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गुरू अग्रदास से प्रेरणा ले नामा जी ने की भक्तमाल कथा की रचना: पं. मुरारीलाल

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2018, 02:50 AM IST

Bharatpur News - गुरू अग्रदास से प्रेरणा ले नामा जी ने की भक्तमाल कथा की रचना: पं. मुरारीलाल डीग | शहर के लक्ष्मण मंदिर पर चल रहे...

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गुरू अग्रदास से प्रेरणा ले नामा जी ने की भक्तमाल कथा की रचना: पं. मुरारीलाल

डीग | शहर के लक्ष्मण मंदिर पर चल रहे भक्तमाल कथा महोत्सव के चतुर्थ दिवस में महंत पं. मुरारीलाल पाराशर ने कथा का बखान करते कहा कि भक्तों की माला को ही भक्तमाल कहा जाता है। नामा जी महाराज ने भक्तमाल की रचना अपने गुरू अग्रदास जी के आदेश पर की थी। नामा जी महाराज पांच वर्ष की अवस्था मे ही संतो की सेवा में लग गए। एक दिन नामा जी के गुरू ध्यान मे बैठे हुये थे। तभी गुरुजी ने ध्यान में देखा की उनके एक शिष्य ने उनको याद किया है । उस शिष्य का जहाज कलकत्ता मे किसी भंवर में फंस गया। उस समय नामा जी गुरुजी की पंखा से हवा कर रहे थे। जब नामा जी को यह ज्ञात हुआ तो उन्होंने तुरंत पंखे को जोर से झटका दिया। झटके के साथ ही जहाज भंवर से निकल आया। जिसके के बाद नामा जी ने गुरुजी से कहा कि आप ध्यान मे ही रहिये, जहाज भंवर से निकल चुका है। तब गुरुजी की प्रेरणा लेकर नामा जी ने भक्तमाल कथा लिखी। भक्तमाल कथा में पांच भक्तिरस है जिनमें हनुमान जी दास रस के सेवक हैं। कौशल्या एवं यशोदा का वात्सल्य रस, अर्जुन का साक्य भाव है । इस मौके पर वैद्य नंदकिशोर गंधी, दिनेश अग्रवाल, प्रहलाद मित्तल, सतीश सर्राफ, ब्रजलता गंधी, विष्णु मित्तल, हरि नसवारिया, दामोदर राठौर आदि अनेक भक्त मौजूद थे।

डीग | शहर के लक्ष्मण मंदिर पर चल रहे भक्तमाल कथा महोत्सव के चतुर्थ दिवस में महंत पं. मुरारीलाल पाराशर ने कथा का बखान करते कहा कि भक्तों की माला को ही भक्तमाल कहा जाता है। नामा जी महाराज ने भक्तमाल की रचना अपने गुरू अग्रदास जी के आदेश पर की थी। नामा जी महाराज पांच वर्ष की अवस्था मे ही संतो की सेवा में लग गए। एक दिन नामा जी के गुरू ध्यान मे बैठे हुये थे। तभी गुरुजी ने ध्यान में देखा की उनके एक शिष्य ने उनको याद किया है । उस शिष्य का जहाज कलकत्ता मे किसी भंवर में फंस गया। उस समय नामा जी गुरुजी की पंखा से हवा कर रहे थे। जब नामा जी को यह ज्ञात हुआ तो उन्होंने तुरंत पंखे को जोर से झटका दिया। झटके के साथ ही जहाज भंवर से निकल आया। जिसके के बाद नामा जी ने गुरुजी से कहा कि आप ध्यान मे ही रहिये, जहाज भंवर से निकल चुका है। तब गुरुजी की प्रेरणा लेकर नामा जी ने भक्तमाल कथा लिखी। भक्तमाल कथा में पांच भक्तिरस है जिनमें हनुमान जी दास रस के सेवक हैं। कौशल्या एवं यशोदा का वात्सल्य रस, अर्जुन का साक्य भाव है । इस मौके पर वैद्य नंदकिशोर गंधी, दिनेश अग्रवाल, प्रहलाद मित्तल, सतीश सर्राफ, ब्रजलता गंधी, विष्णु मित्तल, हरि नसवारिया, दामोदर राठौर आदि अनेक भक्त मौजूद थे।

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