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मंदिर सेवायतों ने तोडफ़ोड़ के विरोध में दूसरे दिन भी नहीं खोले गिरिराज जी के मंदिर

3 वर्ष पहले
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देर रात तहसील प्रशासन, मंदिर प्रबंधन और प्रशासन के बीच मंदिर खुलने का हुआ निर्णय
आज सुबह मंगला दर्शन के लिए मंदिर खुलेगा

गोवर्धन| ब्रज के हृदय स्थल गिरिराज धाम में बुधवार को हुई प्रशासनिक कार्यवाही के विरोध मे गुरूवार को भी मुख्य दानघाटी मंदिर सहित अन्य चार मंदिरों के पट बंद रहे। लगातार दो दिन से गिरिराज जी के मंदिरों में श्रद्धालु न तो मंगला आरती के दर्शन कर पा रहे हैं और न ही दूध-भोग चढ़ा पा रहे हैं। श्रद्धालु गिरिराज जी की श्रीकृष्ण के स्वरूप की छवि को भी नहीं निहार पा रहे है। बता दे कि बुधवार को प्रशासन ने मुख्य दानघाटी मंदिर के आरती स्थल के पक्के निर्माण को एन जी टी के आदेश पर अतिक्रमण मानकर तोड़ दिया। मंदिर प्रबंधन व सेवायतों का आरोप है कि न तो इस विषय मे मंदिर प्रशासन को कोई नोटिस ही दिया और न ही न्याय के पर्याय अवसर प्रदान करने के मौलिक अधिकार का ही प्रयोग किया गया। प्रशासन ने इसके साथ लगे अन्य दुकान व मकान के निर्माण को तोड़ दिया। प्रशासन ने मा. एनजीटी न्यायालय का हवाला देकर कार्यवाही की बात कही। लेकिन प्रशासन की कार्यवाही सेवायतों को नागवार गुजरी। तोड़फोड़ के दिन जमकर विरोध हुआ। विरोध होने पर प्रशासन ने पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के इंतजामात के साथ निर्माण को धराशाई करा दिया। सेवायतों ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली बात बताया और गिरिराज जी के पट बंद कर दिये। बुधवार को शुरू हुआ विरोध गुरूवार को भी नहीं थमा। सेवायतों ने टूटे आरती स्थल पर ही धरना प्रदर्शन किया। रालोद के नेता कुंवर नरेन्द्र सिंह पहुंचने पर सेवायतों ने योगी, मोदी व एनजीटी के खिलाफ नारे लगाए। विरोध प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे रालोद नेता कुंवर नरेन्द्र सिंह ने कहा कि एक ओर सरकार राम मंदिर बनाने की बात कर रही है दूसरी ओर कृष्ण के मंदिरों को तुड़वा रही है। सेवायतों की परंपरागत रोजी-रोटी छीनी जा रही है। शासन-प्रशासन ने अब तक वर्षों पुराने सैकड़ों धर्म स्थलों, मंदिरों, आश्रमों व गौशालाओं को तोड़ दिया। ये लोग किसी परिवार को दुख-दर्द नहीं समझ सकते हैं। प्रशासन को बैकफुट पर आना पड़ेगा। गिरिराज जी की आरती बंद करा दी। सेवायत जितेन्द्र पुरोहित व संदीप कौशिक ने बताया कि अभी विरोध शुरू हुआ है। विरोध लखनऊ व दिल्ली तक होगा। एस डी एम गोवर्धन ने बगैर कानूनी प्रक्रिया अपनाए ही ध्वस्तीकरण की कार्यवाही कर दी है। जिस स्थल को तोड़ा गया है वहां से गिरिराज पर्वत की 11 आरतियां प्रतिदिन शाम को होती रही है। वही प्रबंधक डालचंद ने बताया कि जिस स्थल को तोड़ा गया है वह मंदिर समिति द्वारा वर्ष 1976 मे खरीदा था। तथा नगर क्षेत्र समिति गोवर्धन के तत्कालीन प्रशासक एस डी एम के हस्ताक्षर से वर्ष 1976 का निर्माण का मानचित्र भी स्वीकृत है। आरोप लगाया कि एस डी एम गोवर्धन ने इन सभी साक्षो को दरकिनार करते हुए कार्यवाही की है। बता दे कि गिरिराज धाम में गोवर्धन दसविसा, बड़ा बाजार, पुरोहित पायसा, खेरा मोहल्ला, आन्यौर, जतीपुरा में मिलाकर पांच हजार सेवायत परिवार है।

वही देर रात उच्चस्तरीय दबाव के चलते मंदिर खुलवाने को एस डी एम गोवर्धन व सी ओ गोवर्धन मय तहसीलदार मंदिर पर पहुंचे। तथा दोनों पक्षों मे वार्ता के बाद श्रद्धालुओं के हित मे शुक्रवार आज सुबह मंगला दर्शन से मंदिर के पट खोलने का निर्णय लिया। मंदिर प्रबंधक डालचंद ने बताया कि श्रद्धालुओं की भावनाओं के दृष्टिगत मंदिर खोलने का निर्णय लिया गया है। एस डी एम गोवर्धन ने उनको अग्रिम तारीख तक कोई तोडफ़ोड़ न करने का आश्वासन दिया है।

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