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देवनागरी लिपी से मिलती है शांति

2 वर्ष पहले
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हम दुनिया से कुछ अलग होने का जिन-जिन बातों पर गर्व कर सकते हैं, उनमें एक है हमारी देवनागरी लिपि। इन दिनों जब हाथों से मोबाइल छूटता नहीं, आंखों के सामने रखा लेपटॉप-कम्प्यूटर हटता नहीं तो लोग परेशान होने के बाद तरीका भी सही नहीं ढूंढते। जिस अकल से आप इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रहे हैं, अपनी अशांति मिटाने के लिए भी ऐसी ही अकल लगाइए। चूंकि मोबाइल, कम्प्यूटर के बटन पर उंगलियां इतनी चलने लगी हैं कि आदमी ने लिखना और पढ़ना बंद ही कर दिया है। यदि आप तकनीक से जुड़े व्यक्ति हैं और दिनभर में लंबा समय टेक्नोलॉजी के साथ बिताते हों तो कुछ समय लिखने की आदत जरूर डालिए और वह भी देवनागरी लिपि। जर्मनी के एक वैज्ञानिक ने दुनिया की जितनी खास भाषाएं हैं, सब पर प्रयोग किया था। जितने अक्षर दुनिया की भाषाओं में थे उनका मिट्टी का रूप बनाकर, उसमें फूंक डालकर जो ध्वनि सुनी तो उस वैज्ञानिक ने तय किया था कि देवनागरी के अक्षरों की प्रतिध्वनियां अद्भुत होती हैं। हम इस शोध पर बहुत अधिक बात न करें, पर इतना तय है कि देवनागरी लिपि से जुड़ने के बाद आप शांति महसूस करेंगे, क्योंकि इसका गठन ही इस तरीके से किया गया है। इसलिए कितने ही व्यस्त हों, अपनी डायरी का एक पन्ना हाथ से अवश्य लिखिए। यदि हिंदी न जानते हों तो अंग्रेजी या जो भाषा जानते हों, उसमें लिख लें, लेकिन यदि हिंदी में एक पृष्ठ लिखा, फिर आप नया शोध करेंगे कि इसके बाद शांति कहां से आ गई?

 

पं. िवजयशंकर मेहता

humarehanuman@gmail.com

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