कवियों ने हंसाया, गुनगुनाया और कश्मीर पर मनन को किया मजबूर

Bharatpur News - शनिवार को शरद पूर्णिमा की पूर्व संध्या कहकहां से आबाद थी। निशा जैसे-जैसे गहराती जा रही थी काव्य रचनाओं की रोशनी...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:26 AM IST
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शनिवार को शरद पूर्णिमा की पूर्व संध्या कहकहां से आबाद थी। निशा जैसे-जैसे गहराती जा रही थी काव्य रचनाओं की रोशनी वैसे ही उज्जवल हो रही थी। हास्य, श्रंगार, ओज, वीर, व्यंग्य रस से पगी रचनाओं ने कभी श्रोताओं को हंसाया तो कभी आक्रोश से भर दिया। गंभीर कविताओं पर मनन करने को मजबूर किया। सबसे अधिक फोकस कश्मीर और धारा 370 पर था। माहौल का असर था कि हास्य व्यंग्य के कवियों ने भी कश्मीर के आतंकवाद और पाकिस्तान के खिलाफ कविताएं पढ़ी। शनिवार की रात श्री जसवंत प्रदर्शनी के रंगमंच पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें देश भर से आए कवियों ने रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। ठंड की सरसराहट के बीच कवियों ने काव्य की जो रोशनी बिखेरी, जिसमें देर रात तक श्रोता नहाते रहे। तालियों की गूंज हल्की ठंड में काव्य की गर्माहट से आबाद थी। कवियों ने कश्मीर में धारा 370 हटाने के सरकार के निर्णय को सराहा और आतंकवादियों के खिलाफ आक्रोश जताया। अलवर से आए वीर रस के कवि विनीत चौैहान ने अपनी रचना जिन लोगों ने संविधान को रद्दी अखबार बना डाला, कश्मीर को पत्थरबाजी का बाजार बना डाला, उनकी अक्ल ठिकाने ला दी उनकी चतुराई ने, सब की ऐसी तैसी कर मोटा भाई ने... सुनाकर दर्शकों की वाह वाही लूटी। उन्होंने एक और कविता बहुत दिनों के बाद देश में ऐसा मौसम आया, अमर तिरंगा कश्मीर पर खुलकर फहराया...सुनाई तो लोगों ने भारत माता की जय के जयकारे लगाए। माहौल को देखते हुए टूंडला के हास्य कवि लटूरी लट्ठ ने... कश्मीर में आतंकवादियों को अनूठे अंदाज में चेतावनी दी। उन्होंने कहा घाटी में आतंकवाद का जो खेलेगा खेल, कंधे पर जाएगा या जाएगा जेल....। इसमें उन्होंने हास्य का पुट भी दिया। उन्होंने भली भांति हम जानते सारे रीति रिवाज, शांति कपोत उड़ेंगे कहां पर कहां गुरु के बाज, युद्ध चाहने वालों से हम युद्ध किया करते हैं, हमने ही जग काे दिए श्री कृष्ण महाराज...। कपासन के शंकर सुखवाल ने दिल्ली के दिल में हर पल युद्ध के अरमां मचल रहे, सरहद के उस पार भेडिय़े रोज ठिकाने बदल रहे, फांसी वाला फंदा हाफिज की गर्दन को नाप रहा, दाऊद इब्राहिम मोदी जी से थर-थर कांप रहा...सुना ओज के माहौल में और गर्माहट ला दी। मुख्य अतिथि डीआईजी लक्ष्मण गौड़ और अध्यक्ष एडीएम प्रशासन नारायण सिंह चारण, एसडीएम संजय गोयल ने शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से हुई।

ओज गीतकार अशोक धाकरे ने की दैनिक भास्कर के लिए रिपोर्टिंग

भरतपुर. कवि सम्मेलन में काव्य पाठ करती कवियत्री सपना सोनी।

बेटियों की चिंता : प्रतापगढ़ के विजय विद्रोही ने कन्या भ्रूण हत्या विषय को गंभीरता से उठाया। उनकी रचना के बोल थे भ्रूण हत्यारे बनकर भिखारी घूमते हैं मांग कर भी पेट भरण नहीं होता, जो बेशर्म मार देते हैं कन्या को गर्भ में सात पीढ़ी तक उनके आंगन में बेटी का अवतरण नहींं होता’’ सुनाकर लोगों को बेटी बचाने का आहवान दिया। फरीदाबाद के सरदार मंजीत सिंह ने हे जलती आग सीने में नही डरता सिकन्दर से, मगर हूं बाप बेटी का डरा रहता हूं अंदर से... सुनाकर बेटी सुरक्षा के प्रति चिन्ता व्यक्त की। श्रवण दान शून्य जोधपुर ने जमाने का इस तरह बदलना मुझको भाता नहीं, कि कोई , हमीद मां के लिए चिमटा लाता नहीं... सुनाकर संस्कारों के प्रति जागरूक किया।

श्रंृगार...चित्र अपना सलोना बना दीजिए

दौसा से आई गीत-गजलकार सपना सोनी ने माहौल को रसमय बनाते हुए पढ़ा मेरे मन की धरा पर मधुर भाव से चित्र अपना सलोना बना दीजिए, जितनी गजलें कहीं मेरे वास्ते उनके कुछ शेर तो गुन गुना दीजिये... सुनाकर माहौल काे श्रंगार रस में डुबो दिया। इटावा की योगिता चौहान ने इस धरती से उस अंबर तक घर-घर अलख जगानी हैं, जान हथेली पर रखकर हमको गाय बचानी हैं’’ सुनाकर गौ माता के प्रति आदर भाव जगाया।

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