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अवैध वाहनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से थमे रोडवेज के पहिए, 2 साल में 50 बसें बंद

जिले में अवैध वाहनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से एक के बाद एक रोडवेज बसों के पहिये थमते जा रहे हैं। दो सालों में...

Danik Bhaskar

Feb 01, 2018, 12:12 PM IST
जिले में अवैध वाहनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से एक के बाद एक रोडवेज बसों के पहिये थमते जा रहे हैं। दो सालों में विभिन्न मार्गों की 50 से अधिक बसें बंद कर दी गईं। इसके कारण यात्री निजी या लोडिंग वाहनों में यात्रा करने को मजबूर है। एक समय था जब हर दस मिनट बाद रोडवेज बस यात्रियों के लिए उपलब्ध होती थी, लेकिन आज दो घंटे इंतजार करने पर भी रोडवेज बस नहीं आती। डग-भवानीमंडी मार्ग पर रोडवेज की 22 बसों का संचालन होता था, अब केवल 4 गाड़ियां चल रही हैं। रटलाई के लिए एक बस चलती थी, वह भी बंद हो गई। यही हाल अन्य मार्गों का भी है।

रोडवेज कर्मचारियों ने यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए परिवहन मंत्री, कलेक्टर, परिवहन अधिकारी सभी को ज्ञापन दिया, धरना-प्रदर्शन किए, लेकिन किसी ने अवैध वाहनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। जबकि यहां विभिन्न मार्गों पर कई निजी वाहन बिना परमिट चल रहे हैं। अवैध वाहनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने से उनके हौसले इतने बुलंद हो गए हैं कि परिवहन नियमों को ताक पर रखते हुए वे रोडवेज बस स्टैंड के गेट से सवारियां बिठाकर ले जा रहे हैं। जबकि नियमानुसार रोडवेज बस स्टैंड से एक किमी क्षेत्र के अंदर कोई निजी वाहन खड़ा नहीं होना चाहिए। अब बस स्टैंड के गेट पर ही ट्रैवल्स ऑफिस खुल चुके हैं।

झालावाड़. रोडवेज बसों के अभाव में लोडिंग वाहनों में यात्रा करते यात्री।

यातायात समिति की बैठक में हर बार उठा मुद्दा, आश्वासनों से आगे नहीं बढ़े जिम्मेदार

जिला प्रशासन समय-समय पर यातायात समिति की बैठक आयोजित करता है। इसमें रोडवेज प्रशासन से भी अधिकारी भाग लेते हैं। उनके द्वारा हर बार अवैध वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाती है, लेकिन हर बार आश्वासन मिलता है, कार्रवाई अभी तक नहीं की गई। प्रदेश में निजी वाहनों के साथ सड़क दुर्घटना आए दिन हो रही है। रोडवेज बसों को ओवरटेक करते तेज गति से बसें भगाकर लोगों की जान जोखिम में डाली जा रही हैं। इसके बाद भी उन पर नियंत्रण के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिले में ही तीन माह में चार बस हादसे हुए हैं, जिनमें 30 से अधिक लोग घायल हुए।


सरकार ने भी खींचे हाथ

विभिन्न मार्गों पर एक के बाद एक रोडवेज बसें बंद हो रही हैं। इसके कारण रोडवेज की हालत भी खराब होती जा रही है। बसें बंद होने व यात्री भार कम होने से झालावाड़ डिपो को ही प्रतिदिन 80 हजार से 1 लाख रुपए तक का घाटा उठाना पड़ रहा है। सरकार से भी रोडवेज को कोई मदद नहीं मिल रही है। रोडवेज प्रशासन न तो नई बसें खरीद रहा है और न ही नए चालक-परिचालक भर्ती किए जा रहे हैं। यहां तक कि बसों के उपकरण तक उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।

किस मार्ग पर कितनी बसें बंद







फैक्ट फाइल









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