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इन्होंने कभी हार नहीं मानी, विपरीत हालातों में खुद को मजबूत किया..आज इनकी अलग पहचान

किसान की बेटी का मॉडल जापान में सराहा गया, अब पढ़ाई का खर्च सरकार उठा रही झालरापाटन निवासी काजल राठौर किसान...

Danik Bhaskar | Mar 08, 2018, 02:20 AM IST
किसान की बेटी का मॉडल जापान में सराहा गया, अब पढ़ाई का खर्च सरकार उठा रही

झालरापाटन निवासी काजल राठौर किसान गिरिराज सिंह की बेटी है। मामा के पास रहने के कारण छोटे से गांव मांटा श्यामपुरा स्कूल में पढ़ाई की। पूरी पढ़ाई सरकारी स्कूल में हुई। प्राइवेट स्कूल में पढ़ने की चाह थी, लेकिन मामा भी किसान थे। आर्थिक स्थिति का देखते गांव के ही स्कूल में पढ़ाई की। विज्ञान में अधिक रुचि होने के कारण भवानीमंडी में जिला स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका मिला। उसमें उनका मॉडल प्रथम रहा। इसके बाद उनका राज्य स्तर पर चयन हुआ। यहां अच्छे प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय स्तर पर और जापान में मॉडल प्रदर्शन का मौका मिला। वहां भी बालिका के मॉडल को सराहा गया। बालिका के इस मुकाम से सरकार ने उसे आईआईटी की तैयारी के लिए कोटा भेजा। अभी काजल कोटा में रहकर11 वीं कक्षा के साथ रेजोनेंस से कोचिंग ले रही है। इसका खर्चा सरकार उठा रही है।

5वीं पास सुगनबाई ने संतरे के खेत में प्याज उगाया, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित हुईं

रायपुर की दीत्याखेड़ी निवासी महिला किसान सुगनबाई महज पांचवीं कक्षा तक पढ़ी है, लेकिन खेती में नई तकनीकी अपनाकर मुनाफे का सौदा बना दिया। इसी के कारण उनकी पैदा हुई प्याज की सराहना देशभर में हुई। सराहना भी ऐसी हुई कि केंद्रीय कृषि मंत्री ने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। वह राज्य की पहली महिला है जिसे यह सम्मान मिला है। पति संतरे का बगीचा लगाते थे और अधिक मेहनत होती थी। इस पर उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह से एक एकड़ में प्याज की खेती की। जहां एक एकड़ में 10 से 12 हजार किलो प्याज होता था, वहां 20981 किलो प्याज पैदा किया। कीमत 10 की जगह 14 रुपए किलो बिका। इसी के लिए उन्हें सम्मान मिला।

विनय जैन|झालावाड़. कुछ कर गुजरने की चाहत हो और आत्मविश्वास प्रबल हो तो सब कुछ संभव है। इसी हौसले के चलते जिले की बेटियों ने भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी पहचान बनाई है। इस पहचान के लिए उनको अपने जीवन में काफी संघर्ष करना पड़ा। जीवन में आई परेशानियों और रुकावट को कभी अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। इसी के चलते अपने लक्ष्य को प्राप्त किया और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा की मिसाल बनी है। इन बेटियों ने भास्कर के साथ अपने संघर्ष पूर्ण जीवन के अनुभव बांटे और बेटियों को संदेश दिया कि उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। जरूरत है तो कुछ कर गुजरने की।

झालावाड़ की बेटी पहली महिला संतूर वादक, फर्स्ट लेडी अवार्ड पा चुकी वर्षा

झालावाड़ की बेटी डॉ. वर्षा अग्रवाल आज देश के अलावा विदेशों में अपनी कला व हुनर के कारण जानी जाती है। उनको देश की पहली महिला संतूर वादक होने का गौरव प्राप्त है। वर्तमान में वह शासकीय कन्या स्नातकोत्तर उत्कृष्ट कॉलेज उज्जैन की संगीत विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत है। उन्होंने 6 वर्ष की आयु से ही संतूर शिक्षा प्रारंभ की थी। इन्होंने भारत के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, मॉरिशस, ओमान, जॉर्डन, अम्मान, दक्षिण अफ्रीका, आयरलैंड सहित कई देशों में संतूर वाद्य यंत्र की प्रस्तुति दी। इससे पूर्व वह डागर घराना अवार्ड से भी सम्मानित हो चुकी है। अभी हाल ही में उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविद ने फ़र्स्ट लेडी अवार्ड से सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि महिला अपने आत्मविश्वास के बल पर हमेशा आगे बढ़ने की चाह रखे। फिर सब अपने आप मिलता चला जाएगा।

राजस्थान स्टेट वुशू चैंपियनशिप में समीक्षा ने 56 किलो वर्ग में गोल्ड मेडल जीता

झालावाड़ निवासी समीक्षा सिंह ने खेल के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने राजस्थान स्टेट वुशू चैंपियनशिप में समीक्षा ने 56 किलो वर्ग में गोल्ड मेडल जीता है। उसने यह कामयाबी 28 दिसंबर को दौसा में खेली गई प्रतियोगिता में हासिल की है। शानदार प्रदर्शन के कारण उनको राजस्थान टीम में चयन हुआ है। जो उड़ीसा में खेलने के लिए जाएगी। उन्होंने बताया कि स्कूल के पीटीआई जो वर्तमान में उनके कोच भी है सूरज गौतम से इस खेल की प्रेरणा मिली। वह सुबह-शाम प्रैक्टिस करती और दोपहर में पढ़ाई करती है। अभी वर्तमान में एसटी जोसेफ स्कूल से 10वीं बोर्ड की परीक्षा दे रही है। उन्होंने कहा कि उनकी तरह और लड़कियां भी खेल में अपनी पहचान बनाकर आगे बढ़ सकती है।

एमएससी गोल्ड मेडलिस्ट झालावाड़ की बेटी एमपी में अफसर के तौर पर लगी हैं

झालावाड़ की बेटी निकिता जैन आज मध्यप्रदेश में उद्यानिकी विभाग में सहायक संचालक के पद पर कार्यरत है। वे शुरू से पढ़ाई में नंबर वन रही। परिवार भी अच्छा होने से उच्च शिक्षा में कभी कोई परेशानी नहीं आई, लेकिन अपनी मेहनत में उन्होंने कोई कमी नहीं छोड़ी। उन्होंने स्नातक की डिग्री उद्यानिकी एवं वानिकी में 2010 में पूरी की। इसके बाद गुजरात विश्वविद्यालय से 2012 में एमएससी टॉप किया। इस पर उनको गोल्ड मेडल से गुजरात राज्यपाल ने सम्मानित किया गया। अब वर्तमान में वह मध्यप्रदेश में प्रशासनिक पद पर कार्यरत है। उन्होंने कहा कि उनकी मेहनत रंग लाई है। वह चाहती तो आईएएस बनना पर सब किस्मत पर छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि महिलाएं अपने आपको कमजोर नहीं समझे। दृढ़ इच्छा शक्ति से सब कुछ संभव है।

स्वयं के साथ दूसरी महिलाओं को भी आगे बढ़ाया, अब 300 को संभाल रही हंै ऐश्वर्या

असनावर में सरस्वती हथकरघा स्वयं सहायता समूह की व्यवस्थापक 22 वर्षीय ऐश्वर्या स्वयं तो आगे बढ़ी। साथ ही अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ाया। इस वर्ष बीए फाइनल किया। पढ़ाई के साथ कई महिलाओं को रोजगार भी दिलाया। ऐश्वर्या ने दिल्ली, भोपाल, जयपुर, रांची, गुवाहाटी में स्टॉल पर माल बेचा एवं अप्रैल में जबलपुर जाने की तैयारी कर रही है। पढ़ाई के साथ कई महिलाओं को रोजगार से जोड़कर रोजगार दिलाया। जिस संस्थान की वह व्यवस्थापक है उसमें 300 महिलाएं काम करती है। उन्होंने कहा कि महिलाएं व युवतियां अपने आपको कभी कमजोर नहीं समझे। बस हौसला बनाए रखे और मेहनत करते रहे। मंजिल अपने आप मिल जाती है।