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गांव को दो जगह बसाया, एक में सभी सुविधाएं दूसरे में सड़क और हैंडपंप के अलावा कुछ नहीं

राजगढ़ बांध के डूब प्रभावितों को देने के लिए पर्याप्त बजट है, लेकिन पचपहाड़ व पिड़ावा तहसील कार्यालयों से पांच गांवों...

Danik Bhaskar | Feb 23, 2018, 02:30 AM IST
राजगढ़ बांध के डूब प्रभावितों को देने के लिए पर्याप्त बजट है, लेकिन पचपहाड़ व पिड़ावा तहसील कार्यालयों से पांच गांवों के 350 प्रभावितों की जमीन के डूब क्षेत्र का वास्तविक आंकलन (तरमीम) नहीं हो पाने से इन्हें अभी तक मुआवजा नहीं मिल सका है। जल संसाधन विभाग की योजना है कि इस बांध में आगामी बारिश का पानी रोका जाए।

ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दे दी है कि अगर 15 मार्च तक मुआवजा नहीं मिला और अन्य समस्या का समाधान नहीं हो सका तो वे बांध का काम बंद करा देंगे। गांव भी खाली नहीं करेंगे। अगर तहसील कार्यालयों से समय रहते तरमीम नहीं हो पाई तो विभाग की अगली बारिश में बांध में पानी रोक देने की योजना पर ही पानी फिर जाएगा।

11 गांवों का मुआवजा भेजा, 5 का तरमीम के अभाव में रुका

जल संसाधन विभाग ने जमीन डूब के द्वितीय चरण का फाइनल का बजट मंगवा लिया है। डूब क्षेत्र के 11 गांवों की जमीन का मुआवजा देने के लिए भूमि अवाप्ति अधिकारी को 16 करोड़ रुपए भिजवा दिए। लेकिन धतुरियाकला, गैलाना और सिलेगढ़ तथा मिश्रौली के 200 किसानों का 11 करोड़ रुपए का मुआवजा राशि महज, इसलिए नहीं भेजी जा सकी है, क्योंकि तहसील कार्यालयों ने इन किसानों की अभी तक तरमीम पूर्ण नहीं की है।

भवानीमंडी. मुआवजा व सुविधाओं की मांग को लेकर प्रदर्शन करते डूब क्षेत्र के ग्रामीण।

अजीब दास्तां: जिनका पूरा हिस्सा डूबा, वही सुविधाओं से महरूम

सबसे विचित्र स्थिति तो इस बांध में संपूर्ण रूप से डूब में आए धतूरिया गांव की है। इसके आधे भाग के करीब 248 परिवारों को नई पुनर्वास कॉलोनी अरनियाखेड़ी में बसने के लिए प्लाॅट आवंटन किए गए है। डूब गांव धतुरिया में एक स्कूल और आंगनबाड़ी तथा सामुदायिक भवन होने से इतनी ही सुविधा विकसित की जानी थी। जल संसाधन विभाग ने इन्हें प्रथम पुनर्वास कॉलोनी अरनियाखेड़ी में बना दिया। गांव के आधे भाग के 171 परिवारों को पूरा गांव के देवपुरा के डूंगर स्थित कॉलोनी में बसाने की योजना है। लेकिन पूरा में सिर्फ सड़क और हैंडपंप का बनाने का ही आश्वासन दिया है। गुरुवार को पूरा में भूखंड आवंटन के लिए लाॅटरी निकाली गई तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। ग्रामीण जुझारसिंह आदि ने बताया कि जल संसाधन विभाग ने इस पूरा कॉलोनी में न तो स्कूल बनाया न आंगनबाड़ी बनाई है। विभाग कहता है कि डूब गांव की सुविधा अरनियाखेड़ी कॉलोनी में बना दी। लेकिन पूरा और अरनियाखेड़ी गांव के बीच 4 किमी की दूरी है। बीच में रास्ता भी नहीं है। दूसरा हमें अभी तक मुआवजा भी नहीं मिला है। जब तक हमारी कॉलोनी में आंगनबाड़ी एवं स्कूल और सामुदायिक भवन नहीं बन जाते, हम गांव खाली नहीं करेंगे। उन्होंने आगाह किया कि जमीन डूब का भी अगर 15 मार्च तक मुआवजा नहीं दिया गया तो वे इसके बाद बांध का निर्माण कार्य ही बंद करा देंगे।