अब पहले जैसी रौनक नहीं रही, सन 1958 के दंगल में हमारे पूरन ने रूस के पहलवान को किया था पराजित

Bharatpur News - भरतपुर| हीरादास पर लगने वाली नुमाइश 100 साल की नहीं, बल्कि 132 साल पुरानी है। क्योंकि यह पशु मेला सन् 1888 में शुरू हो चुका...

Bhaskar News Network

Oct 12, 2019, 08:21 AM IST
Deeg News - rajasthan news now it is not as bright as before in the riots of 1958 our puran defeated the russian wrestler
भरतपुर| हीरादास पर लगने वाली नुमाइश 100 साल की नहीं, बल्कि 132 साल पुरानी है। क्योंकि यह पशु मेला सन् 1888 में शुरू हो चुका था। तब यह मेला मौजूदा कलेक्ट्रेट परिसर के मैदान में लगता था। असल में केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान तत्कालीन घना जंगल था, यहां जो सांड पाए जाते थे। उनका बधियाकरण करके इस पशु मेले में बेचा जाता था। उससे जो धनराशि प्राप्त होती थी उसे राजकोष में जमा कराया जाता था। इसका उल्लेख डीग के तत्कालीन नाजिर ज्वाला सहाय ने अपनी पुस्तक महाराजा जसवंत सिंह में भी किया है। बाद में इसे मेले का रूप महाराजा किशन सिंह के समय में दिया गया। इसमें प्रदर्शनी और मनोरंजन को प्रमुखता दी गई। यह उत्तर भारत के प्रसिद्ध मेलों में गिना जाता रहा है। इसलिए राजघराने की ओर से हर मौके पर व्यापारियों की मदद की गई। वर्ष 1956 में दशहरे के दिन भयंकर अंधड़ और बरसात हुई। दुकानदारों के तंबू धराशायी हो गए। खजला सहित तमाम सामग्री पानी में तैर गई। मेले में भारी नुकसान हुआ। व्यापारियों ने महाराजा ब्रजेंद्रसिंह से गुहार लगाई। उन्होंने स्वयं के कोष से डेढ़ लाख रुपए की मदद की और तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाडिय़ा और बाबू राजबहादुर से बात करके सरकार से दुकानदारों का किराया, बिजली का बिल और तमाम तरह के टैक्स माफ कराए। ताकि व्यापारी मेले से जुडे रहें। इसके अलावा 1953 में सर्कस में आग का प्रदर्शन करने के दौरान आग लग गई। जो खजला मार्केट तक पहुंच गई। इसके बाद ही कच्ची चौपड़ का निर्माण हुआ।

मेले में आईं थी फिल्म अभिनेत्री सिम्मी- निम्मी

मेले में जो रौनक पहले थी, वैसी अब नजर नहीं आती। क्योंकि पहले हर शख्स के लिए साल भर में सैर-सपाटे का प्रमुख माध्यम यही था। दशहरे पर मेला परवान पर होता था। लाखों की भीड़ जुटती थी, क्योंकि उस दिन दशहरा का जुलूस निकलता था। वर्ष 1958 में हुए विशाल दंगल में पूरन पहलवान ने रूस से आए पहलवान को चित्त किया था। इसके अलावा झनक-झनक पायल बाजे... फिल्म की अभिनेत्री निम्मी और सिम्मी भी कार्यक्रम देने आई थीं।

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