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जिस सड़क पर 40 से 50 की स्पीड तय, उस पर 120 की गति से भगा रहे वाहन, सालभर में 163 मौतें

शहर सहित जिलेभर में सड़कों पर गति सीमा निर्धारित की हुई है। इसके बावजूद भी वाहनों की स्पीड पर लगाम नहीं लग पा रही...

Danik Bhaskar | Jan 12, 2018, 02:50 PM IST
शहर सहित जिलेभर में सड़कों पर गति सीमा निर्धारित की हुई है। इसके बावजूद भी वाहनों की स्पीड पर लगाम नहीं लग पा रही है। इसी का नतीजा है कि पिछले एक साल में 449 सड़क हादसों में 163 लोगों की मौत हो गई और 594 लोग गंभीर घायल हुए।

यानी प्रतिदिन 13 लोगों की मौत तेज स्पीड में वाहन चलाने से होने वाली दुर्घटनाओं से हो रही है। शहर में सिटी फोरलेन, मामा भांजा से डाक बंगला रोड, मामा भांजा से फॉरेस्ट रोड, खंडिया से मेगा हाइवे, खंडिया से जवाहर कॉलोनी सहित अन्य हिस्सों में स्पीड लिमिट तय कर रखी है, लेकिन इस स्पीड लिमिट से काफी अधिक गति से वाहन इन सड़कों से गुजरते हैं। ऐसे में इनको रोकने वाला भी कोई नहीं है। सिटी फोरलेन बनने के बाद से लगातार यहां पर बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं और पुलिस प्रशासन इन दुर्घटनाओं की रोक नहीं पा रहा है। इन दुर्घटनाओं के कारणों को जानने के लिए भास्कर टीम ने इंटरसेप्टर वाहन की मदद ली। शहर के सिटी फोरलेन पर जगह-जगह जाकर वाहनों की रफ्तार देखी तो पता चला कि जहां पर 40 से 50 तक की स्पीड में वाहन गुजरने चाहिए। वहां पर 100 से 120 की स्पीड से वाहन गुजर रहे हैं। इंटरसेप्टर वाहन में पिछले कई दिनों तक का रिकॉर्ड लिया गया तो पता चला कि रात के वाहनों की सबसे अधिक स्पीड रात के समय रहती है। ऐसे में उस समय दुर्घटनाओं का अंदेशा भी ज्यादा होता है।

झालावाड़. झिरनिया गाव का अंधा मोड़। यहां ज्यादा हादसे होते हैं।

सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं झिरनिया के अंधे मोड पर, 120 तक की स्पीड से गुजरे वाहन

जिले में सबसे अधिक दुर्घटनाएं झिरनिया के अंधे मोड़ पर हो रही हैं। यहां पर अंधा मोड़ होने के साथ ही वाहन की गति भी बढ़ जाती है। इंटरसेप्टर वाहन ने जब यहां पर स्पीड लिमिट देखी तो 120 किमी प्रति घंटे की रफ्तार मिली। सबसे अधिक दुर्घटनाएं इसी प्वाइंट पर होती हैं। शहर की सीमा में जनवरी 2017 से दिसंबर 2017 तक 65 दुर्घटनाएं हुई हैं। इनमें अधिकतर दुर्घटनाएं सिटी फोरलेन पर हुई हैं। इन दुर्घटनाओं में 17 मृत हुए और 74 गंभीर घायल हुए। सर्किट हाउस के सामने 55 से 100 किमी प्रति घंटे की की स्पीड मिली। यह स्पीड अस्पताल तक बरकरार रही। इसके बाद अस्पताल के सामने भीड़भाड़ वाला क्षेत्र होने के चलते यहां पर 50 की स्पीड से भी वाहन गुजरे। जबकि यहां पूरी तरह से आबादी क्षेत्र होने से 40 की स्पीड से अधिक वाहन नहीं निकलने चाहिए। रलायती से भवानीमंडी मार्ग पर भी यही हालात हैं यहां पर टोल टैक्स के बाद से ही वाहनों की गति बढ़नी शुरू हो जाती है। इस मार्ग पर 100 से 120 किमी की स्पीड से वाहन निकलना आम बात हो गई है, जबकि इस मार्ग की गति सीमा 70 से 80 किमी प्रति घंटा तय की हुई है।

सिटी फोरलेन:स्पीड पर नहीं रख पा रहे काबू, डेढ़ माह में 3 बसें पलटीं

सिटी फोरलेन पर स्पीड पर काबू नहीं कर पा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि डेढ़ माह में 3 बस पलटने की घटना इस मार्ग पर हो चुकी है। 7 जनवरी 2018 को तेज स्पीड से कोटा जा रही बस के अचानक ब्रेक लगाने से बस पलट गई। इसमें 20 से अधिक लोग घायल हुए थे। इसी तरह दिसंबर में कोटा की ओर से आ रही प्राइवेट बस वृंदावन गांव के निकट नाला पारकर दूसरी तरफ कूद गई। यह बस भी तेज स्पीड में थी और बड़ी दुर्घटना होने से बच गई। इसी तरह दिसंबर माह में सिटी फोरलेन पर एक बस टेम्पो को टक्कर मारकर दूसरी तरफ जा गिरी थी। इसमें भी बड़ा हादसा टला था।

बकानी मेगा हाइवे पर 35 दुर्घटनाएं, 12 मरे

बकानी में मेगा हाइवे बनने के बाद दुर्घटनाओं में तेजी आईं है। 2014 से 2016 के बीच जहां बकानी क्षेत्र में 5 से भी कम दुर्घटनाएं तीन साल में हुई थीं। वहीं मेगा हाइवे निर्माण के बाद इस मार्ग पर 18 दुर्घटनाएं हुईं, इनमें से 10 लोगों की मौत हो गई और 21 लाेग गंभीर घायल हुए। इस मार्ग पर ज्यादा अंधे मोड़ हैं, जिनको मेगा हाइवे बनने के दौरान नहीं हटाया गया। अब यह अंधे मोड़ आए दिन दुर्घटनाओं काे अंजाम दे रहे हैं।

झालावाड़. सिटी फोरलेन पर इंटरसेप्टर से वाहनों की गति नापते पुलिसकर्मी।

इन खतरनाक मोड़ों पर ज्यादा हादसे

जिले में झरनियां घाटी, एसअारजी अस्पताल के सामने, झालरापाटन में तीनधार पुलिया के पास, संजीवनी अस्पताल के सामने, चंद्रभागा पुलिया, अकलेरा में थरोल गांव के पास, कटफला गांव के पास, असनावर में तलवाडिया गांव के पास, असनावर बस स्टैंड, डूंगर गांव के पास, झालरापाटन में माधुपुर से भैरुपुरा के पास, बाघेर घाटी, मंडावर तिराहा, भवानीमंडी में नून अस्पताल के सामने, सुनेल में पाऊखेड़ी के पास पुलिस विभाग ने ब्लैक स्पॉट्स तय किया हुआ है। इन क्षेत्रों में काफी अधिक दुर्घटनाएं होती हैं। पुलिस विभाग के अनुसार पिछले तीन साल में 5 सड़क दुर्घटनाओं में 10 या अधिक मौतें होने पर उस क्षेत्र से 500 मीटर तक के क्षेत्र को ब्लैक स्पॉट्स क्षेत्र घोषित कर दिया जाता है। ऐसे जिले में 15 क्षेत्र हैं।

टीआई बोले-इंटरसेप्टर वाहनों से जिलेभर में निगाह रखी जा रही है