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घने में भी कुत्तों का आतंक... रोजाना कर रहे सांभर और चीतलों का शिकार, वन्य जीवों के आंकड़ों पर उठे सवाल

Bharatpur News - केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान (घना) में कुत्ते बेलगाम हो गए हैं, क्योंकि कुत्तों को पकड़ने के लिए लंबे समय से...

Feb 15, 2020, 07:31 AM IST
Bharatpur News - rajasthan news terror of dogs even in the dense sambhar and cheetahs are being hunted daily questions raised on wildlife figures

केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान (घना) में कुत्ते बेलगाम हो गए हैं, क्योंकि कुत्तों को पकड़ने के लिए लंबे समय से कोई अभियान नहीं चलाया गया है। कुत्ते खासकर चीतलों और सांभरों की जान के दुश्मन बन गए हैं। खासकर छोटे बच्चों के। हाल ये हैं कि शिकारी बन चुके ये कुत्ते अब घने जंगल में ही नहीं, बल्कि सड़क और पगडंडियों के सहारे भी चीतलाें का शिकार कर रहे हैं। ऐसे फोटो सैलानियों ने भास्कर को मुहैया कराए हैं जो काफी वीभत्स हैं।

इसे अधिकारी स्वीकारते भी हैं। डीएफओ मोहित गुप्ता ने माना कि आसपास के ग्रामीण इलाकों से कुत्ते आ जाते हैं, लेकिन चीतलों के शिकार करने की बात से इनकार कर दिया। बल्कि दावा किया कि चीतलों की संख्या बढ़ रही है। लेकिन इस संख्या पर वन्य जीवन और घना से जुड़े लोग सवाल खड़ा करते रहे हैं। जानकार कहते हैं कि यह बिलकुल सरिस्का के बाघों जैसा है। क्योंकि गणना करने वाले और आंकड़ों को सार्वजनिक करने वाले भी घना के ही कर्मचारी हैं। इसलिए वन्य जीवों की गणना सिर्फ आंकड़ों का खेल है। कभी भी प्रबंधन गणना के तुरंत बाद आंकड़ों को सार्वजनिक नहीं करता। मुख्यालय से मंजूरी के नाम पर काफी समय बाद जारी किया जाता है। जैसे कि हाल ही में 24 जनवरी को हुई जलीय पक्षियों की गणना। इसके आंकड़े अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। केवलादेव नेचरलिस्ट सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत मुदगल का भी मानना है कि घना में कुत्ते और बंदर बड़ी समस्या बन गए हैं। यह रोजाना चीतल का शिकार कर रहे हैं। कुत्तों के कारण ही करीब 10 साल पहले कृष्णमृग खत्म हो गए, जबकि इनकी संख्या कभी 200-250 हुआ करती थी। सांभर भी कम होते जा रहे हैं। इसी प्रकार बंदर भी वन्य जीवन को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं। घना की भलाई के लिए जरूरी है कि कुत्तों और बंदरों को रोका जाए।

उद्यान में कुत्तों के कई समूह सक्रिय

केवलादेव राष्ट्रीय पक्षी उद्यान में आधा दर्जन से अधिक कुत्तों के समूह सक्रिय हैं, जो चीतल और सांभरों का शिकार कर लेते हैं। कुत्तों की संख्या 20 से अधिक बताई जाती है। यह समूह नील गाय जैसे दमखम वाले वन्य जीवों का भी शिकार करने की कोशिश कर चुके हैं। ऐसे फोटोग्राफ भी भास्कर के पास मौजूद हैं, जिनमें नील गाय कुत्तों से बचने के लिए दौड़ रही हैं। यह कुत्ते आसपास के गांवों से नरेगा श्रमिकों के साथ घना में आ जाते हैं। और अनेक बार यही रह जाते हैं।

एक साल से नहीं चला कुत्ते पकड़ने का अभियान, शहर में भी लोग हो रहे शिकार

घना में चीतल और सांभरों की संख्या



कम हो रहे सांभर, क्या शिकार हो रहे: सैलानियों द्वारा सांभर कम दिखने की शिकायत की जाती रही हैं। सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या कुत्तों ने सांभरों का शिकार कर लिया। घना के वन्य जीवन गणना के मुताबिक सांभरों की संख्या करीब 40 हैं। किंतु जानकार मानते हैं कि हकीकत में इनकी 8-10 के करीब हैं। ज्ञात रहे कि सांभर और चीतल नाजुक वन्य जीव हैं, जिन्हें कुत्तों का समूह आसानी से शिकार बना लेते हैं।


भरतपुर. घना के बाहर चीतल का शिकार करता आवारा कुत्ता।

भरतपुर. घना की झीलों के पास चीतल का शिकार करते आवारा कुत्ते।

वर्ष चीतल सांभर

2017 2692 47

2018 3393 40

2019 3560 41

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