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राम मंदिर में लगेगा 60% बंशी पहाड़पुर का पत्थर, हर माह 10 से 20 ट्रोला सेंड स्टोन भेजा जाएगा अयोध्या

Bharatpur News - रामलला के पक्ष में फैसला आने के बाद भरतपुर के बयाना और बंशी पहाड़पुर के खनन क्षेत्र में हलचल है, क्योंकि अब अयोध्या...

Bhaskar News Network

Nov 10, 2019, 07:31 AM IST
Bharatpur News - rajasthan news 60 banshi paharpur stone will be installed in ram temple 10 to 20 trola send stones will be sent every month to ayodhya
रामलला के पक्ष में फैसला आने के बाद भरतपुर के बयाना और बंशी पहाड़पुर के खनन क्षेत्र में हलचल है, क्योंकि अब अयोध्या के लिए फिर से पत्थर की आपूर्ति प्रारंभ हो जाएगी। राम जन्म भूमि मंदिर निर्माण न्यास की ओर से प्रस्तावित राम मंदिर में 60 फीसदी से ज्यादा पत्थर का इस्तेमाल क्षेत्र के खनन क्षेत्र में निकलने वाला सेंड स्टोन इस्तेमाल होगा। मंदिर में करीब 4 लाख घन फीट पत्थर इस्तेमाल होगा, जिसमें से करीब 2.5 लाख घन फीट बंशीपहाडपुर का स्टोन लगेगा। इसलिए वर्ष 2006 से अयोध्या के कारसेवक पुरम में पत्थर भेजा जा रहा है। अब तक एक लाख घन फीट पत्थर की आपूर्ति हो चुकी है। इसमें 70 हजार घन फीट पत्थर अयोध्या की राम मंदिर कार्यशाला में तथा 30 हजार घन फीट पत्थर पिंडवाड़ा की कार्यशाला में भेजा जा चुका है। यहां पत्थर की नक्काशी की जा रही है। एक खेप महीने भर पहले ही भेजी गई है।

पिछले दिनों 10 ट्रोला पत्थर भेजा गया, जिसमें एक में 400 घन फीट माल था। अब डेढ़ लाख घन फीट पत्थर की आपूर्ति की जाएगी। इसके लिए संबंधित खान मालिकों से विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी संपर्क में है। इसकी पुष्टि विहिप के विभाग अध्यक्ष सतीश भारद्वाज ने की है। भारद्वाज ने बताया कि अयोध्या के राम मंदिर के लिए बंशी पहाड़पुर से सेंड स्टोन भेजने का काम जल्द शुरू हो जाएगा।

पिंडवाड़ा में तराशे गए 192 पिलर और दीवारों पर खड़ा होगा राम मंदिर

राम मंदिर के लिए इस तरह के पीलर सिरोही के पिंडवाना स्थित कार्यशाला में डिजाइन किए जा रहे हैं

महलपुरा और चूरा के पत्थरों की हुई टेस्टिंग

महलपुर चूरा, तिर्घरा, छऊआमोड और सिर्रोंध क्षेत्र की खानों के पत्थर को टेस्टिंग के बाद चयनित किया है। यहां सहकारी समितियों और खान मालिकों से ब्लाक निकालकर बयाना भेजने काे कहा गया है। यहां रफ माल की कटिंग होने के बाद अयोध्या रवाना किया जाएगा। पत्थर की आपूर्ति 6 माह तक हाेगी। 10 से 20 ट्रोला पत्थर प्रतिमाह भेजा जाएगा। इसके लिए विश्व हिंदू परिषद द्वारा कुछ ट्रोले स्थाई रूप से किराए पर लिए जाएंगे। इस संबंध में कारसेवकपुरम् में पत्थर नक्काशी का काम देख रहे आरके पांडेय लगातार संपर्क में हैं।

इसलिए पसंद...मजबूत और सुंदर, बारिश से आता है निखार

बंशी पहाड़पुर के पत्थर की खासियत मजबूती और सुंदरता के कारण सदियों से प्रसिद्ध है। इसमें अन्य पत्थरों के मुकाबले अधिक भार सहने की क्षमता और आसानी से पच्चीकारी होने की खासियत के कारण इसकी हमेशा से मांग रही है। संसद, लालकिला, बुलंद दरवाजा सहित अक्षरधाम और इस्कान के अधिकांश मंदिरों में बंशी पहाड़पुर का पत्थर लगा है। पत्थर कारोबारी नेमीचंद ने बताया कि इस पत्थर में रुनी यानी स्टोन कैंसर नहीं होता। बारिश से पत्थर के रंग में निखार आता है। इस कारण राम मंदिर के लिए इसका चयन हुआ।

फ्लैश बैक...अयोध्या आंदोलन के समय बनी थीं भरतपुर में रामशिलाएं

वर्ष 1990 में हुए अयोध्या आंदोलन के दौरान भरतपुर प्रदेश का केंद्र रहा। इस आंदोलन में राम शिला पूजन के लिए श्रीराम लिखी विशेष ईंट भरतपुर के भट्टों में तैयार हुई। आरएसएस के तत्कालीन विभाग संघ चालक सीताराम अग्रवाल ईंट भट्टों के बडे़ कारोबारी थे। उनके भट्टों में गुप्त रूप से रामशिला ईंटों का निर्माण हुआ था। इसके अलावा उत्तर प्रदेश का प्रवेश द्वार होने के कारण राजस्थान और गुजरात के कारसेवकों का भरतपुर पड़ाव स्थल था। भरतपुर के पुराना डाकखाना निवासी डा. महेंद्रनाथ अरोड़ा का कारसेवा के दौरान 2 नवंबर 1990 में गोली के शिकार हो गए थे। वैसे काफी समय पहले जयपुर और जोधपुर चले गए थे। उनकी स्मृति में इस मार्ग का नामकरण उनके नाम से हुआ। जिसका शिलान्यास तत्कालीन मंत्री उमा भारती ने किया था।

सिरोही/पिंडवाड़ा|राम मंदिर को लेकर शनिवार को ऐतिहासिक फैसला आया। मंदिर निर्माण को लेकर 3 महीने में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ट्रस्ट बनाने के निर्देश दिए, लेकिन राजस्थान के लिए सबसे खास बात यह है कि दो मंजिला राम मंदिर जिन पिलराें और दीवाराें पर खड़ा होगा, उसे तराशने का काम सिरोही जिले के पिंडवाड़ा में किया गया था। करीब 7 साल तक यहां सैकड़ों कारीगरों ने पत्थर तराशने का काम किया। दरअसल, राम मंदिर को लेकर जब कवायद शुरू हुई थी तब बयाना, भरतपुर से बंशी पहाड़पुर पत्थरों का चयन किया गया था, जबकि इन पत्थरों को तराशने के लिए पिंडवाड़ा काे चुना गया। काम जल्द पूरा हो, इसके लिए विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल, चंपत रॉय और रामबाबूजी ने जनवरी 1995 में पूजन कर यहां तीन कार्यशालाओं में कार्य शुरू करवाया था। इसमें सोमपुरा मार्बल इंडस्ट्री, भरत शिल्प कला केंद्र व महादेव शिल्प कला केंद्र (मातेश्वरी कंस्ट्रक्शन) में विश्व हिंदू परिषद द्वारा इन पत्थरों को तराशने का कार्य किया गया। 2004 में यहां काम पूरा हुआ। जानकारों की मानें तो दो मंजिला राम मंदिर जिन पर पिलर पर खड़ा होगा, उन्हें तराशने का काम यहीं किया गया है। प्रथम मंजिल पर ऐसे करीब 96 पिलर हैं और 96 पिलर ही दूसरी मंजिल पर हैं। इन सभी को अयोध्या के कारसेवकपुरम में रखा गया है। यहां करीब 7 साल तक पत्थरों को तराशने का काम चला था, जहां प्रतिदिन 10 घंटे 300 से अधिक कारीगर इन्हें तराशने का काम करते थे। अब यह पिंडवाड़ा और जिले के लिए गौरव की बात है कि यहां तराशे गए पत्थर अयोध्या में बनने वाले राम मंदिर की शोभा बढ़ाएंगे।

दीवार और छत के पत्थर तैयार

बंशी पहाड़पुर के स्टोन से मंदिर में लगने वाले सभी 106 खंभे तैयार हो गए हैं। विहिप के विभाग अध्यक्ष सतीश भारद्वाज ने बताया कि मंदिर दो मंजिला बनेगा। इसके भूतल में 106 खंभे लगेंगे, जिनकी हाइट 16 फीट है। इसके अलावा सिंह द्वार, रंग मंडप, नृत्य मंडप, गर्भगृह और परिक्रमा मार्ग बनेगा। मंदिर की लंबाई 270 गुणा 135 फुट है। शिखर की ऊंचाई 125 फीट रहेगी। परिक्रमा मार्ग 10 फीट चौड़ा रहेगा। दीवार 6 फुट मोटी रहेगी। चाैखट में संगमरमर और सजावट के लिए अन्य पत्थर का इस्तेमाल होगा। खंभे, दीवार, छज्जे, महराब, झरोखे, छत के लिए पत्थर तैयार किए गए हैं। इनमें पच्चीकारी का काम लगभग पूरा हो चुका है। उल्लेखनीय है कि 30 अगस्त 1990 को अयोध्या के कारसेवकपुरम् में पत्थरों को तराशने का काम शुरू हुआ था। इसके अलावा राजस्थान के पिंडवाड़ा में भी काम चल रहा है।

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