विचार व्यक्त करने की आज़ादी व उसकी मर्यादा

Bharatpur News - उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सोशल मीडिया के जरिये आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर पत्रकार प्रशांत...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 09:45 AM IST
Nagar News - rajasthan news freedom of expression and its limits
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सोशल मीडिया के जरिये आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर पत्रकार प्रशांत कनौजिया को जेल में डाल दिया गया था। इस कार्रवाई को गलत बताते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। न्यायालय का यह फैसला तो महत्वपूर्ण है ही, लेकिन स्वतंत्रता के बुनियादी अधिकारों पर स्पष्ट शब्दों में उसने जो कहा है, वह भी महत्वपूर्ण है। ऐसे असंदिग्ध शब्दों में दिए फैसले आगे जाकर सत्र और उच्च न्यायालयों के लिए दिशा दिखाने वाले निर्णय साबित होते हैं। इसी से लोकतंत्र के बुनियादी सिद्धांतों को मजबूती मिलती है। वास्तव में इस मुद्‌दे को लेकर बखेड़ा पैदा होने का कोई कारण नहीं था। सोशल मीडिया पर लगभग सारे नेताओं, सेलेब्रिटी, वरिष्ठ पत्रकार, विचारक आदि ट्रोल होते रहते हैं। लेकिन, आज तक इसे लेकर किसी की गिरफ्तारी होने की नौबत नहीं आई। हालांकि, पत्रकार की पोस्ट में मुख्यमंत्री को लेकर की गई टिप्पणी राज्य सरकार को नागवार गुजरी। एक पुलिस उपनिरीक्षक की शिकायत पर उसके खिलाफ प्रकरण दायर कर लिया गया और तत्काल गिरफ्तारी भी हो गई। उस पर मुख्यमंत्री की छवि खराब करने का आरोप लगाया गया। गिरफ्तारी के खिलाफ पत्रकार की प|ी ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई और सुनवाई के बाद उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नागरिकों की स्वाधीनता अटल है। इससे कोई समझौता नहीं किया जा सकता। यह स्वतंत्रता हमें संविधान से मिली है और इससे कोई छेड़छाड़ नहीं हो सकती। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में न्यायपालिका की भूमिका महत्वपूर्ण होने का मतलब यह नहीं कि इस प्रकार की टिप्पणियों को न्यायालय की सहमति है। पत्रकार की टिप्पणी पर न्यायालय ने तीखे शब्दों में नाराजगी जाहिर की है और उस पर कानून सम्मत कार्रवाई जारी रहेगी। इस तरह न्यायालय ने सोशल मीडिया और सरकार के स्तर पर जाहिर दोनों ही प्रवृत्तियों पर अंकुश लगाया है। फैसले से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तो पुष्ट हुई ही, उसकी मर्यादा भी स्पष्ट हुई है। इस बुनियादी अधिकार का किसी की छवि खराब करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।

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