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एमपी की भावांतर योजना से राजस्थान में 50 प्रतिशत तक आवक कम

मध्यप्रदेश की भावांतर योजना का भवानीमंडी की कृषिमंडी पर जबरदस्त असर पड़ा है। होली पर फसलों की भरपूर आवक रहती आई है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 02:20 AM IST

मध्यप्रदेश की भावांतर योजना का भवानीमंडी की कृषिमंडी पर जबरदस्त असर पड़ा है। होली पर फसलों की भरपूर आवक रहती आई है।

इस समय कृषिमंडी में एवरेज 10 से 12 हजार बोरी की आवक रहती। लेकिन इस साल यह आवक 6 से 7 हजार बोरी तक सिमट कर रह गई है। भवानीमंडी व इसकी गौण मंडियों में एमपी क्षेत्र से काफी मात्रा में जिंस बिकने आती रही है। लेकिन वहां पर इस साल से सरकारी समर्थन मूल्य की भावांतर योजना लागू कर दी गई। इस साल चना, मसूर, सरसों आदि को भावांतर योजना में लिया हुआ है। यह सारी ही जिंस वहां से यहां आने से रुक गई है। जिसका स्थानीय कृषिमंडी की आवक पर जोरदार असर हुआ है। व्यापारी गोविंद गुप्ता ने बताया कि भवानीमंडी की मंडी तो पूरी तरह डिपेंड ही एमपी क्षेत्र पर है। एमपी की भावांतर योजना की वजह से वहां के किसानों ने अपनी जिंस को वहीं पर रोक लिया है। व्यापारी संतोष गुप्ता मामा आदि ने बताया कि इस समय तक कृषिमंडी में औसत 10 से 12 हजार बोरी रोज की आवक हो जाती, लेकिन अभी चार से पांच हजार तक बोरी की आवक रह गई है।

भवानीमंडी का बिल एमपी में मान्य नहीं

व्यापारी व गुराड़ियाजोगा सरपंच भरतसिंह ने एमपी की भावांतर योजना को अच्छा बताते हुए कहा कि इसमें केवल एमपी में चिन्हित कृषिमंडी में ही जिंस बिक्री पर लाभ मिलता है। राजस्थान की भवानीमंडी की कृषिमंडी का बिल वहां पर मान्य नहीं है। जिससे एमपी की जिंस यहां नहीं आ रही है। भावांतर योजना का यहां पर आवक में फर्क पड़ा हैं।

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Web Title: एमपी की भावांतर योजना से राजस्थान में 50 प्रतिशत तक आवक कम
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