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विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी से 6 रैफरल यूनिट 10 साल से बंद, जिला अस्पताल पर बढ़ रहा लोड

जिले के 9 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को एफआरयू का दर्जा प्राप्त है, लेकिन वर्तमान में 6 एफआरयू यूनिट बंद है। इनके...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 25, 2018, 02:35 AM IST

जिले के 9 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को एफआरयू का दर्जा प्राप्त है, लेकिन वर्तमान में 6 एफआरयू यूनिट बंद है। इनके बंद होने से माइनर सर्जरी के लिए भी मरीजों को इलाज के लिए जिला अस्पताल आना पड़ता है।

जिन तीन एफआरयू यूनिट भवानीमंडी, अकलेरा व खानपुर संचालित है, इनके सर्जन पर भी परिवार नियोजन कार्यक्रम के टारगेट पूरा करने का जिम्मा है। खास बात तो यह है कि पिछले 10 सालों में भी स्वास्थ्य विभाग इन यूनिटों को शुरू नहीं कर पाया है। इन एफआरयू के बंद होने का प्रमुख कारण है। चार तरह के विशेषज्ञों की कमी। पहले तो जिले के 9 ही एफआरयू बंद थे। यहां केवल प्राथमिक उपचार व सामान्य प्रसव हो रहे थे। लोगों की शिकायत पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने झालावाड़ दौरे के दौरान तुरंत प्रभाव से तीन एफआरयू को संचालित करने के निर्देश दिए थे, तब जाकर स्वास्थ्य विभाग ने तीन यूनिट शुरू की थी, लेकिन यह भी बीच-बीच में बंद हो रही थी। इन सभी यूनिटों को संचालित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग को 48 विशेषज्ञ डॉक्टरों की आवश्यकता है।

छह एफआरयू में रोज आते हंै 3600 मरीज

मनोहरथाना. कस्बे में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र।

10 प्रसूताएं प्रतिदिन होती हैं रैफर

108 व 104 एंबुलेंस विभाग के अनुसार ग्रामीण सीएचसी पीएचसी से प्रतिदिन औसत 10 प्रसव केस को लेकर जिला अस्पताल आती है। इसके अलावा कई जगह एंबुलेंस सुविधा नहीं होने पर कुछ लोग निजी साधनों से भी अस्पताल पहुंच रहे हैं। खासकर भालता कस्बे से।

जिले में विशेषज्ञों की स्थिति

जिले में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 75 पद स्वीकृत है। इसमें से 48 पद रिक्त चल रहेे हैं। वर्तमान में विभाग के पास सर्जन 8, शिशु रोग विशेषज्ञ 3, गायनिक रोग विशेषज्ञ 3, एनेस्थेटिक 4 ही मौजूद है। इन विशेषज्ञों से केवल तीन ही एफआरयू यूनिट संचालित हो पा रही है।

क्या है एफआरयू:एफआरयू (फस्ट रेफरल यूनिट) होती है। इनका दर्जा उन अस्पतालों को दिया जाता है, जहां 24 घंटे मरीजों को इलाज की सुविधा मिले। मरीजों को सभी प्रकार की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सके। जहां आवश्यक विशेषज्ञ डॉक्टर हो। जिसमें स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, सर्जन एवं एनेस्थीसिया विशेषज्ञ होना आवश्यक है। जहां मरीज की तुरंत सर्जरी की सुविधा मिल जाए।

बंद पड़े 6 एफआरयू में प्रतिदिन इलाज के लिए 3600 मरीज आते है। यानी प्रत्येक एफआरयू अस्पताल में प्रतिदिन ओपीडी में 300 मरीज आते है। यहां विशेषज्ञ नहीं होने से सिजेरियन प्रसव व गंभीर शिशु रोगियों को सीधे झालावाड़ जिला अस्पताल रैफर किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र से प्रतिदिन 10 प्रसव केस रैफर होकर जिला अस्पताल आते है।

बीमार अस्पतालों का हाल

जिले में सीएचसी 14 पीएचसी 36

जिले में 9 सीएचसी को एफआरयू का दर्जा, इसमें से 6 यूनिट बंद पड़ी है।

जिले में 75 विशेषज्ञों के पद स्वीकृत है, लेकिन 48 विशेषज्ञों पद रिक्त है।

प्रतिदिन 10 प्रसव केस ग्रामीण अस्पतालों से रैफर होकर जिला अस्पताल आते है।

इसके अलावा 25 केस अस्थि विभाग, 50 केस मेडिसिन बीमारियों के रैफर होते है

छह एफआरयू बंद पड़े है प्रत्येक से 80 से 100 गांव जुडे़ हुए हैं।

इसके अलावा एक सीएचसी से 4 पीएचसी भी जुड़ी हुई है।

जिले के 7 डॉक्टरों को ट्रेनिंग देकर विशेषज्ञ बनाया जा रहा है।

इनको एफआरयू का दर्जा

जिले में 9 अस्पतालों को एफआरयू का दर्जा प्राप्त है। इसमें से मनोहरथाना, बकानी, झालरापाटन, अकलेरा, पिड़ावा, सुनेल, भवानीमंडी, खानपुर, चौमहला को एफआरयू का दर्जा प्राप्त है, लेकिन इनमें से छह अस्पतालों तो एक भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं है।

जिले में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण 6 एफआरयू बंद है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के लिए मुख्यालय को अवगत करा रखा है। अभी वर्तमान में तीन एफआरयू संचालित है। डॉ. साजिद खान, सीएमएचओ

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