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गेहूं को कीड़ों से बचाने को एफसीआई गोदाम में दवा की जगह पानी का छिड़काव

भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में पड़े गेहूं को सुरक्षित रखने में तो अनियमितता की जा रही है, लेकिन निगम की यह...

Dainik Bhaskar

Mar 04, 2018, 02:05 AM IST
गेहूं को कीड़ों से बचाने को एफसीआई गोदाम में दवा की जगह पानी का छिड़काव
भारतीय खाद्य निगम के गोदामों में पड़े गेहूं को सुरक्षित रखने में तो अनियमितता की जा रही है, लेकिन निगम की यह अनियमितता राशन डीलरों पर भारी पड़ रही है। उनके पास भीगा हुआ गेहूं भेजा जा रहा है। भीगा हुआ गेहूं मिलने से डीलरों को प्रति बोरी तीन से चार किलो व ट्रक पर 2 से 3 क्विंटल का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसकी शिकायत डीलरों ने ज्ञापन के माध्यम से कलेक्टर को की है।

डग-भवानीमंडी मार्ग पर गुराड़िया स्थित भारतीय खाद्य़ निगम के गोदाम में रखे गेहूं को कीड़ों से बचाने के लिए दवाइयों व स्प्रे की जगह पानी का छिड़काव किया जा रहा है। यह छिड़काव भी तब किया जाता है जब गेहूं को गोदाम से बाहर भेजा जाना होता है, उसके कुछ घंटों पहले निगम के कर्मचारी पाइप लगाकर गेहूं को भिगा रहे हैं। उनकी यह कारस्तानी राशन डीलरों को नुकसान पहुंचा रही है। डीलरों ने कलेक्टर को दिए ज्ञापन में बताया कि उनको भीगा हुआ गेहूं दिया जा रहा है। भीगा गेहूं मिलने से तौल में अंतर आ रहा है। भीगने पर प्रति बोरी तीन से चार किलो का अंतर आ रहा है। गेहूं कम मिलने पर कई उपभोक्ता राशन से वंचित रह जाते हैं।

भीगने से प्रति बोरी 3 से 4 किलो बढ़ जाता है वजन

झालावाड़. गोदाम में गेहूं को कीड़े से बचाने के लिए पानी का छिड़काव करता कर्मचारी।

तौल कांटे की नहीं हुई जांच

इससे पूर्व भी गेहूं कम मिलने पर डीलरों ने खाद्य विभाग के आयुक्त व कलेक्टर को ज्ञापन देकर तौल कांटे की जांच कराने की मांग की थी। इस पर कलेक्टर ने रसद विभाग को जांच कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन विभाग ने अभी तक इसकी जांच नहीं कराई है। डीलरों का दावा है कि चार महीनों से उनको कम गेहूं मिल रहा है और यह तौल की गड़बड़ी के कारण मिल रहा है।

सार-संभाल को लेकर मॉनिटरिंग नहीं

निगम के कर्मचारी गेहूं की सार संभाल कैसे कर रहे है। इस पर निगम अधिकारियों का ध्यान नहीं है। गोदामों का समय-समय पर निरीक्षण नहीं किया जा रहा है। इससे लगता है कि गेहूं को बचाने के लिए कर्मचारियों के पास दवाइयां व स्प्रे भी मौजूद नहीं है। इससे कर्मचारी दवाइयों की जगह पानी डालकर गेहूं का बचाने का प्रयास कर रहे हैं। गुराड़िया स्थित भारतीय खाद्य निगम के गोदाम में पानी डालकर गेहूं की देखभाल की जा रही है।

डीलरों ने बताया कि गोदाम से गेहूं निकलने से पूर्व यानी कुछ घंटों पहले उस पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है। कई बार तो गेहूं को इतना गीला कर दिया जाता है कि डीलर के पास पहुंचने पर भी बोरी गीली होती है। निगम द्वारा 50 किलो प्रति बोरी के हिसाब से गेहूं तुलाई की जाती है। भीगने के बाद 50 किलो की बोरी का वजन 53 किलो बैठता है और उसी के हिसाब से भुगतान कर दिया जाता है। बाद में डीलर के गोदाम में पहुंचने के बाद जब वितरण प्रारंभ किया जाता है तो बोरी में 53 की जगह 50 किलो ही गेहूं निकलता है।

आधा पखवाड़ा निकलने के बाद आती है सामग्री

डीलरों ने ज्ञापन में राशन की सप्लाई देरी से होने की भी जानकारी कलेक्टर को दी है। उन्होंने कहा कि माह की 10 तारीख से उपभोक्ता पखवाड़ा शुरू होता है। इसके पहले राशन डीलरों के पास सामग्री पहुंचना चाहिए, लेकिन चार महीनों से आधा पखवाड़ा निकल जाता है तब तक सामग्री डीलरों के पास नहीं पहुंच रही है।



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