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गांव में खुलेगी प्रयोगशाला, किसान करवा सकेंगे मिट्‌टी की जांच

किसानों को अपने खेतों की मिट्‌टी जांच के लिए अब जिला मुख्यालय या उपखंड मुख्यालय स्थित मृदा प्रयोगशाला में नहीं...

Danik Bhaskar

Mar 12, 2018, 02:25 AM IST
किसानों को अपने खेतों की मिट्‌टी जांच के लिए अब जिला मुख्यालय या उपखंड मुख्यालय स्थित मृदा प्रयोगशाला में नहीं भटकना पड़ेगा। इसके लिए कृषि विभाग की ओर से इच्छुक योग्यताधारी युवकों से आवेदन लेकर गांवों में मृदा जांच की प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। इसके लिए विभाग की ओर से आवेदक को अनुदान भी दिया जाएगा।

खेतों में उर्वरक के संतुलित प्रयोग को बढ़ावा देने, मिट्‌‌टी की गुणवत्ता बढ़ाने, समय-समय पर मृदा की जांच हो सके तथा गांवों में युवाओं को रोजगार मिल सके, इसके लिए कृषि विभाग की ओर से नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर योजना के सॉयल हेल्थ मैनेजमेंट के तहत ग्रामस्तर पर मिट्‌टी परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। प्रयोगशाला में किसान अपने खेत की मिट्‌टी के नमूने का परीक्षण करवाकर पोषक तत्वों की पूर्ति कर उन्नत पैदावार कर सकेगा। वर्तमान में इस तरह की प्रयोगशाला जिला मुख्यालय और भवानीमंडी, अकलेरा उपखंड मुख्यालय पर है। अब कृषि विभाग की इस योजना में योग्यताधारी युवकों से आवेदन लिए जाएंगे। विभाग के निर्धारित मापदंड पूरे करने के बाद उसे प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद उस युवक द्वारा गांवों में मृदा परीक्षण के लिए प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी।

युवाओं को भी मिलेगा रोजगार का अवसर, योग्यताधारी से आवेदन लेकर दिया जाएगा प्रयोगशाला संचालन का प्रशिक्षण

प्रयोगशाला स्थापित करने वाले को एक नमूने की जांच के मिलेंगे 300 रुपए

प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए 2 लाख 50 हजार रुपए की लागत में लेब उपकरण खरीदे जाएंगे। एक लाख रुपए से कंप्यूटर, प्रिंटर, स्केनर सहित कई अन्य उपकरण खरीदे जाएंगे। एक लाख 50 हजार रुपए बिजली, पानी, बोर्ड, टेलीफोन कनेक्शन एवं स्टेशनरी पर खर्च होंगे। प्रयोगशाला में एक वर्ष में कम से कम तीन हजार नमूनों की जांच की जा सकेगी। मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्रस्तुत कर एक नमूने की जांच करने पर संबंधित को 300 रुपए दिए जाएंगे। इसमें 150 रुपए मृदा के नमूने की जांच करने एवं 150 रुपए मृदा स्वास्थ्य कार्ड पंजीकरण करने पर मिलेंगे।

5 लाख आएगी लागत, एक वर्ष में 3 हजार नमूनों की जांच

ग्राम स्तर पर प्रयोगशाला स्थापित करने के लिए करीब 5 लाख रुपए की लागत आएगी। इसके लिए सरकार की ओर से 75 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। प्रयोगशाला के लिए कुल मिलाकर पौने चार लाख का अनुदान मिल सकेगा। वहीं 25 प्रतिशत खर्चा आवेदक स्वयं वहन करेगा।


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