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मीन मलमास 14 से, एक माह नहीं होंगे मांगलिक कार्य
होली के आठ दिन के होलाष्टक के बाद 14 मार्च से फिर मांगलिक कार्यों पर रोक लगेगी। क्योंकि सूर्य के गुरु वृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश कर जाएगी। इससे मीन मलमास लग जाएगा। यह 13 अप्रैल तक प्रभारी रहेगा। इसके कारण एक माह के लिए शहनाइयों की गूंज थम जाएगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित राम भरोसी भारद्वाज ने बताया कि 14 मार्च से 13 अप्रैल तक सूर्य के मीन राशि में प्रवेश करने से मीन मलमास रहेगा। इस दौरान शादी-ब्याह आदि मांगलिक कार्य नहीं हो सकेंगे। पंडित भारद्वाज ने बताया कि 13 अप्रैल को रात 8.21 बजे सूर्य मेष राशि में प्रवेश कर जाएंगे। जो कि उच्च राशि है। इसके साथ ही विवाह एवं मांगलिक कार्य प्रारंभ होंगे। इसके बाद एक जुलाई से देवशयनी एकादशी से देव सो जाएंगे। 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी को देव उठेंगे। इस दौरान करीब पांच माह तक फिर मांगलिक व शुभ कार्य वर्जित रहेंगे। देवउठनी एकादशी से शहनाइयां बजनी शुरू होंगे। साल के अंत में 15 दिसंबर से धनु मलमास लग जाएगा। ज्योतिषी भारद्वाज ने बताया कि इस साल चातुर्मास करीब पांच माह का होगा। चातुर्मास के दौरान ही पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) आएगा। इससे चातुर्मास 118 दिन की बजाए 138 दिन का रहेगा। दो अश्विन माह होंगे। पुरुषोत्तम मास 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रहेगा।
हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्र 21 मार्च से शुरू होंगे
किस माह में कितने होंगे विवाह मुहूर्त: {अप्रैल में 6 दिन : 16, 17, 20, 25, 26 व 27 अप्रैल। { मई में 15 दिन : 1, 2, 4, 5, 6, 10, 13, 14, 15, 17, 18, 19, 23, 24 व 29 मई। { जून में 8 दिन : 13 से 16 जून तक, 27 से 30 जून। { नवंबर में 3 दिन : 25, 26 व 30 नवंबर। { दिसंबर 5 दिन : 1, 7, 9, 10, 11 दिसंबर।
चैत्र मास के नवरात्र 21 मार्च से प्रारंभ होंगे। इस दिन हिंदू नववर्ष भी प्रारंभ होगा। इसके साथ ही देवी की पदयात्रा प्रारंभ हो जाएंगी। करौली मेले और झील का वाड़ा कैलादेवी मंदिर के लिए पदयात्रा निकाली जाएंगी। जगह-जगह भंडारे लगाए जाएंगे। इसके लिए संस्थाओं ने तैयारी प्रारंभ कर दी है। मंदिर में भी तैयारी प्रारंभ हो गई हैं। बाजार में भी नवरात्र की तैयारी प्रारंभ हो गई हैं। उल्लेखनीय है कि करौली देवी की पदयात्रा के लिए पचासियों हजार पद यात्री करौली और झील का वाड़ा देवी के दर्शन के लिए भरतपुर होकर निकलते हैं।