--Advertisement--

उपदेश से ज्यादा आचरण का महत्व है: प्रसन्नाश्री

भवानीमंडी निवासी साक्षी जैन, श्वेतांबर जैन साध्वी प्रसन्नाश्री बनने के चार साल बाद गुरुवार को भवानीमंडी के...

Danik Bhaskar | Feb 23, 2018, 02:30 AM IST
भवानीमंडी निवासी साक्षी जैन, श्वेतांबर जैन साध्वी प्रसन्नाश्री बनने के चार साल बाद गुरुवार को भवानीमंडी के पचपहाड़ में पहुंची। वे शनिवार को भवानीमंडी में सुबह 8.30 बजे राधेश्याम मंदिर बगीचे के यहां से मंगल प्रवेश करेंगी।

प्रसन्नाश्री ने इस अवसर पर पचपहाड़ में साधू जीवन पर बहुत गहराई से प्रकाश डालते हुए कहा कि साधु जीवन में उपदेश से ज्यादा उसके आचरण का महत्व होता है। उन्होंने कहा जैन साधु त्याग और जीवन दया को प्राथमिकता देते है। अगर, हम भी सड़क पर पैदल चलने की बजाय वाहनाें में बैठकर चलने लगेंगे तो श्रोताओं पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। उनसे जब यह पूछा गया कि जैन धर्म जब इतना त्यागी है तो इस धर्म का सिर्फ जैन देवालयाें में ही क्यों प्रचार किया जाता है। इसे आम लोगों के बीच में क्यों नहीं ले जाया जाता है। भीड़ में भी क्यों माइक का उपयोग नहीं किया जाता है। इस पर वे बोली, जैन साधु शैली में भी बदलाव आ रहे है। प्रमुख साधुगणों की मीटिंग में तय किया गया है कि अगर, पांच से दस हजार श्रोताओं की भीड़ हो तो वहां पर अपना संदेश पहुंचाने के लिए माइक का उपयोग किया जा सकता है। जैन साध्वी ने इस पर आगे यह भी कहा कि हमारा मत है कि जिसे प्रवचन श्रवण करने हाेंगे तो वह तो आगे यूं भी आकर बैठ जाएगा। जिसे इनसे मतलब नहीं रखना होगा, उनपर माइक से भी कोई असर नहीं होगा। उन्होेंने यह भी कहा कि साधु भी कोई भगवान नहीं है। उनसे भी कोई गलती हो जाए तो उन्हें भी प्रेमपूर्वक इसका अहसास कराए। लेकिन सोश्यल मीडिया वाटसएप्प पर इसका कुप्रचार नहीं करें। इस पर अच्छी बातों का ही प्रचार करे। अच्छे काम की ही सराहना करें, बुरे काम की काम की कभी प्रशंसा नहीं करें।

फूल से स्वागत नहीं करें

जैन साध्वी प्रसन्नाश्री का शनिवार को सुबह 8.30 बजे भवानीमंडी में मंगल प्रवेश होगा। यह जुलूस अस्पताल तिराहे से आदर्श स्कूल और गर्ल्स स्कूल तथा वहां से नई सब्जीमंडी होकर संस्कृत स्कूल और वहां से जैन मंदिर के बाद सुबह करीब 11 बजे आदर्श विद्या मंदिर पहुंचेगा। वहां पर जैन साध्वी के प्रवचन होंगे। व्यापार महासंघ के पूर्व अध्यक्ष राजेश नाहर जुलूस पर पुष्प वर्षा नहीं करें। स्वागत के लिए थर्मा कोल की रंगीन गोली या चमकीली पन्नियां बरसाए।

प्रसन्नाश्री