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10-10 हजार रुपए लेकर सिलिकोसिस के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाता है गिरोह

दस-दस हजार रुपए लेकर दलाल गिरोह सिलिकोसिस के फर्जी प्रमाणपत्र बनवाता है। ऐसा सिर्फ पीड़ित को मिलने वाली एक लाख...

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 04:15 AM IST
दस-दस हजार रुपए लेकर दलाल गिरोह सिलिकोसिस के फर्जी प्रमाणपत्र बनवाता है। ऐसा सिर्फ पीड़ित को मिलने वाली एक लाख रुपए की सहायता के लिए किया जाता है। बुधवार को आरबीएम अस्पताल में दो दलालों को अस्पताल के ही कुछ कर्मचारियों ने फर्जी मरीजों से लेनदेन करते पकड़ लिया। ऐसे में अस्पताल में सिलिकोसिस पीड़ितों की जांच व अनुशंषा के लिए कार्यरत डॉक्टर व अन्य तक गायब हो गए। अब मामले का खुलासा होने के बाद संबंधित विभाग से लेकर सहायता देने वाले अफसर तक शांत है। क्योंकि जांच का सवाल यह है कि अब तक कितने फर्जी मरीजों को प्रमाणपत्र बना दिए गए। इसका निर्णय अभी तक अस्पताल प्रबंधन ने नहीं किया है। करीब एक घंटे तक हंगामे के बाद पुलिस ने दो दलालों को पकड़ लिया। साथ ही उनके खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है। जबकि इस मामले में आरबीएम अस्पताल के भी दो डॉक्टर व अन्य स्टाफ के शामिल होने की बात सामने आई है। उल्लेखनीय है कि राज्य इस बीमारी से पीड़ित को एक लाख रुपए व मृत्यु होने पर परिजनों को पांच लाख रुपए की सहायता देती है।

आरबीएम अस्पताल में पिछले लंबे समय से सिलिकोसिस के फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के नाम पर ठगी और दलालों का गिरोह सक्रिय है। दोपहर करीब 12 बजे दो युवक आए जो कि बीमारी से पीड़ित नहीं थे। उनके साथ सिलिकोसिस मरीज भी थे। जिनको एक्स-रे कराने के लिए भेजा गया था। जबकि आवेदन पर नाम अन्य था। मशीन में अंगूठे का निशान लेने पर फर्जीवाड़े का पता चल गया। इस पर दोनों को पकड़ कर कुछ कर्मचारियों ने धुनाई भी कर दी। आरबीएम अस्पताल पुलिस चौकी प्रभारी विजेंद्र सिंह व देशराज सिंह ने दोनों युवकों जितेंद्र पुत्र बाबूलाल जाटव 35 साल निवासी वनकूपरा थाना गढीबाजना व ओंकार पुत्र श्रीमोहर गुर्जर निवासी चंद्रपुरा थाना सरमथुरा को पकड़ कर मथुरा गेट पुलिस को सौंपा है। जबकि रिपोर्ट एक्स-रे विभाग के प्रभारी विनोद फौजदार ने मथुरा गेट थाने में मुकदमा दर्ज कराया है।

दो जिलों का एक ही जगह काम, इसलिए भीड़ में बढ़ा गिरोह : सिलिकोसिस पीड़ित का प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पहले आवेदन करना होता है। इसमें आधार कार्ड व फोटो प्रति, दो पासपोर्ट साइज फोटो, आईडी प्रूफ, वलगम की जांच रिपोर्ट जरूरी होती है। इसके बाद बोर्ड एक्स-रे कराने भेजता है। जहां अंगूठे से पहचान भी की जाती है। लेकिन एक्स-रे कराने के बाद अंगूठे की पहचान की रिपोर्ट भी कोई मायने नहीं रखती है। प्रत्येक सोमवार, माह के प्रथम व तीसरे बुधवार को भरतपुर, माह के दूसरे व चौथे बुधवार को धौलपुर के मरीजों के लिए शिविर लगता है। सिर्फ जनवरी में ही 429 के रजिस्ट्रेशन हुए हैं और 115 को पीड़ित माना गया। इनमें से भी श्रेणी निकाली गई। दो जिलों का काम एक ही जगह होने से दलाल गिरोह अधिक सक्रिय हो जाता है।

भरतपुर. एक्स-रे विभाग में प्रभारी से पकड़े जाने के बाद माफी मांगते फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने आए युवक।

दो बार दलाल गिरोह की शिकायत फिर भी शांत रहे अफसर

आरबीएम अस्पताल में पिछले लंबे समय से सिलिकोसिस का प्रमाण पत्र बनवाने नाम दलाली करने वाला सक्रिय है। इस बात की जानकारी पीएमओ से लेकर खुद मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल तक को है। लेकिन किसी भी अधिकारी ने आज तक जांच कराना तक उचित नहीं समझा। क्योंकि खुद संबंधित विभाग की ओर से 31 जनवरी व 24 फरवरी को भी उक्त दलाल गिरोह के सक्रिय होने के कारण काम में दबाव आने की शिकायत की गई थी।