घना में आए पैलिकन, शांति कुटीर के पीछे डाला डेरा, इस साल दो माह लेट

Bharatpur News - भरतपुर| केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान घना में पैलिकन आ गए हैं। इन्होंने शांति कुटीर के पीछे डेरा डाला है।...

Jan 16, 2020, 07:21 AM IST
Bharatpur News - rajasthan news pelicans arrive in dense encamped behind shanti cottage two months late this year
भरतपुर| केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान घना में पैलिकन आ गए हैं। इन्होंने शांति कुटीर के पीछे डेरा डाला है। पैलिकन इस साल दो माह लेट आए हैं। पिछले साल नंवबर के अंत में ही पैलिकन आ गए थे। फिर भी इस साल दो माह पहले आए हैं, क्योंकि रुटीन में पैलिकन मार्च के मध्य में आते हैं। ये मार्च के अंत तक ठहरेंगे, क्योंकि इस साल घना की सभी झीलों में अच्छी संख्या में मछलियां हैं। भरतपुर में रोजी और डोमेसियल पैलिकन आते हैं। जिनमें सबसे अधिक रोजी पैलिकन हैं। ज्ञात रहे कि घना में अगस्त-सितंबर में पानी आ गया था। इनमें लाखों की संख्या में मछलियां हैं, जो जो अब बड़ी हो गई हैं। ये पैलिकन का पसंदीदा भोजन हैं। नेचरलिस्ट रनवीरसिंह ने बताया कि पैलिकन के आने से वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफरों में उत्साह है क्योंकि इनकी एक्टिविटी पर्यटकों को लुभा रही है। बर्ड वाचर और फोटोग्राफर घना में घुसते ही पैलिकन की लोकेशन तलाश रहे हैं। घना में आए पैलिकन का मूवमेंट बंध बारैठा, फतहसागर, नौनेरा, कोट सहित धौलपुर के बाड़ी स्थित तालाबशाही तक है क्योंकि इन सभी जगह इन्हें आसानी से मछलियां खाने को मिल रही है। मछलियां खाने का शौकीन होने के कारण इन्हें मछुआरा भी कहा जाता है। पैलिकन को स्थानीय भाषा में हवासिल कहा जाता है। पैलिकन समूह में शिकार करते हैं और एक बार में दो-तीन किलो तक मछली को गड़प कर जाते हैं। इसके लिए इनके मुंह में थैली होती है, जिसमें मछलियां का शिकार कर भर लेते हैं और बाद में आराम से खाते हैं।

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