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मंत्री के आदेश के बाद शुरू हुई तीन साल से अटकी ऋण वितरण अनियमितता की जांच

प्रशासन की ओर से अनियमितता के मामले को लटकाए रखने का एक मामला सामने आया है। अब इस मामले में सहकारिता एवं गोपालन...

Danik Bhaskar | Feb 03, 2018, 02:25 AM IST
प्रशासन की ओर से अनियमितता के मामले को लटकाए रखने का एक मामला सामने आया है। अब इस मामले में सहकारिता एवं गोपालन विभाग मंत्री के आदेश पर हाल ही वापस दायित्व निर्धारण जांच शुरू हो गई है। झालावाड़ केंद्रीय सहकारी बैंक में सत्र 2013-14 में 6 सहकारी समितियों के किसानों को उनकी खेती जमीन की पात्रता से ज्यादा का करीब पांच करोड़ रुपए का ऋण बांट दिया गया था।

ये समितियां हंै: गुढ़ा, मोगरा, कुंडीखेड़ा, गुराड़ियामाना, सरोद और सूलिया। प्रांरभिक जांच में किसानों को उनकी खेत के रकबे से अधिक ऋण देने और उसकी वसूली में व्यवधान आने की बात सामने आने के बाद तत्कालीन शाखा प्रबंधक कालूराम मेहर ने इस मामले के संबंधित शाखा प्रबंधक टीसी माहेश्वरी के खिलाफ पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज करा दी थी। जिस पर पुलिस ने एफआर लगाकर मामले को दबाने की कोशिश की थी, लेकिन मेहर ने अदालत में प्रतिवाद कर इसे वापस खुलवा दिया था।

दो बार जांच हुई थी लंबित

बैंक अनियमितता के इस मामले में दो बार पहले भी दायित्व निर्धारण जांच शुरू हो गई थी। लेकिन उसे लंबित कर दिया गया था। इस पर किसान नेता रमेशचंद पाटीदार ने इसकी सीधी सहकारिता एवं गोपालन विभाग मंत्री को शिकायत कर दी। उनके आदेश पर फिर से दायित्व जांच शुरू हो गई।

पहले धारा 55 ए की जांच

जांच अधिशाषी अधिकारी राजेश मीणा ने अपनी टीम के साथ आकर बैंक में संबंधित रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि इसमें सहकारी समिति अधिनियम की धारा 55 के तहत पहले पूर्व की जांच में आए परिणाम और संबंधित दोषी व्यक्ति की जांच होगी। इसके बाद धारा 57-1 में उसके आचरण की जांच होगी कि उसका इसमें कितनी राशि का दोष है। इसके बाद उससे इस राशि की वसूली के लिए नोटिस दिए जाएंगे। इसमें राशि नहीं आ सकी तो आगे कुर्की आदि की कार्रवाई होगी।