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टैंकरों पर जीपीएस नहीं लगाए तो भुगतान रोक दिया, अब फ्लोमीटर भी लगाने होंगे

आने वाले दिनों में फिर से जिले में पेयजल संकट शुरू हो जाएगा। इसके बाद पीएचईडी को टैंकरों से जलापूर्ति करानी होगी,...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 19, 2018, 02:30 AM IST

आने वाले दिनों में फिर से जिले में पेयजल संकट शुरू हो जाएगा। इसके बाद पीएचईडी को टैंकरों से जलापूर्ति करानी होगी, लेकिन पिछले साल का टैंकर संचालकों का भुगतान अभी तक अटका हुआ है। इसका मुख्य कारण टैंकरों पर जीपीएस सिस्टम नहीं लगाना है। जीपीएस नहीं लगाने के कारण सहायता विभाग ने 10 लाख से अधिक का भुगतान रोक दिया है। हालांकि, पीएचईडी के अधिकारियों का कहना है कि जीपीएस लगाने के नियम बाद में आए थे, उससे पहले ही टैंकर संचालन के टैंडर हो चुके थे। इसके चलते शर्तों में नहीं होने से टैंकर संचालक जीपीएस नहीं लगा पाए। अब सहायता विभाग ने इस भुगतान को रोक दिया है।

हालांकि, प्रशासन के स्तर पर इनका भुगतान करवाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। दरअसल टैंकरों से जलापूर्ति में कई क्षेत्रों में बड़े घपले भी सामने आते हैं। पिछले साल राजस्थान के कई क्षेत्रों में ऐसे ही घपले सामने आने के बाद सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पानी परिवहन करने वाले प्रत्येक टैंकर में जीपीएस सिस्टम लगाया जाएं। उसके बाद ही इन टैंकरों का भुगतान होगा। नियम आने के बावजूद भी बड़ी संख्या में टैंकर संचालक अपने टैंकरों पर जीपीएस सिस्टम नहीं लगा पाए। जीपीएस सिस्टम नहीं लगाने के मामले को ही सहायता विभाग ने गड़बड़ी की श्रेणी में माना है। इसी का नतीजा है कि अब इनके भुगतान पर संकट आ चुका है। पीपाजी दह सहित जिले के अन्य पेयजल स्त्राेतों में लगातार पानी कम होता जा रहा है। इसी का नतीजा है कि अब जल्द ही जिले में टैंकरों से पानी का परिवहन होने लगेगा।

ऐसे चलता है टैंकरों में गड़बड़ियों का खेल

टैंकरों से जब पानी का संचालन किया जाता है तो अधिकतर लोगों की शिकायत रहती है कि टैंकर संचालक फोन करने के बावजूद भी टैंकर नहीं पहुंचाते हैं और कागजों में इन्हीं टैंकरों को दर्शा दिया जाता है। इनमें आधा टैंकर खाली करके आधा बेचने की शिकायतें भी आती हैं। इन्हीं शिकायतों के बाद ही तय किया गया कि टैंकरों पर जीपीएस सिस्टम लगाया जाए ताकि इससे टैंकर की लोकेशन पता चल सके। साथ ही इसी लोकेशन के आधार पर टैंकरों का भुगतान किया जाएगा। जानकारों की मानें तो जीपीएस सिस्टम से टैंकरों में होने वाले तमाम फर्जीवाड़े रुकने की पूरी संभावना रहती है।

फाइल फोटो।

अब टैंकर के पानी का होगा हिसाब

इस साल जीपीएस के साथ ही टैंकर संचालकों को फ्लोमीटर भी लगाना होगा। जीपीएस से टैंकर की लोकेशन तो पला चल ही जाएगी साथ ही फ्लोमीटर में यह भी आ जाएगा कि कितने लीटर पानी कहां पर खर्च हुआ। फ्लोमीटर लगने के बाद कोई यह भी शिकायत नहीं कर सकेगा कि उनके क्षेत्र में आधा ही टैंकर खाली हो पाया है। दूसरी और हर प्रकार के फर्जीवाड़े पर निगाहबानी के साथ ही कितना पानी लोगों को दिया गया इसका भी हिसाब हो सकेगा। इसी हिसाब के आधार पर ही टैंकर संचालकों को भुगतान किया जाएगा। दरअसल बारिश की कमी के चलते अभी से ही जलस्स्रोतों में पानी की कमी होने लगी है। इसके चलते जल्द ही जिले में टैंकरों से पानी का संचालन होने लग जाएगा। पीएचईडी के अधिकारी टैंकर संचालन से पानी के परिवहन की तैयारियां भी कर रहे हैं।अभी जिले के सारोला क्षेत्र में पानी की दिक्कत चल रही है। इसी तरह भवानीमंडी के आसपास के क्षेत्रों में भी परेशानी शुरू हो चुकी है। अभी पीएचईडी ने 350 से अधिक गांवों में टैंकर संचालन के लिए तैयारी कर रखी है। पीपाजी दह का जलस्तर टूटने के बावजूद भी शहरवासियों को पानी की दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा क्योंकि बिंदूदह से यहां पर पानी लिफ्ट किया जा सकेगा, लेकिन सबसे अधिक परेशानी ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को भुगतनी पड़ेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में चौमहला के आसपास के क्षेत्र, मिश्रोली, पचपहाड,बकानी सहित अन्य क्षेत्रों में पानी की समस्या लोगों को अब भुगतनी पड़ेगी।

टैंकरों में जीपीएस सिस्टम के साथ ही अब फ्लोमीटर लगाने के निर्देश भी मिले हैं। इसी हिसाब से निविदा की जाएगी।-जेपी व्यास, एसई, पीएचईडी, झालावाड़

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