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बाजार में चाइनीज पिचकारियों काे रोना, इंडियन माल का जमा रंग
बाजार में इस साल चाइनीज पिचकारियां लगभग गायब हैं। अगर कहीं उपलब्ध हैं भी तो ग्राहक खरीदना पसंद नहीं कर रहे हैं। वजह है कोरोना वायरस। महामारी की तरह फैले इस वायरस की वजह से चीन में इस साल पिचकारियों का प्रॉडक्शन ही कम हुआ। चूंकि इस वायरस का जनवरी के मध्य में ही हल्ला हो गया था। इसलिए बाजार में माल ही कम आया। थोड़ा-बहुत जो माल आया, उसे खरीदने में भी स्थानीय दुकानदारों ने सावधानी बरती। नतीजा यह हुआ कि इस साल चाइनीज माल का मार्केट शेयर करीब 20 फीसदी ही है। जबकि पिछले साल मार्केट शेयर 50 फीसदी से भी ज्यादा था। इसके विपरीत बाजार में भारतीय उत्पादों की डिमांड बनी हुई है। कामसेन धर्मशाला रोड के थोक विक्रेता प्रतीक भाया ने बताते हैं कि चीन से होली पर केवल पिचकारियां ही हमारे यहां आती हैं। जबकि रंग और गुलाल तो हमारे यहां ही पर्याप्त मात्रा में बनते हैं। बल्कि मथुरा और हाथरस क्षेत्र से देशभर में सप्लाई होते हैं। इसलिए चाइनीज रंगों का हमारे यहां कोई मार्केट ही नहीं है। इधर, कोरोना वायरस का खौफ लोगों में इस कदर बैठा है कि ग्राहक “मेड इन चाइना”देखते ही पिचकारी को रख देता है। वह उसे खरीदना पसंद ही नहीं करता। उन्हें लगता है कि कहीं इन उत्पादों के जरिए कोरोना जैसी कोई बीमारी न फैल जाए।
मौसम खुलते ही बाजार गुलजार, बढ़ने लगी ग्राहकों की रौनक
एक हफ्ते से चल रही बारिश और ओलावृष्टि से चिंतित रंग-गुलाल और पिचकारी मार्केट में अब तक थोड़ी बेचैनी थी। लक्ष्मण मंदिर बाजार के दुकानदार पुरुषोत्तम, मनोज और योगेश कुमार ने बताया कि पहले लग रहा था कि इस बार सीजन पिट जाएगा। लेकिन, रविवार को मौसम साफ रहने से बाजार गुलजार हो गया। ग्राहकी काफी अच्छी रही। एकाएक निकली ग्राहकी से मोलभाव भी कम हो रहा है। क्योंकि ग्राहक खरीदारी के मूड में है और विक्रेता माल को निकालने की फिक्र में।