खजला पसंद करने वालों की संख्या बढ़ी, 1 करोड़ का खजला खा जाते हैं शहरवासी

Bharatpur News - नुमाइश की खास मिठाई खजले के पसंद करने वालों की संख्या हर बार बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार भरतपुर वासी करीब एक...

Oct 13, 2019, 07:25 AM IST
नुमाइश की खास मिठाई खजले के पसंद करने वालों की संख्या हर बार बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार भरतपुर वासी करीब एक करोड़ रुपए से अधिक का खजला खा जाते हैं। नुमाइश मैदान में लग रहे मेले का नाम आते ही खजला का नाम अपने आप ही मुंह पर आ जाता है। यह 100 साल से पूर्व की मिठाई है। इसे सबसे पहले उत्तरप्रदेश के खुर्जा में बनाया था। वहां से धीरे-धीरे यह यूपी के अन्य जिलों में बनाए जाने लगा और बाद में यूपी से बाहर करीब आधा दर्जन प्रदेशों में पसंद किए जाने लगा।

खजला व्यापारी सुभाष चंद गुप्ता बताते हैं कि इसकी उपलब्धता केवल 20 से 25 दिन ही होती है। यह मिठाई हाथों-हाथ ही तैयार की जाती है इसके बावजूद ग्राहक इसे टेस्ट करके भी खरीदते हैं। चूंकि मेले में बड़ी संख्या में दुकानें मौजूद रहती है ग्राहक आसानी से दूसरी दुकान पर जा सकता है। खजला को पसंद करने का एक कारण इसका सस्ता होना भी है। सामान्य मिठाइयां बाजार में 300 से 700 रुपए प्रति किलो तक मिलती हैं, लेकिन खजला 100 से 300 रुपए प्रति किलो के हिसाब से मिल जाता है। यह चार तरीके का होता है जैसे ज्यादा मीठा, कम मीठा, नमकीन, खोआ वाला खजला। खजला बनाने में खासकर मैदा, चीनी, घी, रिफाइंड, दूध और खोवा का उपयोग किया जाता है। सबसे पहले मैदा को गूथा जाता है उसके बाद उसकी लोई बनाकर तेल में तला जाता है और सबसे आखिर में चासनी में भिगाया जाता है। अनुमान के अनुसार मेले में एक करोड़ से अधिक का व्यापार होता है। खजला व्यापारी मोहन सिंह ने बताया कि मेले में अलग-अलग फर्मों के करीब 55-60 काउंटर लगते हैं। सभी काउंटरों के पास कुर्सी-टेबल भी लगे होते हैं ताकि ग्राहक तसल्ली से खजला खा सके। काउंटर सुबह 7 बजे से लेकर रात 1 बजे तक खुले रहते है। भरतपुर की नुमाइश में आने वाले इस खजले की आसपास के शहरों में भी काफी डिमांड रहती है।

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