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खेतों में खड़ी फसल को खराब कर रहे हंै आवारा पशु और जानवर / खेतों में खड़ी फसल को खराब कर रहे हंै आवारा पशु और जानवर

Bhaskar News Network

Dec 09, 2018, 04:55 AM IST

Bharatpur News - भरतपुर जिले को सरसों उत्पादन के क्षेत्र में सबसे अग्रणी जिला माना जाता है, लेकिन आज बदलते हालातों ने इस क्षेत्र के...

Rudawal News - the cattle and animals that are spoiling the standing crop in the fields
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भरतपुर जिले को सरसों उत्पादन के क्षेत्र में सबसे अग्रणी जिला माना जाता है, लेकिन आज बदलते हालातों ने इस क्षेत्र के किसानों को खेती करना मुश्किल में कर दिया है। इसका मुख्य कारण घटता भूमिगत जलस्तर एवं सिंचाई की व्यवस्था नहीं होना। इसके साथ आवारा गाय, सूअर एवं जंगली गायें सबसे बड़ी समस्या बनी हुई है। किसान दिनरात मेहनत व पानी की जुगाड़ करके खेतों की सिंचाई कर फसल तैयार कर रहे हैं, लेकिन आवारा जानवर खेतों में घुसकर फसल को नष्ट कर रहे हैं जिससे किसानों को दिन-रात खेतों पर रहकर रखवाली करनी पड़ रही है। आवारा पशुओं व जानवरों के चलते कस्बे से सटे खेतों की स्थिति अधिक खराब है। इन खेतों के मालिक खड़ी फसल में पशुओं के चरने व खराब करने के कारण होने वाले नुकसान के कारण रखवाली से तंग आकर इन खेतों को बंजर रखना ही मुनासिब समझ रहे हैं। जंगली जानवरों ने किसानों की फसल को नष्ट करके उनको बेरोजगार होने पर मजबूर कर दिया है। किसानों ने मांग की है कि गायों को प्रशासन की तरफ से गौशाला में छोड़ना चाहिए। जिससे किसानों को गायों के आंतक से छुटकारा मिल सकें।

रुदावल. खेत में खड़ी फसल को खराब करते जंगली पशु।

मेहनत के बाद भी नहीं मिलती कीमत-

किसान मोहरसिंह, चरनसिंह, लाखनसिंह, जगतसिंह का कहना है कि साल की दोनों फसलों के लिए इस क्षेत्र की जमीन काफी उपजाऊ मानी जाती है। इस क्षेत्र में करीब दो दशक पूर्व तक मटर, सौंफ, ईख की पैदावार भी खूब होती थी, लेकिन क्षेत्र में कम बारिश एवं पांचना बांध बनने के बाद गंभीर व कुकंद नदी में पानी की आवक बंद होने के बाद गिरते जलस्तर के साथ क्षेत्र में बढ़ते आवारा पशुओं की भरमार ने पैदावार करना मुश्किल भरा बना दिया है। खेत बुवाई से लेकर कटाई तक में मानव श्रम की बढ़ती महंगाई के कारण किसान को लागत की भी वसूली नहीं हो पाती है और पूरी साल गर्मी व सर्दी में मेहनत करनी पड़ती है सो अलग है। किसानों का कहना है कि एक बीघा जमीन में मेहनत व लागत के बाद एक सीजन में मुश्किल से पांच से सात हजार रुपए ही मिल पाते हैं इससे अच्छा तो खेत को किराए पर देना अच्छा है। फसल अच्छी हो या खराब खेत मालिक को अपना तय किराया तो मिल ही जाता है।

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