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8 दिन में खर्च होते हैं 200 क्विंटल फूल, दिल्ली से आती है चेरी और मथुरा से गेंदी
ब्रज में होली पर फूलों की होली का क्रेज बढ़ता जा रहा है। ऐसा कोई कार्यक्रम नहीं होता, जिसमें फूलों से होली नहीं होती हो। इसलिए फूलों का बाजार बढ़ता जा रहा है। इससे जुड़े कलाकारों और दुकानदारों का मानना है कि करीब 8 दिन के उत्सव में करीब 200 क्विंटल तक फूल खर्च हो जाते हैं। इसीलिए हमारे यहां भी छोटी जोत के किसान अब फूलों की खेती के प्रति आकर्षित हो रहे हैं। क्योंकि उन्हें भाव अच्छा मिल जाता है। होली के मौके पर फूलों की होली में खास तौर से चेरी और गेंदी इस्तेमाल होता है, क्योंकि यह फूल बसंत से होली तक पर्याप्त मात्रा में आता है। इसलिए इसके भाव 15 से 20 रुपए किलो तक रहते हैं। इन दिनों गुलाब भी आने लगता है, लेकिन यह 20 से 25 रुपए किलो तक रहता है। इसलिए इन तीनों फूलों की डिमांड रहती है। भरतपुर में फूलों की आवक मुख्यत: दिल्ली और मथुरा से होती है। दुकानदार सौरभ ने बताया कि होली पर फूलों की प्रति दिन मंडी लगती है। औसतन एक दिन में 30 क्विंटल फूल बिकता है। भरतपुर में मंडी मोरी चार बाग पर लगती है। शहर में करीब 20 से ज्यादा दुकानदार है, जो प्रतिदिन करीब एक से दो क्विंटल की खपत करते हैं। मथुरा राधाकृष्ण ग्रुप की कलाकार रजनी ने बताया कि फूलों की होली के बिना कोई भी कार्यक्रम अधूरा रहता है। एक कार्यक्रम में कम से कम एक-डेढ क्विंटल फूलों की ज़रूरत तो रहती है। बाकी आयोजक पर निर्भर करता है। करीब 25 साल से रासलीला और राधा-कृष्ण नृत्य को प्रोत्साहित कर रहे अशोक शर्मा ने बताया कि होली में रासलीला, राधाकृष्ण की झांकी, मयूर नृत्य और फूलों की होली में फूलों की काफी डिमांड रहती है। इसके अलावा कलाकारों के श्रंगार के लिए पुष्पों को इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि श्रीकृष्ण श्रंगार रस के प्रतीक है और पुष्प प्रकृति के सौंदर्य का अनुपम प्रतीक हैं। इसलिए राधा-कृष्ण के नृत्य में फूलों का इस्तेमाल किया जाना शास्त्र सम्मत है। फाग खेलन बरसाने आए हैं, नटवर नन्दकिशोर..., होली खेलन आए श्याम, जैसे गीतों की धुनों पर फूलों की होली खेलने का रिवाज है।
भरतपुर। होली पर मंडी में बिक्री के लिए आए फूल।