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त्रिदेव से सीखें जीवन व्यवहार के सबक

3 वर्ष पहले
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यदि आम न हो तो खास किसी काम का नहीं होगा। विशिष्ट लोगों की सारी पहचान ही सामान्यजन से होती है। ज़िंदगी में आपको कुछ खास लोगों से संपर्क रखना पड़ सकता है। आम लोग भी आएंगे, उनसे भी संबंध रखना है और यह भी याद रखना होता है कि एक दिन न आम रहता है, न खास। इन तीनों में क्या भेद है? इसका प्रयोग हिंदू धर्म में बहुत अच्छे ढंग से किया गया है। त्रिदेव की कल्पना इस सिद्धांत को सरल कर देती है। ब्रह्मा, विष्णु और महेश के चरित्र को यदि ठीक से समझ लें तो बड़ा आसान हो जाएगा कि सामान्य लोगों से, विशिष्ट लोगों से और जब कुछ न रहे तब जीवन से क्या व्यवहार किया जाए? ब्रह्मा का संबंध विद्वता से है और समाज का ऊंचा तबका उनसे जुड़ा है। उनके सारे काम खास लोगों के लिए हैं और खास लोग ही उनके आस-पास रहते हैं। विष्णु आम आदमी के लिए हैं। हर वर्ग इनसे जुड़ सकता है। कभी राम तो कभी कृष्ण बनकर सभी के काम आए हैं। फिर आते हैं शिव। अपना कुछ नहीं। जो दे सकते थे, समाज को दे दिया और जिस दिन ध्वंस करना हो तो वह भी शिव करते हैं। तो ब्रह्मा के काम कुछ खास लोगों के लिए हैं, विष्णु के आम लोगों के लिए और जब काम तमाम करना हो तो शिव आ जाते हैं। ये तीनों पात्र यदि हमारे भीतर उतर आएं तो जब खास लोगों में होंगे तो अहंकार नहीं आएगा, आम लोगों को सेवाभाव से जोड़ सकेंगे और जब सबकुछ छोड़ना हो तो वैराग्य जाग जाएगा शिव की तरह..।

 
पं. िवजयशंकर मेहता

humarehanuman@gmail.com

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