मोह के कारण व्यक्ति सबको अपना मान लेता है, यहीं भूल दुख का कारण-जैन मुनि

Bharatpur News - कामां। मोह के कारण व्यक्ति सबको अपना मान लेता है। यही भूल दुख का मूल कारण होती है क्योंकि जीव का इस संसार में मात्र...

Jan 16, 2020, 10:30 AM IST
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कामां। मोह के कारण व्यक्ति सबको अपना मान लेता है। यही भूल दुख का मूल कारण होती है क्योंकि जीव का इस संसार में मात्र अपनी आत्मा के अलावा कुछ भी नहीं है, और कोई भी नहीं है। मोह रूपी जाल संसार सागर में भटकने का प्रमुख कारण होता है उक्त बात जम्बूस्वामी तपोस्थली बोलखेड़ा पर विराजमान दिगंबर जैन मुनि जिनानन्द ने व्यक्त किए। जैन मुनि ने कहा कि जीव बाहर से शरीर, धन, संपत्ति, स्त्री, पुत्र, रिश्ते, वैभव आदि और अंदर से राग, द्वेष, क्रोध मान, माया, लोभ आदि के प्रति ममत्व भाव के त्यागने के उपरांत जो आत्मा का शुद्ध स्वरूप मात्र बचता है। वही निर्वाण प्राप्त होने की स्थिति पाता है। किंतु इस सब के जाल से निकलना किसी आम व्यक्ति के वश में नहीं होता है। सब जानते हैं संसार असार है, और संसार से छुटकारा पाना भी चाहते हैं।

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