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जिंदल अस्पताल में हंगामा, रोगी को मृत्यु के बाद भी 12 घंटे वेंटीलेटर पर रखने का आरोप

एक वर्ष पहले
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श्यामा प्रसाद मुखर्जी नगर स्थित जिंदल अस्पताल में रोगी की मौत को लेकर शनिवार को बखेड़ा खड़ा हो गया। मृतक के घरवालों का आरोप है कि मृत्यु होने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने रोगी को 12 घंटे तक वेंटिलेटर पर रखा ताकि ज्यादा बिल वसूला जा सके। इसी बात को लेकर उन्होंने हॉस्पीटल के गेट पर धरना दिया। वहीं जिंदल हॉस्पिटल ने परिजनों के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि रोगी की हालत पहले से काफी गंभीर थी। जब स्थिति काबू नहीं हुई तो उसे रैफर किया गया। रास्ते में देरी होने की वजह से मृत्यु हुई।

कोतवाली में दर्ज कराई रिपोर्ट में कौंरेर निवासी केदार सिंह ने आरोप लगाया है कि उसके 29 वर्षीय पुत्र कप्तान सिंह को दस्त व उल्टी के कारण 5 मार्च को जिंदल हॉस्पीटल में भर्ती कराया था। जिसे डा. लोकेश जिंदल ने आईसीयू में दाखिल कर लिया। अगले दिन डा. लोकेश ने कहा कि आपके मरीज की स्थिति ठीक नहीं है। आप तुरंत उसे जयपुर ले जाओ। तब तक इलाज और एंबुलेंस के नाम पर उनसे 80 हजार रुपए वसूले जा चुके थे। जब कप्तान सिंह के शरीर में कोई हरकत नहीं दिखी तो उन्होंने डॉक्टर से कहा कि रोगी की स्थिति सही नहीं दिख रही है। इस पर डॉक्टर ने कहा कि इसे तुरंत जयपुर ले जाओ। जब वे कप्तान सिंह को लेकर महात्मा गांधी हॉस्पीटल जयपुर पहुंचे तो वहां डाक्टरों ने कहा कि इसकी मृत्यु करीब 10 घंटे पहले हो चुकी है। वे उसे एसएमएस अस्पताल भी ले गए। लेकिन, वहां से उपचार पत्र देकर लौटा दिया और पोस्टमार्टम भी नहीं किया गया। अज्ञानतावश उन्होंने 7 मार्च को गांव में कप्तान सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया। आज शनिवार को जब गांव वाले डाक्टर से मुआवजे की बात करने गए तो वहां बुजुर्गों से बदतमीजी की गई। धरने पर बैठने वालों में किसान नेता नेम सिंह फौजदार, एमएसजे कालेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष आशीष फौजदार, सुखवीर सिनसिनी, सुनील कौंरेर, जगवीर सिंह सरपंच कौंरेर, वीरेंद्र सिंह, वेदवीर पहलवान, भूरा सिंह, तेजवीर सिंह और मृतक के माता-पिता शामिल थे।

मरीज की हालत काफी गंभीर थी, सभी आरोप झूठे हैं: जिंदल

भर्ती करने के बाद काफी कोशिश करके हम मरीज को 24 घंटे ही जिंदा रख पाए। परिजनों से कहा गया था कि वे मरीज को मथुरा स्थित नयति अस्पताल ले जाएं। लेकिन, वे उसे काफी दूर जयपुर के महात्मा गंाधी अस्पताल ले गए। वहां हमारे नर्सिंग स्टाफ के सामने रोगी का 3-4 घंटे पहले मरना बताया था। एम्बुलेंस ड्राइवर मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए एसएमएस अस्पताल छोड़कर आ गया था। लेकिन, अब पता चला कि परिजनों ने उसका पोस्टमार्टम ही नहीं कराया। शनिवार को वे लोग पैसे मांगने आए और फिर धरने पर बैठ गए। उनके सभी आरोप झूठे हैं। वेंटीलेटर के लिए 24 घंटे का चार्ज लिया जाता है। हम 10-12 घंटे मुर्दे को वेंटीलेटर पर क्यों रखेंगे? उनके सभी आरोप झूठे हैं।

डाॅ. लोकेश जिंदल,

संचालक, जिंदल हॉस्पीटल

चुके थे। जब कप्तान सिंह के शरीर में कोई हरकत नहीं दिखी तो उन्होंने डॉक्टर से कहा कि रोगी की स्थिति सही नहीं दिख रही है। इस पर डॉक्टर ने कहा कि इसे तुरंत जयपुर ले जाओ। जब वे कप्तान सिंह को लेकर महात्मा गांधी हॉस्पीटल जयपुर पहुंचे तो वहां डाक्टरों ने कहा कि इसकी मृत्यु करीब 10 घंटे पहले हो चुकी है। वे उसे एसएमएस अस्पताल भी ले गए। लेकिन, वहां से उपचार पत्र देकर लौटा दिया और पोस्टमार्टम भी नहीं किया गया। अज्ञानतावश उन्होंने 7 मार्च को गांव में कप्तान सिंह का अंतिम संस्कार कर दिया। आज शनिवार को जब गांव वाले डाक्टर से मुआवजे की बात करने गए तो वहां बुजुर्गों से बदतमीजी की गई। धरने पर बैठने वालों में किसान नेता नेम सिंह फौजदार, एमएसजे कालेज छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष आशीष फौजदार, सुखवीर सिनसिनी, सुनील कौंरेर, जगवीर सिंह सरपंच कौंरेर, वीरेंद्र सिंह, वेदवीर पहलवान, भूरा सिंह, तेजवीर सिंह और मृतक के माता-पिता शामिल थे।

भरतपुर. हॉस्पीटल के बाहर धरना देते हुए ग्रामीण।
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