• Hindi News
  • Rajasthan
  • Bhawani Mandi
  • 10 महिलाओं ने 1 हजार रुपए से शुरू किया हथकरघा उद्योग आज समूह से जुड़ी हैं 300 सदस्य, Rs.80 लाख का टर्नओवर
--Advertisement--

10 महिलाओं ने 1 हजार रुपए से शुरू किया हथकरघा उद्योग आज समूह से जुड़ी हैं 300 सदस्य, Rs.80 लाख का टर्नओवर

Bhawani Mandi News - शंभुदयाल शर्मा | झालावाड़/असनावर आज महिलाएं पुरुषों से किसी क्षेत्र में कम नहीं हंै। यह साबित किया है असनावर...

Dainik Bhaskar

Mar 08, 2018, 02:20 AM IST
10 महिलाओं ने 1 हजार रुपए से शुरू किया हथकरघा उद्योग आज समूह से जुड़ी हैं 300 सदस्य, Rs.80 लाख का टर्नओवर
शंभुदयाल शर्मा | झालावाड़/असनावर

आज महिलाएं पुरुषों से किसी क्षेत्र में कम नहीं हंै। यह साबित किया है असनावर क्षेत्र की महिलाओं ने। इन महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह बनाकर परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारा। साथ ही खुद सशक्त बनीं। स्वयं सहायता समूह अब समिति में बदलकर हाथ करघा उद्योग चला रहा है। इस समिति का साल का टर्न ओवर 80 लाख रुपए हो गया है। इस समिति से जुड़ी हर महिला के पास आज काम है। अब तो महिलाएं घर पर कच्चा माल ले जाती है और तैयार करवाकर जमा कराती है। इससे उनके परिवार को संबल मिला है। महिलाओं में यह बदलाव स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद आया है। पहले वह केवल गृहिणी थी और कुछ महिलाएं खेती करती थी। महिलाओं ने अपनी आजीविका ही बदल दी महिलाओं ने अपने श्रम के दम पर घर की स्थिति एवं पारिवारिक स्थिति को ही बदल दिया। आज इन महिलाओं द्वारा तैयार किया गया माल देश के कौने-कौने में जा रहा है। इसके अलावा कई कंपनियों के ऑर्डर में समिति को मिल रहे हैं। कई कंपनियों का तो माल पूरा करके सप्लाई दे चुके है।

300 महिलाएं जुड़ी हैं समूह से:

सरस्वती हथकरघा स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष कमला देवी ने बताया कि 300 महिलाओं का समूह बना हुआ है, जिसमें अपने-अपने घर पर काम कर रही हैं और कई महिलाएं उद्योग मेले एवं बड़े-बड़े शहरों में जहां मेले लगते हैं वहां पर स्टाल लगा रखी है आजीविका चलाने के लिए महिलाओं ने समूह बनाकर लाखों रुपए का रोजगार खड़ा कर लिया है, घर पर ही बैठकर महिलाएं अपना अपना काम ईमानदारी से कर रही है। कई महिलाएं बुनाई व रंगाई फैक्ट्री पर काम करती। व्यवस्थापक ऐश्वर्या ने बताया कि यहां से बना हुआ माल जयपुर, मुंबई, भोपाल दिल्ली आदि कई शहरों में स्टाॅल लगाकर बेचा जा रहा है।

बादामबाई ने सामाजिक बुराई मिटाने को पंचों के खिलाफ बुलंद की आवाज

असनावर में सरस्वती हाथकरघा स्वयं सहायता समूह ने महिलाओं को स्वावलंबी बनाया

असनावर. सरस्वती हाथकरघा स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बेडशीट बनाती हुईं। यहां महिलाओं के कपड़े भी बनाए जाते हैं।

तत्कालीन उपराष्ट्रपति कर चुके सम्मानित

ट्राइब्स इंडिया की ओर से स्वयं सहायता समूह बनाकर उसको रोजगार से जोड़ने पर तत्कालीन उपराष्ट्रपति ने पुरस्कार देकर समूह को सम्मानित किया था।

ऐसे हुई थी शुरुआत: हाथ से चलने वाली मशीन खरीदी, मेलों में स्टॉल लगाई

सरस्वती हथकरघा स्वयं सहायता समूह 2002 में बना था। 10 महिलाओं के ग्रुप से स्वयं सहायता समूह की शुरुआत हुई थी। उस समय केवल 1 हजार रुपए एकत्र हुए थे। इससे कोई रोजगार शुरू नहीं हो सकता था। इसके बाद समूह में और महिलाओं को जोड़ा। 10 हजार रुपए एकत्र हुए। इससे कच्चा माल खरीदा। उसे बनाकर हाट बाजार में बेचा। ऐसे और महिलाएं जुड़ती गई। रुपए एकत्र होने पर हाथ से चलने वाली मशीन खरीदी। इससे रोजगार शुरू हुआ। माल को बाहर भेजा जाने लगा। प्रचार-प्रसार के लिए मेलों में प्रदर्शनी लगाई गई। इससे व्यापार बढ़ता गया। अब समिति द्वारा हर साल 80 लाख रुपए का माल बनाकर बेच दिया जाता है। आज 300 महिलाओं का समूह है।

इधर, महिला समूह ने खुद बनाया अपना बैंक, 2 रुपए सैकड़ा ब्याज पर कारोबार के लिए लेती हैं लोन

सामाजिक विकास संस्थान असनावर ने 2011 में स्वयं सहायता समूह की शुरुआत की। इससे वर्तमान में 25 समूह जुड़े हुए हैं। 100 रुपए प्रति महिला जमा करने वाली महिला आज 300 रुपए समूह में जमा कर रही हैं। इन समूह का करीब 4 लाख रुपए बैंक में जमा है। यह समूह से जुड़ी महिलाओं को 4 लाख रुपए तक लोन उपलब्ध करा सकता है। स्वयं सहायता समूह ने अब बैंक पर आश्रित होना बंद कर दिया है। अब महिलाएं अपने एकत्र रुपए पर समूह से 2 रुपए सैकड़ा के ब्याज पर लोन लेती हंै और उसे चुकाती है। इससे महिलाएं रोजगार से जुड़ी हंै। महिलाओं ने किराना दुकान डाल रखी है तो कोई दूध डेयरी खोलकर बैठी हुई हैं।

इस्लाम अहमद. अकलेरा| मोठपुरिया गांव की महिला बादाम बाई तंवर ने समाज में चली आ रही सामाजिक कुरीति के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए पिछले दिनों एक साहसिक कदम उठाया था। महिला ने फैसला करने वाले समाज के पंचों के विरुद्ध धमकी देकर रुपए वसूलने का मामला भालता थाने में पिछले दिनों दर्ज कराया था। पुलिस ने रिपोर्ट पर फैसला करने वाले 18 लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया था। मोठपुरिया निवासी बादाम बाई तंवर पति राधाकिशन ने 27 दिसंबर 2017 को दी रिपोर्ट में बताया था कि उसकी लड़की सुशीला बाई का विवाह ढाई साल पहले हरि सिंह निवासी महुआखोह के साथ हुआ था। जमाई हरिसिंह स्मैक पीने का आदी निकला। ससुराल पक्ष के जमाई व दादी शिवली बाई, ताऊ बंशीलाल लड़की नहीं भेजने पर झगड़े की राशि 7 लाख रुपए मांगने लगे। गांव के ही कुछ लोगों ने करीब 1 लाख रुपए नुकसान करने के बहाने हड़प लिए और 4 लाख 60 हजार रुपए 2018 में देना तय कर दिया। इससे घबरा कर उसका पति घर छोड़कर चला गया। इतनी बडी राशि अदा नहीं कर पाने के कारण उसने पंचों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया। इस कुप्रथा के कारण परिजनों को मजबूरन धमकी देकर रुपए देने के लिए मजबूर कर देते है। पीहर पक्ष के गांव में फसल पर नुकसान पहुंचाते है। जिसकी भरपाई उस पक्ष को करनी होती है और एक सामाजिक फैसला होता है। जिसको मानने के लिए बाध्य कर दिया जाता है। जिसके चलते कई बार पीड़ित पक्षों को अपनी जमीन गिरवी रखने अथवा बेचना पड़ जाता है। बादाम बाई का कहना है कि वह महिलाओं के अधिकारों के लिए हमेशा लड़ती रहेगी।

कपड़े बनाकर पूरे देश में सप्लाई करता है समूह

हथकरघा से बनाए कपड़े, बुनाई छपाई, रंगाई, हाथ वर्क, शिबोरी की साड़ी, लॉन्ग कोट सिलाई, जयपुरी रजाई एवं कोट जैकेट शर्ट कई तरह के कपड़े बनाकर राजस्थान सहित पूरे भारत में सप्लाई दी जा रही है।

रंग लाई मां की मेहनत

40 रुपए रोजाना कमाकर कंचनबाई ने बेटे को बनाया आईपीएस अफसर, आज भी जड़ से जुड़ी हैं ह

गिर्राज गुप्ता. भवानीमंडी| ढाई बीघा जमीन, इस से साल भर की महज 10 से 15 हजार की आय। दो छोटे बेटों और परिवार का लालन-पालन करने के लिए खेती की कमाई से काम नहीं चला तो 20 से 40 रुपए रोज में दूसरों के खेत में जाकर मजदूरी की, लेकिन अपने बेटों की पढ़ाई में कोई बाधा नहीं आने दी।

यह दास्तां है भवानीमंडी के गणेश मंदिर के पास निवासी कंचनबाई मीणा (65) की मीणा की। उनके पति नारायणलाल का 1992 में ही निधन हो गया था। तब बड़ा बेटा दिनेश 17 साल का और छोटा बेटा बलराम 14 साल का कक्षा 8वीं में पढ़ रहा था। बड़े भाई दिनेश ने बताया कि तब मां की मेहनत ही हमारे लालन-पालन और पढ़ाई का सहारा बनी। मैंने आरटीएम में नौकरी की। बलराम ने खुद भी खूब मेहनत की। ट्यूशन कोचिंग करके खर्च चलाया। बलराम अपनी पढ़ाई पूरी कर 2005 में केंद्र सरकार की सेवा में ट्रांसलेटर बन गया। बलराम ने 2012 में आईपीएस में सलेक्ट हुआ। वह इस पद पर पहुंचने वाला भवानीमंडी का पहला युवा बन गया।

बलराम की वर्तमान में गुजरात के राजकोट जिला एसपी पद पर पोस्टिंग है। मां कंचनबाई भी वहां हो आई है, लेकिन वे अपने पुराने दिन और रंग-ढंग नहीं भूली। बुधवार को जब यह संवाददाता उनके उसी पुराने खेत में पहुंचा तो वे वहां पशु्ओं के लिए चारा काटती मिल गई। वे खुद भी कहती है कि ऐसा नहीं है कि मेरे बेटा एसपी बन गया तो मुझे घमंड हो गया, मैं आज भी पहले जैसी ही हूं...।

आईपीएस बलराम

X
10 महिलाओं ने 1 हजार रुपए से शुरू किया हथकरघा उद्योग आज समूह से जुड़ी हैं 300 सदस्य, Rs.80 लाख का टर्नओवर
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..