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अस्थमा से पीड़ित हैं तो शरद पूर्णिमा की आयुर्वेदिक खीर खाएं, निशुल्क वितरण कल सुबह 4 बजे से किया जाएगा

Bharatpur News - अगर आप अस्थमा से पीड़ित हैं तो शरद पूर्णिमा की चंद्रकलाओं में शीतल आयुर्वेदिक खीर खाएं, जिसका निशुल्क वितरण...

Oct 13, 2019, 07:26 AM IST
अगर आप अस्थमा से पीड़ित हैं तो शरद पूर्णिमा की चंद्रकलाओं में शीतल आयुर्वेदिक खीर खाएं, जिसका निशुल्क वितरण सोमवार की सुबह 4 बजे से सूर्योदय से पूर्व तक खादी कालोनी हीरादास पर होगा। विशेष खीर का निर्माण श्री गिर्राज आरोग्य सेवा समिति द्वारा किया जाएगा। यह खीर दमा, श्वास, एलर्जी, जुकाम, खांसी से पीड़ित रोगियों के लिए लाभदायक है। यह वन डोज थैरेपी है, जिसमें एक बार की दवा से रोगी को लाभ होता है। वैद्य चंद्र प्रकाश दीक्षित ने बताया कि संस्था द्वारा पिछले 9 साल से नियमित रूप से शरद पूर्णिमा पर औषधीय खीर का निशुल्क वितरण किया जा रहा है। अब तक 1800 से ज्यादा रोगियों को दवा का वितरण किया गया है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे रोगी जो एलर्जिक वस्तुओं से परहेज रखते हैं, वह इस दवा युक्त खीर से निरोगी हुए हैं। इसमें सफेद पीपल की शाखा विभाजन से निकलने वाली जटाओं का चूर्ण, मुलेठी और अर्जुन तव्क चूर्ण खीर में मिश्रित होता है। चूंकि शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रकलाओं में प्रभाव होता है, जिससे औषधीय गुण बढ़ जाता है।

मंदिरों में सजेंगी झांकी

मंदिरों में रविवार को शरद पूर्णिमा पर झांकी सजाई जाएंगी। ठाकुरजी को श्वेत वस्त्र धारण कराए जाएंगे तथा खीर बनाई जाएगी। जिसका वितरण सोमवार को मंगला और श्रंगार आरती में किया जाएगा।

अमृत समान: इसलिए आज घर पर भी बनाएं खीर

वैज्ञानिकों के अनुसार दूध में लैक्टिक अम्ल और अमृत तत्व होता है। यह तत्व किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और भी आसान हो जाती है। इसी कारण ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान में रखने का विधान किया है और इस खीर का सेवन सेहत के लिए महत्वपूर्ण बताया है। इससे पुनर्योवन शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह परंपरा विज्ञान पर आधारित है। एक अन्य वैज्ञानिक शोध के अनुसार इस दिन दूध से बने उत्पाद का चांदी के पात्र में सेवन करना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। इससे विषाणु दूर रहते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 30 मिनट तक शरद पूर्णिमा का स्नान करना चाहिए। इस दिन बनने वाला वातावरण दमा के रोगियों के लिए विशेषकर लाभकारी माना गया है।

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