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मेरा नाम बम है, यही तो मुझे गम है...

भवानीमंडी. कवि सम्मेलन में काव्यपाठ करते प्रतापसिंह फौजदार।

Danik Bhaskar | Feb 12, 2018, 02:05 AM IST
भवानीमंडी. कवि सम्मेलन में काव्यपाठ करते प्रतापसिंह फौजदार।


भवानीमंडी. कवि जानी बैरागी ने काव्य पाठ में हास्य व्यंग्य के बीच आतंकवाद पर गहरी बातें कह गए। उन्होंने आतंकवाद पर बम की पीड़ा सुनाई कि मेरा नाम बम है, यही तो मुझे गम है। जब भी फटा हूं, अपनी नजर में उतना ही घटा हूं।

कब बिस्मिल (आजादी की लड़ाई में असेंबली में बम फोड़कर अंग्रेज सरकार को जगाने वाले) से हिजबुल (कश्मीरी आतंकवादी संगठन) के हाथ में आ गया पता ही नहीं चला। गांधी मंच पर संपन्न हुए इस कवि सम्मेलन का हालांकि पैनल बहुत छोटा था। उसमें गजल गायिका अंजमुन रहबर और वीर रस के कवि अर्जुन सिसोदिया का रात करीब डेढ़ बजे नंबर आया, इसके पहले ही कई श्रोता चले गए। अंजुमन रहबर ने सुनाया मजबूरियों के नाम पर सब छोड़ना पड़ा। दिल लड़ाना कठिन था मगर लड़ाना पड़ा। मेरी पसंद और थी, सबकी पसंद और थी, इतनी जरा सी बात पर बस घर छोड़ना पड़ा। प्रतापसिंह फौजदार ने अपनी चुटीले व्यंग्य छोड़े। वीर रस के कवि अर्जुन सिसोदिया ने सुनाया-राष्ट्र कलंकी हो नहीं सकता...भगवा आतंकवादी हो नहीं सकता। कवि अब्दुल अयुब गौरी ने आतंकवाद पर सुनाया, कमबख्तो इस्लाम को बदनाम मत करो। शुरूआती कवि राशि पटेरिया और संदीप शर्मा तथा और कानू पंडित ने भी काव्य पाठ किया। रात करीब 10.30 बजे शुरू हुआ यह कवि सम्मेलन देररात करीब साढ़े तीन बजे तक चला।