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मंदिर माफी जमीन मामले में फिर से रेफरेंस भेजा

किसी के खाते नहीं बांधी जा सकने वाली मंदिर माफी की 94 बीघा जमीन को निजी खाते में बांधने के मामले में बड़ी सफाई से इसके...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 29, 2018, 02:20 AM IST

किसी के खाते नहीं बांधी जा सकने वाली मंदिर माफी की 94 बीघा जमीन को निजी खाते में बांधने के मामले में बड़ी सफाई से इसके दोषियों को बचा लिया गया है। पूरे मामले में रिकाॅर्ड में हेरफेर करने वाले और नामांतरण खोलने में लापरवाही बरतने वाले दोषियों के खिलाफ जांच करवाने से सब बच गए हैं।

एसडीएम राकेश मीणा ने हाल ही इस मामले में तहसीलदार मनमोहन गुप्ता को नोटिस देकर उनसे पचपहाड़ स्थित इस जमीन को निजी खाते में बांधने और फिर तीन अन्य के नाम करीब 8.15 बिस्वा जमीन की रजिस्ट्री कर उनके नाम नामांतरण खोलने के मामले में जवाब मांगकर पूरे मामले को चर्चा में ला दिया था। जिसमें बताया गया था कि किस तरह मंदिर माफी की इस जमीन को निजी खाते में बांधा गया और 1984 में इसका पता चलने पर इसका रेफरेंस (जमीन को वापस मंदिर खाते बांधने के बारे में तथ्यात्मक रिपोर्ट )बनाकर कलेक्टर को भेजा गया था, लेकिन बाद के रिकाॅर्ड में से यह रेफरेंस गायब हो गया था। गत वर्ष फरवरी माह में इसमें से करीब 8.15 बिस्वा जमीन तीन निजी क्रेताओं को बेचकर रजिस्ट्री करवा दी गई। इनके नाम एक ही दिन मेें नामांतरण भी खोल दिए।

लापरवाही:गलती का पता चलने में 9 माह लग गए:तहसील कार्यालय को इस गलती का पता चलने में एक-दो नहीं पूरे 9 माह लग गए। रिकाॅर्ड खंगाला तो यह मंदिर माफी की जमीन निकली। इसमें दिशा-निर्देश मांगे गए। इसका जवाब नहीं आया तो फिर इसी जनवरी माह में एक और पत्र भेजा गया। अब इसी मामले में कलक्टर कार्यालय फिर से रेफरेंस बनाकर भेजकर जमीन को मंदिर खाते बांधने की मांग की है। इसमें सुनवाई होकर इसे अजमेर बोर्ड को भेजकर वहां से आदेश होंगे।

कई सवाल: जो मामले में पैदा करते हैं संशय:मामले में 1984 में रिकाॅर्ड में से रेफरेंस आॅर्डर कैसे गायब हुआ, इसकी जांच छोड़ दी गई। इसी तरह रजिस्ट्री तो वर्तमान रिकाॅर्ड देखकर की जाती है, लेकिन नामांतरण जांच के बाद ही खुलता है। कानूगो, पटवारी अपने इलाके की जमीन के गहरे जानकार होते हैं। यह जमीन मंदिर खाते की होने की बात इनकी निगाह में आने से कैसे चूक गई। उन्होंने एक दिन में जांच भी कर ली और तहसीलदार के आदेश से नामांतरण भी खोल दिया, लेकिन इतनी बड़ी चूक के मामले में किसी को दोषी नहीं माना गया। पूरा मामला, वापस रेफरेंस आॅर्डर मंगवाने पर समेट कर रख दिया गया है।

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