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पहचान खो रहा बसंत मेला, पहले हजारों पशु बिकते थे, इस बार 265 बिके

नगरपालिका के तत्वावधान में मुख्य रूप से पशु बिक्री के लिए आयोजित बसंत मेले में अभी दुकानें पूरी तरह लगना भी शुरू...

Danik Bhaskar | Feb 03, 2018, 02:25 AM IST
नगरपालिका के तत्वावधान में मुख्य रूप से पशु बिक्री के लिए आयोजित बसंत मेले में अभी दुकानें पूरी तरह लगना भी शुरू नहीं हुईं थी कि शुक्रवार को चावड़ी काटी के साथ पशुओं की रवानगी शुरू हो गई। सभी तरह के 265 पशु बिके, जिनसे नगर पालिका को पशु चावड़ी की 12 हजार 635 रुपए की आय हुई। पशु कम आने से क्रेता व्यापारियों को पूरे पशु नहीं मिल सके।

इस कार्य में लगे पालिका कर्मियों ने बताया कि 1970 के दशक तक यह मेला अपने पूरे शबाब पर रहता था। 1980 तक भी इसमें 18 से 20 हजार तक पशु बिकने आते। मेला मैदान में पशु नहीं ठहर पाते तो वे फैलते हुए पड़ोस के एमपी के खाली मैदानों तक अपना पड़ाव डाल लेते। पशुओं पर निगरानी रखने के लिए नगर पालिका को आधा दर्जन स्थानों पर नाके लगाने पड़ते। पशु चावड़ी के दिन भी इतने ही काउंटर लगाने पड़ते थे। इसमें भी लाइन में लगे किसान पहले चावड़ी कटाने के चक्कर में लड़ पड़ते, लेकिन अब ये सब बीती बाते हो चली है। इस साल कहीं पर भी नाका लगाने की जरूरत नहीं पड़ी। चावड़ी काटने के लिए एक काउंटर लगाना पड़ा। उसमें भी वहां बैठा कार्यकर्ता पशु क्रेताओं के आने का इंतजार करता दिखा। मेला मैदान में भी बाकी दुकानों की स्थिति भी बदल चुकी है। अभी 24 से ज्यादा प्रकार की दुकानों के अलावा करीब आधा दर्जन झूले चकरी लगाई जा रही थी। दुकानों वाला मुख्य परिसर एक तरह से खाली ही पड़ा था। मेले का कार्यालयीन समापन भी 8 फरवरी को हो जाएगा। इसके बाद ही यहां पर दुकानें रंगत पर आने लगेगी। जिसके बाद शिवरात्रि तक यह मेला जमा रहेगा।

सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सिमटा

नगर पालिका के लिए जहां यह मेला घाटे का सौदा हो चला है, वहीं नागरिकों के लिए यह मेला केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम का अवसर भर बनकर रह गया है। इसमें बुधवार रात को राजस्थानी कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। अब 10 फरवरी की रात गांधी मंच पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन और 14 फरवरी को भजन संध्या होगी। इसी तरह मेला मैदान में 12 फरवरी को राजस्थानी वीणा वादन नाइट और 16 फरवरी को फिल्मी कलाकारों का रंगारंग कार्यक्रम होगा।

दुकानदार के साथ ही पशु विक्रेताओं ने मुहं फेरा बसंत मेले से

भवानीमंडी. मेले में घोड़े भी बिकने के लिए आए थे। लेकिन शुरुआत होने के साथ ही उन्हें ले जाया जा रहा।