• Home
  • Rajasthan News
  • Bharatpur News
  • अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में कूलर और पंखा बंद, भीषण गर्मी से प्रसूताओं की हालत खराब
--Advertisement--

अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में कूलर और पंखा बंद, भीषण गर्मी से प्रसूताओं की हालत खराब

राज्य सरकार जननी सुरक्षा योजना पर करोडों की राशि खर्च कर रही है वहीं प्रसूताओं के लिए सरकारी अस्पताल में आधुनिक...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 07:00 AM IST
राज्य सरकार जननी सुरक्षा योजना पर करोडों की राशि खर्च कर रही है वहीं प्रसूताओं के लिए सरकारी अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं मुहैया करा रही है।

लेकिन कस्बा के अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण प्रसूताओं को बदहाली के दौर से गुजरना पड़ रहा है। अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड का आलम यह है कि वार्ड में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कूलर व चार पंखे तो लगाए हुए है लेकिन कूलर कई दिनों से फूंका पड़ा है वहीं दो पंखा बंद पड़े है। जिसके कारण प्रसूताओं को गर्मी के मौसम में परेशानियों का सामना करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अस्पताल के मेटरनिटी वार्ड में भर्ती प्रसूताएं गर्मी से पड़प रही है। लेकिन अस्पताल प्रशासन प्रसूताओं की कोई सुध नहीं ले रहा है। प्रसूता के परिजन अफरोज खां ने बताया कि अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण मेटरनिटी वार्ड में प्रसूताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कस्बा का तापमान 42 डिग्री के करीब होने के बावजूद अस्पताल में प्रसूताओं के लिए कोई सुविधा मुहैया नहीं कराई जा रही है। अस्पताल प्रशासन द्वारा मेटरनिटी वार्ड में कूलर व चार पंखा तो लगाए हुए है, लेकिन अव्यवस्थाओं के कारण खराब पड़े हुए है जिसका खामियाजा प्रसूता एवं परिजनों को भुगतना पड़ रहा है। प्रसूताओं के परिजनों ने कई बार अस्पताल प्रशासन को समस्या से अवगत कराया है लेकिन अस्पताल प्रशासन ने प्रसूताओं की कोई सुध तक नहीं ली है। जिसके कारण प्रसूताओं में रोष व्याप्त है।

सरमथुरा. वार्ड में बंद पड़ा कूलर व भर्ती प्रसूता।

एएनएम ः डबल फेस होने से फूंक गए है कूलर व पंखा

अस्पताल में तैनात एएनएम नीतू मीणा से प्रसूताओं के परिजनों ने गर्मी की समस्या को लेकर अवगत कराया तो एएनएम ने परिजनों को जबाब देते हुए कहा कि डबल फेस होने के कारण कूलर व पंखा फूंक गए हैं। जिन्हें दुरूस्त कराने के लिए अस्पताल प्रशासन को अवगत करा दिया गया है। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने चार दिन गुजर जाने के बाद भी संसाधनों को दुरूस्त नहीं कराया है। जिसका खामियाजा प्रसूताओं को भुगतना पड़ रहा है।