुछ मात्रा मिला लेते हैं और उसमें डुबो कर सब्जियों को निकाल लिया जाता है। इससे सब्जी और फलों पर चिकनाहट और चमक आ जाती है।

फल पकाने में खुलेआम हो रहा कार्बाइड का उपयोग

फलों को पकाने में कार्बाइड का इस्तेमाल खाद्य संरक्षा व मानक अधिनियम -2011 की धारा 2.3.5 के तहत वर्जित है। इसका भंडारण, विक्रय, वितरण करने वालों के लिए सजा का प्रावधान है। किंतु इसका खुलेआम उपयोग होता है। केले और आम के सीजन में तो सब्जी मंडी कार्बाइड की गंध से सराबोर रहती है। अनेक मर्तबा फलों पर कार्बाइड के कण चिपके हुए साथ आ जाते हैं। पपीता और खरबूजों को पकाने में भी कैमिकल का उपयोग किया जाता है।

किस-किस तरह का केमिकल इस्तेमाल

कैल्शियम कार्बाइड: आम व केला को पकाने में।

ऑक्सीटोसिन: सीताफल, बैंगन, घीया, तोरई, खीरा व कद्दू के आकार बढ़ाने में।

कॉपर सल्फेट: फलों को समय से पहले पकाने में।

मैलेकाइट ग्रीन: सब्जियों को हरा रंग देने।

सैकरीन: तरबूज मीठा बनाने।

वैक्स: सेव तथा नाशपाती की चमक को बरकरार रखने।

पीएफए एक्ट में फल सब्जी के सैंपल नहीं आते हैं, इसलिए सैंपल नहीं लिए गए हैं। खराब या दूषित होने पर फिकवाने की कार्रवाई की जाती है। अब पीएफए एक्ट में कोई संशोधन होगा तो दिखवाकर कार्रवाई कराएंगे। फिल हाल फल-सब्जी के सैंपल कहीं भी नहीं भेजे गए हैं। डाॅ. गोपाल शर्मा, सीएमएचओ

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Web Title: गंदे पानी से हो रही सब्जियों की पैदावार, पेस्टीसाइड का भी उपयोग, नहीं लिए सैंपल
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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